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Social Gathering Parenting Tips: पार्टी या फैमिली फंक्शन में बच्चे को न करें शर्मिंदा, Parents अपनाएं ये Parenting Tips

Social Gathering Parenting Tips, बच्चों के लिए सोशल गैदरिंग यानी शादी, बर्थडे पार्टी, पारिवारिक समारोह, स्कूल फंक्शन या किसी दोस्त की पार्टी में जाना एक नया और रोमांचक अनुभव हो सकता है। लेकिन हर बच्चा लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ बच्चे तुरंत सभी से बात करने लगते हैं,

Social Gathering Parenting Tips : डांस, गाना और Hug के लिए बच्चे पर न डालें दबाव, Parents ऐसे संभालें Social Gathering

Social Gathering Parenting Tips, बच्चों के लिए सोशल गैदरिंग यानी शादी, बर्थडे पार्टी, पारिवारिक समारोह, स्कूल फंक्शन या किसी दोस्त की पार्टी में जाना एक नया और रोमांचक अनुभव हो सकता है। लेकिन हर बच्चा लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ बच्चे तुरंत सभी से बात करने लगते हैं, जबकि कुछ को नई जगह और नए लोगों के साथ सहज होने में समय लगता है।कई बार माता-पिता अनजाने में बच्चे को सोशल गैदरिंग में लगातार निर्देश देने लगते हैं—“सबको नमस्ते करो”, “अंकल को विश करो”, “गाना सुनाओ”, “डांस क्यों नहीं कर रहे?”, “इतने चुप क्यों हो?”। माता-पिता की नीयत भले ही अच्छी हो, लेकिन बार-बार दबाव बनाने से बच्चा असहज, शर्मिंदा या तनावग्रस्त महसूस कर सकता है।इसलिए जरूरी है कि सोशल गैदरिंग में बच्चों को सामाजिक व्यवहार सिखाने के साथ-साथ उनकी सहजता और व्यक्तिगत सीमाओं का भी सम्मान किया जाए।

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हर बच्चा अलग होता है

सबसे पहली बात यह समझना जरूरी है कि हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है। कुछ बच्चे स्वाभाविक रूप से मिलनसार होते हैं, जबकि कुछ शांत रहना पसंद करते हैं। किसी बच्चे का कम बोलना या पहले दूसरों को देखकर स्थिति समझना अपने आप में कोई समस्या नहीं है।माता-पिता को अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से नहीं करनी चाहिए। “देखो, तुम्हारी उम्र का वह बच्चा कितनी आसानी से सबके साथ खेल रहा है” जैसी बातें बच्चे का आत्मविश्वास कम कर सकती हैं।इसके बजाय बच्चे को उसकी गति से नए माहौल को समझने का मौका दें।

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जबरदस्ती किसी को गले लगाने के लिए न कहें

कई परिवारों में रिश्तेदारों से मिलने पर बच्चों को गले मिलने या किस करने के लिए कहा जाता है। लेकिन बच्चे को किसी को शारीरिक रूप से अभिवादन करने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।उसे यह विकल्प दिया जा सकता है कि वह हाथ जोड़कर नमस्ते करे, हाथ हिलाकर हेलो कहे या अपनी सुविधा के अनुसार अभिवादन करे।इससे बच्चा धीरे-धीरे यह समझता है कि उसे अपने शरीर और व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करने का अधिकार है।

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हर किसी से बात करने का दबाव न बनाएं

सोशल गैदरिंग में बच्चा अगर कुछ समय तक चुप रहता है तो उसे तुरंत “शर्मीला” या “बदतमीज” कहना सही नहीं है। हो सकता है कि वह आसपास के लोगों को समझने की कोशिश कर रहा हो।माता-पिता बातचीत शुरू करने में उसकी मदद कर सकते हैं, लेकिन पूरी बातचीत बच्चे की ओर से करने या उसे बार-बार बोलने के लिए मजबूर करने से बचना चाहिए।उदाहरण के लिए आप कह सकते हैं, “जब तुम्हारा मन हो तो तुम उनसे बात कर सकते हो।” यह वाक्य बच्चे को सुरक्षा और स्वतंत्रता दोनों देता है।

डांस या गाना करने के लिए मजबूर न करें

पारिवारिक समारोहों में बच्चों से डांस, गाना या कविता सुनाने की मांग अक्सर की जाती है। अगर बच्चा ऐसा करने में सहज नहीं है तो उसे सबके सामने मजबूर करना सही नहीं है।कभी-कभी बड़े लोग मजाक में कहते हैं, “अरे, इतना भी नहीं कर सकते?” या “इतने लोग तो अपने ही हैं।” ऐसी बातें बच्चे को शर्मिंदा कर सकती हैं।अगर बच्चा खुद डांस या गाना करना चाहता है तो उसकी तारीफ करें, लेकिन उसकी इच्छा न होने पर उसे छोड़ देना भी उतना ही जरूरी है।

