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Raghav Chadha: पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम गायब, बोले- ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’, AAP ने दिया जवाब

Raghav Chadha, पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम गायब होने के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है।

Raghav Chadha : राघव चड्ढा का नाम पंजाब SIR से बाहर, AAP बोली- ‘दिल्ली में रहते हैं, जिम्मेदारी आपकी’

Raghav Chadha, पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम गायब होने के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के तहत तैयार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में चड्ढा की एंट्री को ‘shifted’ यानी स्थानांतरित के तौर पर दर्ज किया गया है। इसके बाद राघव चड्ढा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर राजनीतिक बदले का आरोप लगाया है। वहीं, AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है। हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने का मतलब तत्काल तौर पर राज्यसभा की सदस्यता खत्म होना नहीं है। चड्ढा ने खुद कहा है कि यह अंतिम मतदाता सूची नहीं है और दावे एवं आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए नाम को लेकर सुधार कराया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। 2022 में उन्हें आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेजा था। इस साल अप्रैल में उन्होंने AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। अब पंजाब की SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम नहीं मिलने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी एंट्री को ‘permanently shifted’ के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। चड्ढा का कहना है कि उनका वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में पंजीकृत है और वह पंजाब से ही राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में उनका नाम ‘shifted’ के रूप में दर्ज किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर किस अधिकारी ने उन्हें स्थानांतरित मतदाता के रूप में चिह्नित किया और किस स्तर पर इस वर्गीकरण की पुष्टि हुई।

राघव चड्ढा ने लगाए राजनीतिक बदले के आरोप

ड्राफ्ट लिस्ट में नाम गायब होने के बाद चड्ढा ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने इसे महज तकनीकी या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार करते हुए राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उनके मुताबिक, यदि उनका वोटर रजिस्ट्रेशन मोहाली में है तो उन्हें ‘shifted’ कैसे माना गया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नाम को हटाने या स्थानांतरित दिखाने की प्रक्रिया में किस अधिकारी की भूमिका रही। चड्ढा ने कहा कि वह SIR के तहत उपलब्ध दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए इसका समाधान कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

AAP ने क्या कहा?

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पंजाब सरकार का मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पर कोई प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है। AAP का कहना है कि SIR का संचालन चुनाव आयोग करता है, इसलिए नाम के ड्राफ्ट सूची में नहीं होने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। AAP नेताओं ने चड्ढा के दिल्ली में रहने का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि वह दिल्ली में अपना वोटर रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश कर रहे थे और इसी संदर्भ में पंजाब की मतदाता सूची में उनकी स्थिति को लेकर सवाल उठा है। AAP ने उनके आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।

क्या सच में खतरे में है राघव चड्ढा की सांसदी?

यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन सिर्फ ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम गायब होने के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता तुरंत खतरे में है। दरअसल, SIR के दौरान तैयार की गई सूची फिलहाल ड्राफ्ट है। ऐसे मामलों में पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दाखिल करने का मौका मिलता है। अगर किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से छूट गया है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे दोबारा शामिल कराया जा सकता है। इसी वजह से चड्ढा ने भी कहा है कि अंतिम सूची आने से पहले सुधार का रास्ता खुला हुआ है। इसलिए फिलहाल इसे सांसदी खत्म होने का मामला नहीं, बल्कि मतदाता सूची में नाम को लेकर उठा विवाद कहना ज्यादा सटीक होगा।

सांसद ने गिनाए नियम

राघव चड्ढा ने अपने मामले में SIR के नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि सांसदों जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की मतदाता सूची में स्थिति को लेकर विशेष प्रक्रियाएं लागू होती हैं। एक चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि सांसदों जैसे ‘protected list’ वाले व्यक्तियों का नाम SIR ड्राफ्ट में शामिल न होना दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं माना जाता। यही बिंदु अब विवाद का अहम हिस्सा बन गया है। एक तरफ चड्ढा नियमों का हवाला देकर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ AAP का कहना है कि राज्य सरकार का इस प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं है।

‘Shifted’ होने का क्या मतलब है?

मतदाता सूची में किसी व्यक्ति को ‘shifted’ बताने का सामान्य अर्थ यह होता है कि संबंधित व्यक्ति का पता या निवास दूसरी जगह स्थानांतरित माना गया है। SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट मतदाताओं जैसी प्रविष्टियों की पहचान करना है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को गलत तरीके से ‘shifted’ दिखा दिया गया है, तो उसके पास इसे चुनौती देने का अधिकार होता है। यही वजह है कि ड्राफ्ट सूची के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है।

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अब क्या होगा?

राघव चड्ढा के मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण चरण दावे और आपत्तियों का होगा। यदि वह यह साबित करते हैं कि उनका मतदाता पंजीकरण अभी भी पंजाब में वैध है और उन्हें गलत तरीके से ‘shifted’ वर्ग में रखा गया है, तो संबंधित चुनाव अधिकारी रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, SIR की अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर में प्रकाशित की जानी है। चड्ढा ने भी स्पष्ट किया है कि वह उपलब्ध कानूनी और प्रशासनिक उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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AAP-BJP के बीच बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव

राघव चड्ढा का AAP से BJP में जाना पहले ही पंजाब की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम रहा है। ऐसे में मतदाता सूची से उनका नाम गायब होना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस को और तेज कर रहा है। BJP सांसद इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहे हैं, जबकि AAP चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हवाला देकर राज्य सरकार को जिम्मेदारी से अलग कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद केवल मतदाता सूची तक सीमित रहने के बजाय दोनों दलों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन सकता है। पंजाब की SIR ड्राफ्ट मतदाता सूची से राघव चड्ढा का नाम गायब होना निश्चित रूप से गंभीर राजनीतिक विवाद बन गया है, लेकिन फिलहाल इससे उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मामला अभी ड्राफ्ट सूची के स्तर पर है और दावे-आपत्तियों के जरिए सुधार का रास्ता खुला है। अब नजर इस बात पर होगी कि चुनाव अधिकारी चड्ढा के ‘shifted’ दर्ज होने के मामले में क्या जांच करते हैं और अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम किस स्थिति में सामने आता है। इसी के साथ AAP और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

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