Guru Ravidas Jayanti: संत रविदास जयंती पर BJP का बड़ा दांव, बनारस की पवित्र माटी से दिल्ली तक पहुंचा समरसता का संदेश
Guru Ravidas Jayanti, संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली में अपने ‘समरसता संकल्प अभियान’ को गति दी है। सोमवार, 24 अगस्त को राजधानी के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित पावन माटी कलश वंदन एवं वितरण कार्यक्रम में वाराणसी स्थित गुरु रविदास की जन्मस्थली से लाई गई पवित्र मिट्टी से भरे कलशों का पूजन और वंदन किया गया।
Guru Ravidas Jayanti : बनारस से दिल्ली पहुंची संत रविदास की पावन माटी, BJP ने दिग्गजों की मौजूदगी में रवाना किए वाहन
Guru Ravidas Jayanti, संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली में अपने ‘समरसता संकल्प अभियान’ को गति दी है। सोमवार, 24 अगस्त को राजधानी के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित पावन माटी कलश वंदन एवं वितरण कार्यक्रम में वाराणसी स्थित गुरु रविदास की जन्मस्थली से लाई गई पवित्र मिट्टी से भरे कलशों का पूजन और वंदन किया गया। इसके बाद इन कलशों को दिल्ली के सभी 14 संगठनात्मक जिलों तक पहुंचाने के लिए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और संत-महात्मा मौजूद रहे। भाजपा की ओर से इस पहल को गुरु रविदास के सामाजिक समानता, मानव सम्मान और समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के अभियान के तौर पर पेश किया गया है।
650वीं जयंती पर सात महीने का अभियान
गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर भाजपा ने देशभर में लंबे समय तक चलने वाले ‘श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान’ की शुरुआत की है। यह अभियान 29 जुलाई 2026 से शुरू होकर 20 फरवरी 2027 तक चलाया जाएगा। इसके जरिए भाजपा सामाजिक समरसता, सद्भाव, समानता और राष्ट्रीय एकता का संदेश लोगों तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है।अभियान के तहत गुरु रविदास की जन्मस्थली वाराणसी से पवित्र मिट्टी को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया जा रहा है। भाजपा इसे सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने वाले अभियान के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
दिल्ली के 14 जिलों तक पहुंचेगी पावन माटी
तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण वाराणसी से लाई गई पवित्र मिट्टी से भरे कलश रहे। इन कलशों को दिल्ली के सभी 14 संगठनात्मक जिलों में पहुंचाया जाएगा। इसके बाद पार्टी की योजना इन्हें अलग-अलग मंडलों और मंदिरों तक ले जाने की है, ताकि गुरु रविदास की शिक्षाओं और सामाजिक समरसता के संदेश को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके।इस कार्यक्रम को भाजपा के संगठनात्मक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि अभियान के जरिए पार्टी स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
नितिन नवीन ने गुरु रविदास के विचारों को बताया प्रासंगिक
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कार्यक्रम के दौरान गुरु रविदास के जीवन और उनके सामाजिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने ऐसे समय में समाज को नई दिशा देने का काम किया, जब ऊंच-नीच, भेदभाव और कई सामाजिक कुरीतियां मौजूद थीं। उनके मुताबिक संत रविदास के विचारों को केवल स्मरण करने के बजाय उन्हें सामाजिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है।नवीन ने गुरु रविदास के विचारों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र से भी जोड़ा। भाजपा का कहना है कि गुरु रविदास की शिक्षाएं समाज में समानता और हर व्यक्ति के सम्मान का संदेश देती हैं।
सामाजिक समरसता पर भाजपा का जोर
भाजपा की ओर से इस पूरे अभियान को ‘समरसता’ के विचार से जोड़ा जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि गुरु रविदास का जीवन और उनकी वाणी सामाजिक भेदभाव के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे में उनकी 650वीं जयंती के वर्ष को समाज में समानता और भाईचारे के संदेश को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने भी गुरु रविदास के भक्ति, कर्म, करुणा, मानवता और सामाजिक समरसता से जुड़े संदेश को रेखांकित किया। उनका कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल पवित्र माटी को अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाना नहीं, बल्कि संत रविदास की शिक्षाओं को लोगों के जीवन का हिस्सा बनाना है।
