Haryana News: हरियाणा के राइस मिलरों के लिए खुशखबरी! 5 लाख MT चावल जमा करने को मिला अतिरिक्त समय
Haryana News, हरियाणा के राइस मिलरों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से Custom Milled Rice यानी CMR की डिलीवरी को लेकर चल रही परेशानी के बीच केंद्र ने इसकी अंतिम तारीख बढ़ा दी है।
Haryana News : राइस मिलरों के लिए बड़ा अपडेट! 5 लाख मीट्रिक टन CMR लौटाने की बढ़ी समयसीमा
Haryana News, हरियाणा के राइस मिलरों के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से Custom Milled Rice यानी CMR की डिलीवरी को लेकर चल रही परेशानी के बीच केंद्र ने इसकी अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब राइस मिलरों को लंबित चावल की डिलीवरी के लिए 30 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। इससे उन मिलरों को राहत मिलने की उम्मीद है जो पुराने स्टॉक और सरकारी एजेंसियों को चावल सौंपने की प्रक्रिया को लेकर दबाव में थे। रिपोर्टों के मुताबिक हरियाणा में बड़ी मात्रा में CMR अभी लंबित है और मिलर लंबे समय से समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
लंबे समय से चल रहा था चावल का मामला
हरियाणा में धान की सरकारी खरीद के बाद उसे मिलिंग के लिए राइस मिलों को दिया जाता है। मिलिंग के बाद तय मात्रा में तैयार चावल सरकारी एजेंसियों को वापस जमा करना होता है। इसी प्रक्रिया को Custom Milled Rice यानी CMR कहा जाता है। जब किसी कारण से मिलिंग या डिलीवरी समय पर पूरी नहीं हो पाती, तो मिलरों पर लंबित चावल जमा करने का दबाव बढ़ जाता है।पिछले कुछ समय से हरियाणा के राइस मिलर पुराने स्टॉक के निपटारे और CMR की डिलीवरी को लेकर सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखते रहे हैं। अगस्त में भी मिलरों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर डेडलाइन बढ़ाने की मांग की थी। उस समय मिलरों की मांग थी कि चावल लौटाने की समयसीमा को सितंबर के बाद भी बढ़ाया जाए।
30 सितंबर तक मिली राहत
केंद्र सरकार के ताजा फैसले के बाद अब CMR की डिलीवरी के लिए 30 सितंबर 2026 तक का समय मिल गया है। इससे राइस मिलरों को अपने पास मौजूद चावल को व्यवस्थित तरीके से सरकारी एजेंसियों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई धान की खरीद का सीजन नजदीक है। अगर पुराने चावल का स्टॉक समय पर खाली नहीं होता तो राइस मिलों में नए धान के भंडारण और मिलिंग को लेकर समस्या खड़ी हो सकती थी। अतिरिक्त समय मिलने से मिलरों को पुराने स्टॉक के निपटारे में कुछ राहत मिल सकती है।
5 लाख मीट्रिक टन चावल का क्या है मामला?
