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Political News: घोटाले के आरोपों के बीच बी. नागेंद्र का बड़ा बयान, ‘दलित और कांग्रेसी होने की मिल रही सजा’

Political News, कर्नाटक की राजनीति में वाल्मीकि निगम घोटाला एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन गया है। राज्य के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र को लेकर विधानसभा से लेकर सियासी गलियारों तक घमासान जारी है। विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि नागेंद्र ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें कांग्रेस से जुड़े होने और दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है।

Political News : बी. नागेंद्र का विपक्ष पर बड़ा आरोप, ‘कांग्रेस और दलित होने के कारण मुझे बनाया जा रहा निशाना’

Political News, कर्नाटक की राजनीति में वाल्मीकि निगम घोटाला एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन गया है। राज्य के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र को लेकर विधानसभा से लेकर सियासी गलियारों तक घमासान जारी है। विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि नागेंद्र ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें कांग्रेस से जुड़े होने और दलित होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ आरोप हैं, लेकिन अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है। यह विवाद ऐसे समय में तेज हुआ है जब हाल ही में कर्नाटक मंत्रिमंडल में बी. नागेंद्र की दोबारा एंट्री हुई है। वह पहले भी वाल्मीकि निगम मामले को लेकर मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके थे। अब उनके फिर से मंत्री बनने के बाद भाजपा और जेडीएस ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है।

क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?

यह मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड के पैसों में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। 2024 में निगम के एक कर्मचारी चंद्रशेखरन की आत्महत्या के बाद यह मामला सामने आया था। इसके बाद जांच में निगम के बैंक खातों से बड़ी रकम के कथित अनधिकृत ट्रांसफर की बात सामने आई।प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुताबिक, करीब ₹89.62 करोड़ निगम के खातों से कथित तौर पर फर्जी खातों और शेल संस्थाओं के जरिए डायवर्ट किए गए थे। ED ने अपनी जांच में तत्कालीन मंत्री बी. नागेंद्र को मामले का मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बताया था। हालांकि, यह जांच एजेंसी का आरोप है और मामले में अंतिम दोष सिद्ध होना अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।  ED ने जुलाई 2024 में बी. नागेंद्र को PMLA के तहत गिरफ्तार भी किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, निगम की रकम के कथित दुरुपयोग से जुड़े कई सबूत जांच के दौरान सामने आए थे।

नागेंद्र ने आरोपों पर क्या कहा?

वर्तमान विवाद के बीच बी. नागेंद्र ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि निगम के कामकाज में उनकी भूमिका सीमित थी और पैसे के ट्रांसफर के लिए जरूरी वित्तीय मंजूरियां अधिकारियों द्वारा नहीं ली गई थीं।नागेंद्र ने विपक्ष पर राजनीतिक निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस पार्टी से जुड़े होने और दलित होने की वजह से टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कई अन्य नेताओं के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज हैं, तो सिर्फ उनके इस्तीफे की मांग क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वह विधानसभा में मामले से जुड़े सवालों का जवाब देने और पूरे तथ्य सामने रखने के लिए तैयार हैं। नागेंद्र का कहना है कि किसी नेता को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

विपक्ष लगातार मांग रहा इस्तीफा

दूसरी तरफ भाजपा और जेडीएस इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि जिस नेता का नाम इतने बड़े वित्तीय घोटाले की जांच में आया है, उन्हें दोबारा मंत्री बनाना उचित नहीं है।कर्नाटक विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को लेकर लगातार हंगामा हुआ। भाजपा विधायकों ने नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की और उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। विपक्ष के नेता आर. अशोक ने यहां तक कहा कि जब तक नागेंद्र को मंत्रिमंडल से नहीं हटाया जाता, तब तक भाजपा सदन की कार्यवाही नहीं चलने देगी। 18 अगस्त को भी विधानसभा की कार्यवाही इस मुद्दे को लेकर बाधित हुई। विपक्षी दलों ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को दोहराया।

डीके शिवकुमार ने किया नागेंद्र का बचाव

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने नागेंद्र का बचाव किया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि मामले में बड़ी मात्रा में रकम बरामद की जा चुकी है और नागेंद्र की कथित भूमिका को लेकर विपक्ष को सदन में तथ्य रखने चाहिए।नागेंद्र के समर्थन में कांग्रेस नेताओं का दावा है कि करीब ₹79 करोड़ की रकम बरामद हो चुकी है। उनका कहना है कि बाकी रकम से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध हैं और मामले पर विधानसभा में विस्तार से चर्चा की जा सकती है। शिवकुमार ने विपक्ष की ओर से नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को राजनीतिक बताया है। सरकार का कहना है कि यदि भाजपा के पास आरोपों से जुड़े ठोस सबूत हैं तो उन्हें विधानसभा में पेश किया जाना चाहिए।

मंत्री पद पर दोबारा कैसे हुई वापसी?

बी. नागेंद्र पहले सिद्धारमैया सरकार में मंत्री थे। 2024 में वाल्मीकि निगम मामले को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद जांच एजेंसियों ने भी मामले में उनसे पूछताछ की और ED ने उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।अब करीब दो साल बाद उन्हें दोबारा कर्नाटक मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। अगस्त 2026 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उनकी वापसी ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का नया मुद्दा दे दिया।

हाईकोर्ट से भी मिली राहत

मामले में बी. नागेंद्र को हाल में कर्नाटक हाईकोर्ट से भी राहत मिली है। 12 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत की एक शर्त में बदलाव करते हुए उन्हें राज्य से बाहर जाने की अनुमति दी, जिसके लिए पहले अदालत की अनुमति जरूरी थी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मामले में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया है। जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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ED के आरोप और नागेंद्र का पक्ष अलग-अलग

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच एजेंसियों के आरोप और नागेंद्र का बचाव एक-दूसरे से अलग हैं। ED ने अपनी चार्जशीट में गंभीर आरोप लगाए हैं और नागेंद्र को मामले का मुख्य आरोपी बताया है। वहीं नागेंद्र इन आरोपों से इनकार करते हैं और खुद को राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने की बात कहते हैं। इसलिए फिलहाल उन्हें दोषी कहना कानूनी रूप से सही नहीं होगा। मामले में अदालत की कार्यवाही और जांच के अंतिम नतीजे महत्वपूर्ण होंगे।

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आगे क्या होगा?

वाल्मीकि निगम मामला अब सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कर्नाटक की राजनीति में दलित प्रतिनिधित्व, विपक्ष बनाम सरकार और जांच एजेंसियों की भूमिका से जुड़ा बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।एक तरफ भाजपा नागेंद्र के इस्तीफे पर अड़ी हुई है, वहीं कांग्रेस सरकार उनका बचाव कर रही है। नागेंद्र खुद भी विधानसभा में जवाब देने की बात कह रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सदन के भीतर इस मामले पर जोरदार बहस और राजनीतिक टकराव की संभावना बनी हुई है।

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