भारत

Bihar Flood Alert: 8 नदियां उफान पर, 13 जिलों में गहराया बाढ़ का संकट; जानें कितना मिलेगा मुआवजा

Bihar Flood Alert, बिहार में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। राज्य में आठ प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, पटना समेत कई जिलों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है।

Bihar Flood Alert : गंगा समेत 8 नदियां खतरे के ऊपर, 13 जिलों में बढ़ी चिंता; जानें राहत राशि

Bihar Flood Alert, बिहार में लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। राज्य में आठ प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, पटना समेत कई जिलों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है। नेपाल में लगातार बारिश और वहां से आने वाले पानी के कारण भी बिहार की नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने कई संवेदनशील जिलों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पटना, बेगूसराय, भोजपुर और नालंदा समेत कुछ जिलों में विशेष निगरानी की जा रही है। विभाग ने यह आशंका भी जताई है कि गंगा का जलस्तर कुछ स्थानों पर अपने उच्चतम बाढ़ स्तर के करीब पहुंच सकता है।

images?q=tbn:ANd9GcTWVOHLjERrZD8Siok4yK4OcR3Ii5jxUZp S5Fkg9RFCg&s

आठ नदियां खतरे के निशान के ऊपर

राज्य में गंगा, गंडक समेत कई नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। लगातार बारिश के कारण नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ा है। वहीं, नेपाल में हो रही बारिश का असर भी बिहार की नदियों पर पड़ रहा है। गंडक बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिमी चंपारण के बगहा और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है। पटना में गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। प्रशासन ने संवेदनशील घाटों और निचले इलाकों में आवाजाही को लेकर एहतियाती कदम उठाए हैं।

13 जिलों में क्यों बढ़ी चिंता?

बिहार में बाढ़ का खतरा केवल नदी के किनारे बसे इलाकों तक सीमित नहीं है। नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी और बारिश के कारण निचले क्षेत्रों में पानी फैलने की आशंका है। रिपोर्टों में पटना समेत 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने की जानकारी सामने आई है। कई स्थानों पर खेतों और ग्रामीण इलाकों में पानी पहुंचने लगा है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। लोगों से नदी के किनारे जाने और बाढ़ के पानी में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की जा रही है।

सोन बैराज के भी खोले गए सभी गेट

बिहार में बढ़ते जलस्तर के बीच सोन नदी को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। रिपोर्ट के मुताबिक, पानी के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए सोन बैराज के सभी 69 गेट खोले गए हैं। लगातार बारिश के कारण प्रमुख नदियों में पानी बढ़ने से बाढ़ प्रबंधन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। स्थानीय प्रशासन जलस्तर और नदी के प्रवाह की लगातार निगरानी कर रहा है।

बाढ़ से किस तरह का नुकसान हो सकता है?

बाढ़ आने पर सबसे ज्यादा असर आमतौर पर कच्चे मकानों, फसलों, पशुओं और घरेलू सामान पर पड़ता है। खेतों में खड़ी फसल पानी में डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। वहीं, लंबे समय तक पानी जमा रहने से घरों को भी नुकसान पहुंच सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और संपर्क मार्ग डूबने से आवागमन प्रभावित होता है। बिजली और पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में राहत एवं बचाव दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

नुकसान होने पर कितना मिलता है मुआवजा?

बाढ़ जैसी अधिसूचित प्राकृतिक आपदा में राहत और सहायता आमतौर पर SDRF/NDRF के निर्धारित मानकों के तहत दी जाती है। हालांकि मुआवजे की वास्तविक राशि नुकसान की श्रेणी, सर्वेक्षण और लागू सरकारी नियमों पर निर्भर करती है। केंद्र सरकार ने SDRF/NDRF के लिए आपदा राहत संबंधी मानकों और फंड की व्यवस्था तय की है, इसलिए बाढ़ पीड़ित परिवारों को यह समझना जरूरी है कि हर तरह के नुकसान के लिए एक समान रकम नहीं मिलती। मृत्यु, मकान क्षति, फसल नुकसान और पशु हानि के लिए अलग-अलग सहायता का प्रावधान हो सकता है।

परिवार में मृत्यु होने पर सहायता

SDRF के मौजूदा राष्ट्रीय मानकों के तहत प्राकृतिक आपदा में मृत्यु होने पर पात्र परिवार को ₹4 लाख की अनुग्रह सहायता का प्रावधान है। हालांकि किसी विशेष घटना में भुगतान के लिए संबंधित प्रशासन द्वारा मृत्यु और आपदा से संबंध की पुष्टि तथा अन्य निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसलिए अगर बाढ़ में किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो परिवार को संबंधित अंचल, प्रखंड या जिला प्रशासन से मुआवजे की प्रक्रिया की जानकारी लेनी चाहिए।

फसल खराब होने पर क्या मिलेगा?

