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MP Petrol Pump UPI Rule: MP में पेट्रोल पंपों पर UPI पेमेंट को लेकर बढ़ी परेशानी, ₹2,000 से ज्यादा पर रोक क्यों?

MP Petrol Pump UPI Rule, मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल खरीदने वाले ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के पेट्रोल पंप डीलरों ने घोषणा की है कि अगर प्रस्तावित Merchant Discount Rate यानी MDR को वापस नहीं लिया गया,

MP Petrol Pump UPI Rule : ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर रोक, CAT ने बताया गंभीर चिंता का विषय

MP Petrol Pump UPI Rule, मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल खरीदने वाले ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। राज्य के पेट्रोल पंप डीलरों ने घोषणा की है कि अगर प्रस्तावित Merchant Discount Rate यानी MDR को वापस नहीं लिया गया, तो 16 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के पेट्रोल और डीजल भुगतान UPI के जरिए स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इस फैसले का असर मध्य प्रदेश के करीब 4,700 पेट्रोल पंपों पर पड़ सकता है। इस बीच व्यापारियों के संगठन Confederation of All India Traders यानी CAT ने इस फैसले को डिजिटल लेनदेन के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है।

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16 अक्टूबर से बदल सकता है पेमेंट का तरीका

मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह के मुताबिक, डीलरों ने फिलहाल सरकार से प्रस्तावित MDR को वापस लेने की मांग की है। अगर इस पर राहत नहीं मिलती है, तो 16 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के ईंधन बिल के लिए UPI भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। यानी ग्राहक ₹2,000 तक का पेट्रोल या डीजल UPI से खरीद सकेंगे, लेकिन इससे अधिक की राशि होने पर उन्हें नकद या उपलब्ध किसी दूसरे भुगतान विकल्प का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।यह फैसला अचानक नहीं आया है। देशभर में ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने के प्रस्ताव को लेकर व्यापारियों और कई कारोबारी संगठनों में चिंता है। पेट्रोल पंप डीलरों का कहना है कि ईंधन कारोबार में उनका मार्जिन सीमित होता है, इसलिए अतिरिक्त पेमेंट प्रोसेसिंग लागत उनके लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है।

क्या है MDR और क्यों हो रहा है विरोध?

MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया में मर्चेंट से लिया जाता है। मौजूदा प्रस्ताव के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र UPI person-to-merchant ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत तक MDR की बात सामने आई है। सामान्य कारोबारी भुगतान में इसका मतलब यह है कि ₹10,000 के ट्रांजैक्शन पर ₹40 तक का शुल्क बन सकता है। हालांकि ईंधन लेनदेन के लिए रिपोर्टों में ₹5 का फ्लैट MDR बताए जाने की बात सामने आई है।पेट्रोल पंप डीलरों का तर्क है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री में उनका मुनाफा पहले से निर्धारित मार्जिन पर निर्भर करता है। ऐसे में हर बड़े डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से पेट्रोलियम डीलर संगठनों ने ईंधन बिक्री को MDR से पूरी तरह बाहर रखने की मांग की है।

CAT ने क्यों जताई चिंता?

CAT ने मध्य प्रदेश में ₹2,000 से ज्यादा के ईंधन भुगतान के लिए UPI बंद करने के फैसले को डिजिटल पेमेंट के लिहाज से गंभीर चिंता बताया है। संगठन का कहना है कि UPI पिछले कई वर्षों में देश के डिजिटल और कैशलेस भुगतान सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना है। ऐसे में बड़े भुगतान के लिए पेट्रोल पंपों पर UPI की सुविधा सीमित होने से डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है।CAT के मध्य प्रदेश पदाधिकारी धर्मेंद्र शर्मा ने भी इस फैसले के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, संगठन ने सरकार से इस मामले पर पुनर्विचार करने और ईंधन कारोबार को प्रस्तावित MDR से राहत देने की मांग की है।

ग्राहकों पर क्या होगा असर?

अगर फैसला तय कार्यक्रम के अनुसार लागू होता है, तो सबसे सीधा असर उन वाहन चालकों पर पड़ेगा जो आमतौर पर बड़ी रकम का पेट्रोल या डीजल UPI से भुगतान करते हैं। खासकर लंबी दूरी तय करने वाले वाहन, व्यावसायिक वाहन और अधिक मात्रा में ईंधन लेने वाले ग्राहकों को ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए नकद की जरूरत पड़ सकती है।हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल पंपों पर UPI पूरी तरह बंद हो जाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ₹2,000 तक के ईंधन भुगतान के लिए UPI सुविधा जारी रहने की बात है। विवाद मुख्य रूप से ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित MDR को लेकर है।

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UPI के इस्तेमाल पर पहले से बढ़ रही बहस

₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR को लेकर सिर्फ पेट्रोल पंप डीलर ही सवाल नहीं उठा रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में व्यापारिक संगठनों ने भी प्रस्तावित शुल्क को लेकर चिंता जताई है। कुछ कारोबारी संगठनों ने डिजिटल पेमेंट की लागत बढ़ने की आशंका जताते हुए विरोध की घोषणा की है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव ने खुदरा कारोबारियों और अन्य कारोबारी समूहों के बीच भी विरोध पैदा किया है।दूसरी तरफ, सरकार की ओर से प्रस्तावित व्यवस्था को डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में देखा जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार का जोर UPI सिस्टम की लागत और उसके लंबे समय के वित्तीय मॉडल पर है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि MDR का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी और इस पर निगरानी रखी जाएगी।

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अभी क्या करना होगा?

फिलहाल मध्य प्रदेश में यह बदलाव 16 अक्टूबर 2026 से लागू करने की घोषणा से जुड़ा है और डीलरों की मांग है कि सरकार इससे पहले MDR के मुद्दे पर राहत दे। अगर प्रस्तावित शुल्क में बदलाव या ईंधन लेनदेन को छूट मिलती है, तो स्थिति बदल सकती है। लेकिन अगर फैसला मौजूदा रूप में लागू होता है, तो ₹2,000 से अधिक के पेट्रोल-डीजल बिल का भुगतान करने वाले ग्राहकों को UPI के बजाय नकद या उपलब्ध दूसरे भुगतान विकल्प का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और व्यापारियों की भुगतान लागत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल पेट्रोल पंप डीलरों की मांग और CAT की चिंता के बीच सरकार के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।

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