BRICS Summit: भारत दौरे पर शी जिनपिंग का खास प्लान, साथ होंगे उनके ‘राइट हैंड’ कै छी और 67 सदस्य
BRICS Summit, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
BRICS Summit : मोदी-जिनपिंग मुलाकात से पहले बड़ा खुलासा, 27 अगस्त को ही मांगा गया था वीजा
BRICS Summit, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि चीन ने जिनपिंग की भारत यात्रा की आधिकारिक घोषणा से काफी पहले ही इसकी तैयारियां शुरू कर दी थीं। अब सामने आया है कि 27 अगस्त को ही चीन ने जिनपिंग के साथ आने वाले 67 सदस्यीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल के लिए भारतीय दूतावास से वीजा का अनुरोध कर दिया था।

27 अगस्त को ही शुरू हो गई थी भारत यात्रा की तैयारी
शी जिनपिंग की भारत यात्रा की घोषणा भले ही हाल में हुई हो, लेकिन इसके पीछे की तैयारियां कई सप्ताह पहले शुरू हो चुकी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अगस्त को चीन ने आधिकारिक तौर पर भारतीय दूतावास से राष्ट्रपति जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के लिए वीजा जारी करने का अनुरोध किया था। इससे संकेत मिलता है कि बीजिंग काफी पहले से यह सुनिश्चित कर चुका था कि चीनी राष्ट्रपति BRICS सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे।इससे पहले अगस्त में ही ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी कि जिनपिंग BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ सकते हैं। उस समय उनके साथ करीब 400 अधिकारियों के आने की बात कही गई थी। हालांकि, अब उनकी आधिकारिक यात्रा से जुड़ी जानकारी में 67 सदस्यीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल का उल्लेख सामने आया है। इसके अलावा चीन का एक कारोबारी प्रतिनिधिमंडल अलग से भारत पहुंच सकता है।
जिनपिंग के साथ होंगे उनके ‘राइट हैंड’ कै छी
शी जिनपिंग के इस दौरे को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उनके साथ चीन के बेहद प्रभावशाली नेता कै छी (Cai Qi) भी भारत आ रहे हैं। कै छी को कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में जिनपिंग का करीबी सहयोगी और उनका ‘राइट हैंड मैन’ बताया जाता है। वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सात सदस्यीय पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं और उन्हें चीनी सत्ता तंत्र में बेहद प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है।कै छी की मौजूदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहले भी भारत-चीन संबंधों से जुड़े उच्चस्तरीय संपर्कों में भूमिका निभा चुके हैं। 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीन में कै छी से मुलाकात की थी। उस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने और उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।
विदेश मंत्री वांग यी भी प्रतिनिधिमंडल में
जिनपिंग के साथ आने वाले 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल होंगे। वांग यी भारत-चीन संबंधों और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में जिनपिंग के साथ कै छी और वांग यी की मौजूदगी को भारत के साथ बातचीत के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। जिनपिंग की यात्रा करीब 24 घंटे की होगी। रिपोर्ट के अनुसार, वह 12 सितंबर को दोपहर करीब 12:10 बजे भारत पहुंचेंगे और अगले दिन दोपहर लगभग 12:20 बजे रवाना होंगे। शनिवार को भारत मंडपम में उनका स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य BRICS नेताओं के साथ होने की संभावना है।
मोदी-जिनपिंग के बीच होगी अहम द्विपक्षीय बैठक
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक भी होने जा रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को पुष्टि की कि दोनों देशों के बीच बैठक की व्यवस्था की जा रही है। चीन ने कहा है कि वह भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से मजबूत करने के लिए संवाद और सहयोग बढ़ाना चाहता है। दोनों नेताओं की बैठक में सीमा विवाद, व्यापार, बाजार पहुंच, निवेश, सप्लाई चेन और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दे अहम रह सकते हैं। भारत लंबे समय से चीन के साथ व्यापार में संतुलन, भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और भरोसेमंद सप्लाई चेन पर जोर देता रहा है।
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2020 के तनाव के बाद रिश्तों में आई नरमी
भारत और चीन के रिश्ते 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य तनाव के बाद काफी खराब हो गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई। 2024 में कजान में मोदी और जिनपिंग की मुलाकात के बाद रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले। दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा उच्चस्तरीय संपर्क जारी रखने पर सहमति जताई थी। इसके बाद सीमा संबंधी विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी बातचीत आगे बढ़ी। अगस्त 2026 में हुई वार्ता में सीमा प्रबंधन और भविष्य की बातचीत को लेकर कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए। ऐसे में जिनपिंग की भारत यात्रा को केवल BRICS बैठक तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत-चीन संबंधों में आगे की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है।
BRICS सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। भारत की मेजबानी में होने वाली इस बैठक में चीन के जिनपिंग, रूस के व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में वैश्विक व्यापार, आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद , ऐसे में शी जिनपिंग का 67 सदस्यीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आना और यह खुलासा होना कि 27 अगस्त को ही वीजा के लिए अनुरोध कर दिया गया था, बताता है कि बीजिंग ने इस यात्रा को काफी पहले से गंभीरता से तैयार किया था। अब सबसे ज्यादा नजर मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर है और इस बैठक से भारत-चीन संबंधों को कितना नया रास्ता मिलता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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