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बच्चे के ‘ना’ को समझें

बच्चे का “नहीं” हमेशा जिद नहीं होता। कभी-कभी वह थका हुआ हो सकता है, भीड़ से परेशान हो सकता है या किसी स्थिति में असहज महसूस कर सकता है।अगर बच्चा कहता है कि वह किसी व्यक्ति के पास नहीं जाना चाहता या कुछ नहीं करना चाहता, तो पहले उसकी बात सुनें।हर “ना” को तुरंत स्वीकार करना जरूरी नहीं, लेकिन उसकी वजह समझने की कोशिश जरूर करनी चाहिए। इससे बच्चा भविष्य में अपनी परेशानी खुलकर बताने में सक्षम होता है।

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सोशल स्किल्स सिखाएं, लेकिन प्यार से

इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे को सामाजिक व्यवहार सिखाना ही नहीं चाहिए। बच्चों को नमस्ते करना, धन्यवाद कहना, किसी से विनम्रता से बात करना और अपनी बारी का इंतजार करना जैसी बातें जरूर सिखाई जानी चाहिए।लेकिन इन चीजों को डांट या दबाव की बजाय उदाहरण और अभ्यास के जरिए सिखाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।घर पर रोल-प्ले के जरिए बच्चे को बताया जा सकता है कि किसी नए व्यक्ति से कैसे परिचय करें या किसी से मदद कैसे मांगें।

बच्चे को पहले से तैयार करें

अगर आप किसी बड़े समारोह में जा रहे हैं तो बच्चे को पहले से बता दें कि वहां कौन-कौन लोग हो सकते हैं, कितनी देर रहना है और वहां किस तरह का माहौल हो सकता है।उसे यह भी बताया जा सकता है कि अगर वह थक जाए या असहज महसूस करे तो वह माता-पिता को बता सकता है।पहले से जानकारी मिलने पर बच्चे को अनजान माहौल में अचानक खुद को ढालने का दबाव कम महसूस हो सकता है।

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बच्चे को एक Safe Space दें

बड़ी भीड़ में बच्चे के लिए थोड़ी देर शांत जगह पर बैठना जरूरी हो सकता है। अगर वह लगातार लोगों के बीच रहने के बाद थक जाता है तो उसे कुछ समय का ब्रेक दें।माता-पिता बच्चे से पूछ सकते हैं, “क्या तुम थोड़ी देर मेरे साथ बैठना चाहते हो?” इससे बच्चा समझता है कि उसे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की अनुमति है।

रिश्तेदारों के सामने बच्चे को डांटें नहीं

अगर बच्चा किसी रिश्तेदार को जवाब नहीं देता, तो उसे सबके सामने डांटने से बचें। सार्वजनिक रूप से डांटने या शर्मिंदा करने से बच्चा अगली बार ऐसी परिस्थितियों से और ज्यादा डर सकता है।अगर उसके व्यवहार में सुधार की जरूरत है तो उसे अलग से और शांत तरीके से समझाएं।उदाहरण के लिए, “तुम्हें अभी बात करने का मन नहीं था, यह ठीक है, लेकिन अगर कोई तुमसे प्यार से बात करे तो तुम नमस्ते या हेलो कह सकते हो।”

तुलना करने से बचें

“तुम्हारी बहन तो सबसे मिलती है, तुम क्यों नहीं?” या “तुम्हारा दोस्त कितना स्मार्ट है” जैसी तुलना बच्चे को खुद के बारे में नकारात्मक सोचने पर मजबूर कर सकती है।हर बच्चे की सामाजिक क्षमता अलग गति से विकसित होती है। इसलिए उसके छोटे-छोटे प्रयासों को पहचानना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

बच्चे की तारीफ उसके प्रयास के लिए करें

अगर बच्चा किसी नए व्यक्ति को हेलो कहता है, किसी बच्चे के साथ खेलता है या खुद से बातचीत शुरू करता है तो उसकी तारीफ करें।लेकिन तारीफ करते समय केवल परिणाम पर ध्यान न दें। आप कह सकते हैं, “मुझे अच्छा लगा कि तुमने खुद जाकर उनसे बात करने की कोशिश की।”इस तरह बच्चा समझता है कि कोशिश करना भी महत्वपूर्ण है।

कब चिंता करनी चाहिए?

सिर्फ शांत रहने या कम बोलने से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि बच्चे में कोई समस्या है। हालांकि अगर बच्चा लगातार सामाजिक परिस्थितियों से बहुत ज्यादा डरता है, स्कूल या दोस्तों से मिलने से बचता है या सामाजिक परिस्थितियों के कारण उसकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, तो माता-पिता को विशेषज्ञ से सलाह लेने पर विचार करना चाहिए।जरूरत पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर बच्चे की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकते हैं।

बच्चों को सामाजिक बनाएं, दबाव में नहीं

सोशल गैदरिंग बच्चों के लिए सामाजिक कौशल सीखने का अच्छा अवसर हो सकती है, लेकिन इसके लिए उन्हें हर समय परफॉर्म करने के लिए मजबूर करने की जरूरत नहीं है। माता-पिता का काम बच्चे को हर व्यक्ति से मिलवाना नहीं, बल्कि उसे ऐसा सुरक्षित माहौल देना है जहां वह धीरे-धीरे अपनी सामाजिक क्षमताएं विकसित कर सके।बच्चे को नमस्ते करना सिखाएं, लेकिन मजबूर न करें। उसे बातचीत का मौका दें, लेकिन दबाव न बनाएं। उसकी सीमाओं का सम्मान करें और उसकी छोटी-छोटी कोशिशों की सराहना करें।

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