फसल नुकसान के मामले में सहायता तभी लागू होती है जब नुकसान निर्धारित सीमा और सरकारी मानकों के अनुरूप पाया जाए। SDRF/NDRF के तहत सामान्य तौर पर 33 प्रतिशत या उससे अधिक फसल नुकसान होने पर इनपुट सब्सिडी जैसी सहायता का प्रावधान रहता है। हालांकि फसल की वास्तविक सहायता राशि फसल के प्रकार, क्षेत्र और लागू सरकारी मानकों पर निर्भर करती है। किसान को नुकसान का सही आकलन कराने के लिए स्थानीय कृषि विभाग या प्रशासन को सूचना देनी चाहिए।

पशुओं की मौत पर भी सहायता

बिहार में बाढ़ या अन्य आपदा के दौरान पशुधन के नुकसान के लिए भी सहायता का प्रावधान है। उपलब्ध राज्य-स्तरीय जानकारी के मुताबिक बड़े पशुओं, छोटे पशुओं और पोल्ट्री के लिए अलग-अलग सहायता राशि निर्धारित की गई है। उदाहरण के तौर पर बकरी, भेड़ और सूअर जैसे छोटे पशुओं के लिए ₹4,000 प्रति पशु, जबकि बैल, ऊंट और घोड़े जैसे भार ढोने वाले पशुओं के लिए ₹32,000 प्रति पशु तक सहायता का प्रावधान बताया गया है। वहीं बछड़े, खच्चर, गधे और टट्टू के लिए ₹20,000 प्रति पशु तथा पोल्ट्री के लिए ₹100 प्रति मुर्गी तक सहायता का उल्लेख है। इन मामलों में भी अधिकतम सीमा और पात्रता लागू होती है तथा पशु की मौत की प्रशासनिक पुष्टि जरूरी होती है।

मकान और घरेलू सामान के नुकसान का क्या?

बाढ़ में मकान क्षतिग्रस्त होने पर भी सरकारी राहत मिल सकती है, लेकिन राशि इस बात पर निर्भर करती है कि मकान पूरी तरह नष्ट हुआ है या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त। इसके लिए प्रशासन की टीम मौके पर जाकर नुकसान का आकलन करती है। पीड़ित परिवारों को अपने मकान, फसल या पशु के नुकसान की जानकारी स्थानीय प्रशासन को देनी चाहिए। बिना सरकारी सर्वे या सत्यापन के मुआवजे की राशि तय नहीं होती।

Read More: Michael Hussey: माइकल हसी का बड़ा फैसला, इंग्लैंड की कोचिंग का ऑफर ठुकराया; क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से जुड़े

प्रशासन ने जारी की चेतावनी

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने को कहा है। कुछ जिलों के लिए विशेष चेतावनी जारी की गई है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने तथा जरूरी सामान तैयार रखने की सलाह दी गई है। लोगों को खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों को बाढ़ के पानी से दूर रखना चाहिए। बिजली के तारों और जलमग्न सड़कों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।

Read More: Nepal rescue operation: बाढ़ से दहला नेपाल, मौतों का आंकड़ा 1127 के पार; हजारों लोग अब भी लापता

अभी क्या करें लोग?

अगर आपके इलाके में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, तो प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लें। जरूरी दस्तावेज, दवाइयां, मोबाइल चार्जर, पीने का पानी, सूखा भोजन और जरूरी कपड़े सुरक्षित रखें। मवेशियों को भी ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहिए। अगर पानी घर में प्रवेश करने लगे तो बिजली के उपकरणों से दूर रहें और स्थानीय प्रशासन या राहत दल से संपर्क करें। बिहार में आठ नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने और 13 जिलों में बाढ़ का संकट गहराने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। नेपाल और बिहार में लगातार बारिश तथा बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राहत और मुआवजे की व्यवस्था सरकारी आपदा राहत मानकों के अनुसार होती है। मृत्यु की स्थिति में ₹4 लाख की अनुग्रह सहायता, जबकि फसल और पशु नुकसान के लिए अलग-अलग मानकों के तहत सहायता का प्रावधान है। ध्यान रखें कि मुआवजे की अंतिम राशि स्थानीय सर्वे, नुकसान की श्रेणी और उस समय लागू सरकारी नियमों के आधार पर तय होती है। इसलिए प्रभावित परिवारों को नुकसान की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन को देनी चाहिए और सरकारी सर्वे में अपना विवरण दर्ज कराना चाहिए।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते  हैं info@oneworldnews.com.

Back to top button