Delhi building collapse: सत्य निकेतन इमारत हादसे में नया मोड़, किरण बेदी ने खटखटाया दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा
Delhi building collapse, दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है।
Delhi building collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर हाई कोर्ट में सुनवाई, किरण बेदी की अर्जी का केंद्र ने किया विरोध
Delhi building collapse, दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में पूर्व IPS अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए खुद को मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। हालांकि, गुरुवार 17 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) की ओर से उनकी अर्जी का विरोध किया गया। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ कर रही है।
किरण बेदी ने क्यों मांगी पक्षकार बनने की अनुमति?
रिपोर्टों के मुताबिक किरण बेदी इस मामले में अदालत की सहायता करने के उद्देश्य से हस्तक्षेप करना चाहती हैं। उन्होंने अपनी प्रशासनिक और पुलिस सेवा के लंबे अनुभव के आधार पर मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। अदालत ने सुनवाई के दौरान उनके प्रशासनिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने लंबे अनुभव का इस्तेमाल मामले में किया जा सकता है। पीठ ने यह भी संकेत दिया कि मामला व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है।किरण बेदी की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में पीजी और छात्र आवासों की सुरक्षा, अवैध निर्माण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अदालत पहले से ही इस घटना से संबंधित जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
केंद्र सरकार ने क्यों किया विरोध?
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि उन्हें किरण बेदी की पक्षकार बनाए जाने की अर्जी का विरोध करने के निर्देश मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि बेदी ने मामले से जुड़े मुद्दों पर पहले ही अपनी राय बना ली है और इस वजह से उनका हस्तक्षेप मामले को प्रभावित कर सकता है।हालांकि, अदालत ने इस आपत्ति को तत्काल अंतिम रूप नहीं दिया। सरकार को किरण बेदी की अर्जी पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है। इसके बाद अदालत इस मुद्दे पर आगे विचार करेगी। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को निर्धारित की गई है। उसी तारीख को सत्य निकेतन हादसे से संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई होनी है।
6 सितंबर को हुआ था बड़ा हादसा
सत्य निकेतन में यह हादसा 6 सितंबर 2026 को हुआ था। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित एक पांच मंजिला इमारत, जिसमें लड़कों के लिए पीजी आवास चल रहा था, मरम्मत के दौरान ढह गई। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। घटना के बाद राहत और बचाव अभियान चलाया गया और मामले की जांच शुरू हुई।जांच के दौरान इमारत में निर्माण और मरम्मत से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, मामले में पीजी संचालकों और संपत्ति से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस एक जीवित बचे छात्र के बयान का भी इस्तेमाल जांच में कर रही है। छात्र ने कथित तौर पर बताया कि हादसे से पहले बेसमेंट में अनधिकृत निर्माण का काम चल रहा था और छात्रों ने सुरक्षा को लेकर आपत्ति जताई थी।
हाई कोर्ट पहले ही जता चुका है गंभीर चिंता
सत्य निकेतन हादसे पर दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी गंभीर चिंता जता चुका है। 7 सितंबर को अदालत ने मामले में उच्च स्तरीय MCD जांच के निर्देश दिए थे। अदालत के सामने छात्र आवासों की उपलब्धता, पीजी की सुरक्षा और संबंधित सरकारी एजेंसियों की निगरानी जैसे मुद्दे भी उठे हैं।बुधवार की सुनवाई में भी हाई कोर्ट ने हादसे को लेकर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने इसे सामान्य घटना नहीं माना और मामले में लापरवाही तथा आपराधिक आचरण से जुड़े पहलुओं पर चिंता जताई। अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली में छात्रावासों और छात्र आवासों की समस्या लंबे समय से मौजूद है। इस मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में निजी पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है। खासतौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके आसपास रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई है।मामले से जुड़ी जनहित याचिकाओं में निजी पीजी और हॉस्टलों के स्ट्रक्चरल ऑडिट तथा सुरक्षा व्यवस्था की जांच जैसी मांगें भी उठाई गई हैं। अदालत के सामने यह सवाल भी है कि छात्रों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने और मौजूदा पीजी सुविधाओं की निगरानी के लिए प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
अब 25 सितंबर को होगी अहम सुनवाई
फिलहाल किरण बेदी की ओर से दाखिल पक्षकार बनने की अर्जी पर केंद्र, दिल्ली सरकार और MCD को अपना जवाब दाखिल करना है। अदालत ने इस मामले में सरकार को जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया है। इसके बाद 25 सितंबर को मुख्य मामले के साथ इस अर्जी पर भी सुनवाई होगी।सत्य निकेतन हादसे की जांच और अदालत में चल रही सुनवाई का मुख्य फोकस अब जिम्मेदारी तय करने, छात्र आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने पर है। किरण बेदी की अर्जी पर अदालत क्या फैसला करती है और मामले की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर अब 25 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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