Asian Games: क्विम्सी डिसूजा सेमीफाइनल में चूकीं, कांस्य पदक की उम्मीद बरकरार
Asian Games, नेपाल में पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। अब राहत और बचाव के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुनर्निर्माण की है।
Asian Games में क्विम्सी डिसूजा का शानदार सफर जारी, सेमीफाइनल हार के बाद अब ब्रॉन्ज की जंग
Asian Games, नेपाल में पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर जान-माल और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। अब राहत और बचाव के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुनर्निर्माण की है। इसी सिलसिले में नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने भारत से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में सहयोग मांगा है। नई दिल्ली की अपनी पहली विदेश यात्रा के दौरान वाग्ले ने भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर बाढ़ से हुए नुकसान और पुनर्निर्माण की जरूरतों पर चर्चा की। नेपाल सरकार का कहना है कि बोटेकोशी बाढ़ से तबाह हुए मकानों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

भारत से क्यों मांगी गई पुनर्निर्माण में मदद?
18 सितंबर को हुई बैठक में नेपाल के वित्त मंत्री ने बोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से हुई तबाही की जानकारी भारत के सामने रखी। नेपाल की ओर से कहा गया कि बाढ़ से संपत्तियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और इनके पुनर्निर्माण में भारत से महत्वपूर्ण सहायता की उम्मीद है। भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेपाल को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की ओर से कहा गया कि नेपाल की जरूरतों और नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद सहायता को लेकर फैसला किया जाएगा।नेपाल की यह अपील ऐसे समय आई है जब बाढ़ के बाद देश के कई हिस्सों में सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सेवाओं को बहाल करने का काम जारी है। नेपाल सरकार के अनुसार, आपदा से निपटने के लिए देश ने अपने उपलब्ध संसाधनों को लगाया है, लेकिन नुकसान का पैमाना इतना बड़ा है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की लगातार जरूरत बनी हुई है।
करीब 5 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है पुनर्निर्माण की जरूरत
नेपाल सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, आपदा के बाद अगले छह महीनों में शॉर्ट-टर्म रिकवरी और पुनर्निर्माण के लिए लगभग 57.67 मिलियन डॉलर की जरूरत हो सकती है। वहीं लंबे समय के पुनर्निर्माण के लिए अनुमानित आवश्यकता करीब 4.71 अरब डॉलर बताई गई है। नेपाल सरकार नुकसान और जरूरतों का व्यापक आकलन करने के लिए Post Disaster Needs Assessment यानी PDNA भी कर रही है।इस आकलन के पूरा होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन क्षेत्रों में कितनी आर्थिक सहायता की जरूरत है। खास तौर पर परिवहन, ऊर्जा, आवास और स्थानीय बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना नेपाल के लिए बड़ी चुनौती है।
2015 के भूकंप के दौरान भारत की मदद का भी जिक्र
नेपाल और भारत के बीच आपदा के समय सहयोग का पुराना रिकॉर्ड रहा है। 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने बड़े स्तर पर राहत और पुनर्निर्माण सहायता उपलब्ध कराई थी। भारत सरकार ने उस समय बचाव दल, भोजन, पानी, दवाइयां, टेंट और अन्य राहत सामग्री भेजी थी। भारत के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, भूकंप के बाद भारत ने नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए 1 अरब डॉलर की सहायता प्रतिबद्ध की थी। इसके तहत हजारों घरों के साथ स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और सांस्कृतिक परियोजनाओं का पुनर्निर्माण किया गया।भारत के दूतावास के अनुसार, 2015 के पुनर्निर्माण कार्यक्रम के तहत 50,000 घरों का निर्माण 2021 तक पूरा किया गया था। इसके अलावा 70 स्कूल और एक लाइब्रेरी, 125 स्वास्थ्य सुविधाएं और कई सांस्कृतिक परियोजनाएं भी पूरी की गईं। यही वजह है कि मौजूदा संकट के दौरान नेपाल की भारत से सहायता की उम्मीद को दोनों देशों के पुराने सहयोग के संदर्भ में देखा जा रहा है।
बाढ़ के तुरंत बाद भी भारत ने भेजी थी राहत सामग्री
भारत की मदद सिर्फ पुनर्निर्माण की अपील तक सीमित नहीं है। बाढ़ आने के बाद भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी थी। भारत की ओर से 10 टन राहत सामग्री, आवश्यक वस्तुएं और दवाइयां भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी। भारत ने जरूरत पड़ने पर आपदा राहत बल और अन्य संसाधनों के इस्तेमाल की भी पेशकश की थी।नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी अलग-अलग अपडेट में भारत समेत कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त किया है। नेपाल के मुताबिक, भारत, चीन, अमेरिका, जापान, ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और संयुक्त राष्ट्र से भी सहयोग मिला है।
बिजली संकट में भी भारत ने बढ़ाया हाथ
बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया। कई जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान होने के कारण देश की बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई। इसके बाद भारत ने नेपाल को बिजली उपलब्ध कराने का फैसला किया। भारत ने 31 दिसंबर 2026 तक रोजाना 18 घंटे के लिए 654 मेगावाट तक बिजली निर्यात की अनुमति दी है। यह व्यवस्था बाढ़ के बाद नेपाल की घरेलू बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद के लिए की गई है।नेपाल के लिए यह सहायता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की बिजली व्यवस्था में जलविद्युत की बड़ी हिस्सेदारी है। बाढ़ से जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने के कारण ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ा है।
भारत-नेपाल संबंधों में आपदा सहयोग का महत्व
भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक निकटता के कारण प्राकृतिक आपदाओं के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। मौजूदा बाढ़ के बाद भी भारत ने राहत, बिजली और अब पुनर्निर्माण के स्तर पर सहयोग की संभावना जताई है। नेपाल की ओर से भी पुनर्निर्माण के लिए भारत से सहायता की मांग की गई है।हालांकि, अंतिम वित्तीय सहायता कितनी होगी और उसका स्वरूप क्या होगा, यह नेपाल के नुकसान के विस्तृत आकलन और दोनों देशों के बीच आगे होने वाली बातचीत के बाद तय होगा। फिलहाल नेपाल का जोर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने और प्रभावित लोगों के जीवन को सामान्य स्थिति में लाने पर है।इस पूरी स्थिति में 2015 का अनुभव दोनों देशों के सहयोग की पृष्ठभूमि को समझने में अहम है। उस समय भारत ने राहत के साथ-साथ लंबे समय के पुनर्निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। अब 2026 की बाढ़ के बाद नेपाल एक बार फिर भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पुनर्निर्माण में सहयोग की उम्मीद कर रहा है।
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