राइस मिलरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित CMR स्टॉक की है। आपके दिए गए आंकड़े के अनुसार करीब 5 लाख मीट्रिक टन चावल लौटाने का रास्ता अब अतिरिक्त समय मिलने के बाद साफ हुआ है। हालांकि विभिन्न रिपोर्टों में लंबित स्टॉक के आंकड़े अलग-अलग बताए गए हैं और पूरे राज्य में लंबित CMR की मात्रा इससे काफी अलग भी बताई गई है। इसलिए वास्तविक मात्रा मिल, एजेंसी और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर अलग हो सकती है।राइस मिलरों के लिए सबसे अहम बात यह है कि डेडलाइन बढ़ने से उन्हें तुरंत कार्रवाई पूरी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लंबित चावल जमा करने का अवसर मिलेगा।
नई धान की फसल आने से पहले खाली करना होगा पुराना स्टॉक
हरियाणा में धान का नया सीजन करीब है। ऐसे में राइस मिलों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ पुराने सीजन का चावल सरकारी एजेंसियों को लौटाना है और दूसरी तरफ नई धान की फसल आने के बाद उसकी मिलिंग और भंडारण की व्यवस्था करनी है।अगर पुराना स्टॉक समय पर नहीं निकलता तो मिलों में जगह की कमी हो सकती है। इससे नई फसल की खरीद और मिलिंग की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा रहता है। पंजाब में भी इसी तरह पुराने CMR और नई धान की फसल के बीच स्टोरेज संकट को लेकर राइस मिलों में चिंता सामने आई है। वहां केंद्र ने 2025-26 फसल के CMR की डिलीवरी की समयसीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ाई है।
हरियाणा में धान खरीद को लेकर भी तैयारी
हरियाणा में आने वाले धान सीजन को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच भी गतिविधियां तेज हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा किसान मजदूर मोर्चा ने 15 सितंबर तक परमल धान की MSP पर खरीद शुरू करने की मांग रखी है। इससे पता चलता है कि राज्य में नई फसल की खरीद का मुद्दा भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है।ऐसे में पुराने CMR स्टॉक को जल्द से जल्द निपटाना सरकार और मिलरों दोनों के लिए जरूरी हो गया है। इससे नई फसल आने पर खरीद, भंडारण और मिलिंग की प्रक्रिया को सुचारु रखने में मदद मिल सकती है।
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मिलरों की मांगों को मिली आंशिक राहत
हरियाणा के राइस मिलर लंबे समय से CMR की डिलीवरी के लिए अतिरिक्त समय की मांग कर रहे थे। अगस्त में सामने आई रिपोर्टों में मिलरों ने 30 सितंबर की मौजूदा समयसीमा को आगे बढ़ाकर 31 दिसंबर तक करने की मांग की थी।ऐसे में 30 सितंबर तक डेडलाइन बढ़ना मिलरों के लिए राहत जरूर है, लेकिन अगर बड़ी मात्रा में स्टॉक अभी भी बाकी है तो आने वाले दिनों में वे आगे भी समय बढ़ाने की मांग कर सकते हैं। अब मिलरों के सामने चुनौती यह होगी कि उपलब्ध अतिरिक्त समय का इस्तेमाल करते हुए लंबित CMR को तेजी से सरकारी एजेंसियों तक पहुंचाया जाए।
सरकार के सामने भी कई चुनौतियां
CMR की डिलीवरी सिर्फ मिलरों की समस्या नहीं है। चावल को स्वीकार करने, उसकी गुणवत्ता की जांच, स्टोरेज और आगे वितरण की पूरी व्यवस्था सरकारी एजेंसियों से जुड़ी है। अगर मिलों से चावल लगातार आता है लेकिन सरकारी गोदामों में पर्याप्त जगह नहीं है तो समस्या फिर पैदा हो सकती है।पंजाब में भी केंद्र ने CMR की डिलीवरी बढ़ाने के साथ-साथ मिल-वार शेड्यूल, फील्ड स्तर पर निगरानी और चावल की उम्र की जांच जैसे कदमों पर जोर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि CMR की समस्या का समाधान केवल डेडलाइन बढ़ाने से नहीं, बल्कि स्टोरेज और डिलीवरी व्यवस्था को बेहतर करने से भी जुड़ा है।
किसानों और मिलरों दोनों के लिए अहम समय
अब जब नई धान की फसल का सीजन नजदीक है, हरियाणा के लिए आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। सरकार को जहां किसानों से समय पर खरीद सुनिश्चित करनी होगी, वहीं पुराने CMR स्टॉक को भी जल्द से जल्द निपटाना होगा। राइस मिलरों के लिए 30 सितंबर तक मिली अतिरिक्त समयसीमा इस दिशा में एक अहम राहत है।कुल मिलाकर केंद्र द्वारा CMR डिलीवरी की डेडलाइन बढ़ाने से हरियाणा के राइस मिलरों को फिलहाल राहत मिली है। 30 सितंबर 2026 तक का अतिरिक्त समय उन्हें लंबित चावल सरकारी एजेंसियों को लौटाने का मौका देगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि मिलर इस अवधि में कितना लंबित स्टॉक जमा कर पाते हैं और सरकार नई धान की खरीद शुरू होने से पहले भंडारण की समस्या को किस तरह संभालती है।
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