धार्मिक और सामाजिक संदेश के साथ राजनीतिक मायने
गुरु रविदास की जयंती को लेकर भाजपा का यह अभियान राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में है। पार्टी ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में सामाजिक पहुंच बढ़ाने की रणनीति बनाई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषणों में इसे दलित समुदाय तक भाजपा की पहुंच मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।हालांकि, भाजपा इस अभियान को मुख्य रूप से गुरु रविदास के विचारों, सामाजिक एकता और समरसता से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है। पार्टी का कहना है कि अभियान किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज के सभी वर्गों की भागीदारी के साथ इसे व्यापक जन-अभियान बनाने का लक्ष्य है।
वाराणसी से शुरू हुआ संदेश, देशभर तक पहुंचाने की तैयारी
गुरु रविदास की जन्मस्थली वाराणसी से पवित्र माटी को अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाने की प्रक्रिया अभियान की शुरुआत से ही जारी है। जुलाई में भाजपा ने वाराणसी से पवित्र माटी के कलश लेकर विभिन्न राज्यों में अभियान चलाने की योजना शुरू की थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में इन कलशों के माध्यम से गुरु रविदास की शिक्षाओं और सामाजिक समरसता के संदेश को पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।इस पहल का प्रतीकात्मक महत्व भी है। भाजपा के मुताबिक जन्मस्थली की पावन माटी लोगों को गुरु रविदास के जीवन और उनके संदेश से भावनात्मक रूप से जोड़ने का माध्यम बनेगी।
2027 के चुनावों से पहले क्यों अहम है अभियान?
उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में गुरु रविदास की 650वीं जयंती के बहाने चलाया जा रहा यह सात महीने लंबा अभियान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रविदासिया समुदाय की कई राज्यों में महत्वपूर्ण सामाजिक मौजूदगी है, इसलिए सभी प्रमुख राजनीतिक दल इस समुदाय के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं।भाजपा का अभियान ऐसे समय में चल रहा है जब पार्टी सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने और विभिन्न समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। हालांकि अभियान का आधिकारिक उद्देश्य सामाजिक समरसता और गुरु रविदास की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार बताया गया है।
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गुरु रविदास की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का दावा
गुरु रविदास भारतीय संत परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। उनकी वाणी में भक्ति के साथ-साथ मानव समानता, सामाजिक न्याय और भेदभाव से ऊपर उठने का संदेश मिलता है। भाजपा का कहना है कि वर्तमान समय में भी उनके विचार बेहद प्रासंगिक हैं।पार्टी नेताओं के अनुसार समाज में किसी व्यक्ति के साथ जाति, सामाजिक स्थिति या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति को सम्मान मिलना चाहिए और सभी को राष्ट्र निर्माण में बराबर की भागीदारी करनी चाहिए। इसी विचार को ‘समरसता संकल्प अभियान’ के केंद्र में रखा गया है।
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आगे क्या होगा?
दिल्ली में पवित्र माटी के कलशों को 14 जिलों के लिए रवाना किए जाने के बाद अभियान को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। भाजपा की योजना इन्हें मंडलों और मंदिरों तक पहुंचाने की है। इसके साथ ही गुरु रविदास के जीवन, विचारों और सामाजिक संदेश से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर भाजपा का ‘समरसता संकल्प अभियान’ धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में है। वाराणसी की जन्मस्थली से लाई गई पवित्र माटी को दिल्ली के 14 जिलों तक पहुंचाने की पहल को पार्टी गुरु रविदास के समानता, मानव सम्मान और सामाजिक एकता के संदेश से जोड़ रही है।
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