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Jharkhand Central University: मेस के खाने और फीस को लेकर छात्रों में आक्रोश, झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी में भूख हड़ताल

Jharkhand Central University,  झारखंड की राजधानी रांची स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (CUJ) में मेस के खाने और फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों का विरोध तेज हो गया है।

Jharkhand Central University : झारखंड की सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्र क्यों बैठे भूख हड़ताल पर? जानें पूरा मामला

Jharkhand Central University,  झारखंड की राजधानी रांची स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (CUJ) में मेस के खाने और फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों का विरोध तेज हो गया है। विश्वविद्यालय के मनातू कैंपस में चार छात्रावासों के करीब एक हजार छात्र रविवार को धरने पर बैठ गए। वहीं, दो छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। छात्रों का आरोप है कि मेस की फीस बढ़ाए जाने के बावजूद खाने की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है।

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मेस फीस बढ़ाने का विरोध

छात्रों के विरोध की सबसे बड़ी वजह मेस शुल्क में प्रस्तावित बढ़ोतरी है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल छात्रों से करीब 3,000 रुपये प्रति माह मेस शुल्क लिया जा रहा है। अब इसे बढ़ाकर 3,700 रुपये प्रति माह और इसके ऊपर GST किए जाने का प्रस्ताव है। यह बढ़ोतरी सितंबर से लागू होने की बात सामने आई है।छात्रों का कहना है कि जब मौजूदा मेस व्यवस्था में ही खाने की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें हैं, तो फीस बढ़ाने का फैसला उचित नहीं है। उनका सवाल है कि अधिक शुल्क लेने के बाद भी यदि भोजन की गुणवत्ता बेहतर नहीं होती, तो छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है।

खराब खाने को लेकर छात्रों में नाराजगी

विरोध कर रहे छात्रों का मुख्य आरोप खाने की गुणवत्ता को लेकर है। उनका कहना है कि मेस में मिलने वाला भोजन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। छात्रों के अनुसार, भोजन की गुणवत्ता में सुधार किए बिना शुल्क बढ़ाना उनकी परेशानी को और बढ़ा रहा है।छात्रों ने मेन्यू तय करने और उसमें बदलाव से जुड़े फैसलों में अपनी भागीदारी की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि मेस में रोजाना मिलने वाले भोजन को लेकर छात्रों की राय को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।

मेन्यू तय करने में छात्रों की भागीदारी की मांग

छात्रों की एक प्रमुख मांग यह भी है कि मेस के मेन्यू से जुड़े फैसलों में उन्हें प्रतिनिधित्व दिया जाए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मेस के खाने और कीमतों से सीधे प्रभावित होने के बावजूद उन्हें निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।छात्रों ने मेस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की है। उनका मानना है कि यदि छात्रों के प्रतिनिधियों को मेन्यू और शुल्क तय करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए, तो खाने की गुणवत्ता और खर्च से जुड़ी समस्याओं को बेहतर तरीके से सुलझाया जा सकता है।

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दो छात्रों ने शुरू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

मेस विवाद के विरोध में दो छात्रों मृत्युंजय कुमार और अंकित कुमार ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। दोनों छात्र प्रदर्शन स्थल पर ही भूख हड़ताल पर बैठे हैं।रिपोर्टों के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों से बातचीत कर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश की गई। हालांकि, देर शाम तक दोनों छात्रों ने भूख हड़ताल समाप्त नहीं की थी। विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे।

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विश्वविद्यालय प्रशासन ने फीस बढ़ाने की क्या वजह बताई?

दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेस फीस बढ़ाने के पीछे अलग कारण बताया है। CUJ के डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर अनुराग लिंडा के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले चारों समय का भोजन उपलब्ध कराने के लिए 3,000 रुपये प्रति माह की दर पर अनुबंध किया गया था।प्रशासन का कहना है कि नए अनुबंध में शुल्क बढ़ाने की जरूरत कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और भोजन की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों के कारण पड़ी है। प्रशासन ने यह भी कहा कि कीमत तय करने से जुड़ी चर्चाओं में छात्र प्रतिनिधियों से सलाह ली गई थी।हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन के इस दावे पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उन्हें फैसले में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

कूपन आधारित मेस सिस्टम की भी मांग

मेस शुल्क के विरोध के साथ छात्रों ने कूपन आधारित मेस सिस्टम लागू करने की मांग भी रखी है। इस व्यवस्था के जरिए छात्र अपनी जरूरत के हिसाब से भोजन के लिए भुगतान कर सकेंगे और मेस के खर्च को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।छात्रों का मानना है कि कूपन सिस्टम लागू होने से उन विद्यार्थियों को भी राहत मिल सकती है जो किसी दिन मेस में खाना नहीं खाते हैं। इससे अनावश्यक भुगतान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर मेस फीस से जुड़े नोटिस भी मौजूद

सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 2026 में मेस फीस से संबंधित नोटिस जारी किए गए हैं। विश्वविद्यालय के छात्र नोटिस सेक्शन में PG-PhD और UG बॉयज एवं गर्ल्स हॉस्टल, मनातू के बोर्डर्स के लिए हॉस्टल मेस फीस से संबंधित सूचना दर्ज है।विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इससे पहले भी संशोधित मेस फीस से जुड़ा नोटिस जारी किए जाने की जानकारी मिलती है। इससे साफ है कि मेस शुल्क का मुद्दा कैंपस में पहले से चर्चा का विषय रहा है।

आंदोलन के बीच प्रशासन और छात्रों में बातचीत जारी

फिलहाल मामला छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत पर टिका हुआ है। प्रशासन छात्रों की मांगों को समझने और विरोध समाप्त कराने की कोशिश कर रहा है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं।छात्रों का कहना है कि वे तब तक आंदोलन जारी रखेंगे जब तक मेस फीस बढ़ोतरी और भोजन की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों पर ठोस समाधान नहीं मिलता। वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि नई दरें बढ़ती लागत और बेहतर भोजन उपलब्ध कराने की जरूरत को ध्यान में रखकर तय की गई हैं।

क्या होगा आगे?

सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड में मेस विवाद अब केवल फीस बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रह गया है। छात्रों की मांगों में भोजन की गुणवत्ता सुधारना, मेन्यू तय करने में प्रतिनिधित्व देना और कूपन आधारित व्यवस्था लागू करना भी शामिल है।दो छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के धरने पर बैठने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने जल्द समाधान निकालने की चुनौती है। अब देखना होगा कि छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत से कोई सहमति बनती है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।

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