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International News: जापान को रूस की कड़ी चेतावनी, लावरोव ने कहा- ‘रूस के मामलों में दखल देना बंद करें’

International News, रूस और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में एक बार फिर तेजी आती दिखाई दे रही है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जापान की ओर से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की विवादित कुरील द्वीप यात्रा पर की गई आपत्ति को लेकर टोक्यो पर तीखा हमला बोला है।

International News : रूस-जापान विवाद में आया नया मोड़, लावरोव ने टोक्यो को दी कड़ी फटकार

International News, रूस और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में एक बार फिर तेजी आती दिखाई दे रही है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने जापान की ओर से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की विवादित कुरील द्वीप यात्रा पर की गई आपत्ति को लेकर टोक्यो पर तीखा हमला बोला है। लावरोव ने जापानी नेतृत्व को अपने घरेलू मामलों और बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर ध्यान देने की सलाह दी। यह बयान ऐसे समय आया है जब पुतिन की इतुरुप यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी बढ़ गई है।

कुरील द्वीपों पर फिर बढ़ा विवाद

विवाद की शुरुआत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 13 अगस्त 2026 को इतुरुप द्वीप की यात्रा से हुई। इतुरुप कुरील द्वीप समूह का हिस्सा है और रूस के नियंत्रण में है, लेकिन जापान दक्षिणी कुरील द्वीपों के एक हिस्से पर अपना दावा करता है। जापान इन्हें ‘नॉर्दर्न टेरिटरीज’ कहता है।पुतिन की यात्रा के बाद जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने इसे बेहद आपत्तिजनक बताया और रूस के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया। जापान के विदेश मंत्रालय ने भी रूसी राजदूत को बुलाकर अपना विरोध जताया।

लावरोव ने जापान को सुनाई खरी-खरी

जापान की आपत्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए लावरोव ने कहा कि टोक्यो को रूसी राष्ट्रपति की रूस के किसी भी हिस्से की यात्रा पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने जापान की प्रतिक्रिया को अनुचित बताते हुए कहा कि जापानी अधिकारियों ने शालीनता की सीमा पार कर दी है।लावरोव का संदेश मूल रूप से यह था कि जापान को रूस पर टिप्पणी करने से पहले अपने मामलों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जापान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और कथित पुनर्सैन्यीकरण को लेकर भी चिंता जताई।

जापान के राजदूत को किया गया तलब

रूस ने इस विवाद को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा। मॉस्को ने जापान के राजदूत अकीरा मुटो को रूसी विदेश मंत्रालय में तलब किया। लावरोव ने कहा कि जापानी राजदूत को रूस की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए।रिपोर्टों के मुताबिक, रूसी विदेश मंत्रालय ने राजदूत की मौजूदगी की मांग की थी, लेकिन कुछ निर्धारित तारीखों पर उनकी अनुपलब्धता की जानकारी दी गई। इससे दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव और बढ़ने के संकेत मिले।

जापान ने पुतिन की यात्रा पर क्यों जताया विरोध?

कुरील द्वीप विवाद रूस और जापान के बीच दशकों पुराना है। द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में सोवियत संघ ने इन द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित किया था। जापान आज भी दक्षिणी चार द्वीपों पर अपना दावा करता है।इसी क्षेत्रीय विवाद के कारण दोनों देशों के बीच द्वितीय विश्व युद्ध के बाद औपचारिक शांति संधि का मुद्दा लंबे समय से अटका हुआ है। पुतिन की इतुरुप यात्रा को जापान ने अपने क्षेत्रीय दावे के संदर्भ में गंभीरता से लिया और इसे अस्वीकार्य बताया।

रूस का क्या कहना है?

रूस का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। मॉस्को इन द्वीपों को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और विदेशी नेताओं द्वारा इस क्षेत्र पर सवाल उठाए जाने को स्वीकार नहीं करता। पुतिन की यात्रा के दौरान भी रूसी पक्ष ने वहां प्रशासनिक और आर्थिक गतिविधियों पर जोर दिया।रूसी अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति को देश के किसी भी हिस्से का दौरा करने का पूरा अधिकार है। इसी आधार पर लावरोव ने जापान की आपत्ति को अनुचित बताया।

जापान के सैन्य रुख पर भी निशाना

लावरोव की हालिया टिप्पणियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जापान की रक्षा नीति से जुड़ा है। रूस लंबे समय से जापान की बढ़ती सैन्य क्षमताओं और अमेरिका के साथ उसके सुरक्षा सहयोग पर चिंता जताता रहा है।मॉस्को का आरोप है कि जापान तेजी से सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर सकता है। लावरोव ने जापान की सैन्य नीति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि टोक्यो को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपने कदमों पर ध्यान देना चाहिए।

यूक्रेन युद्ध के बाद और बिगड़े रिश्ते

रूस और जापान के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं, लेकिन 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और खराब हो गए। जापान ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए और पश्चिमी देशों के साथ मिलकर मॉस्को पर दबाव बनाने की नीति अपनाई।इसके जवाब में रूस ने जापान को अपने प्रति मित्रवत नहीं रहने वाले देशों की श्रेणी में रखा। दोनों देशों के बीच व्यापार और राजनीतिक संपर्क भी प्रभावित हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, कुरील विवाद अब यूक्रेन युद्ध के बाद व्यापक सुरक्षा तनाव से भी जुड़ गया है।

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अमेरिका-जापान गठजोड़ भी बना मुद्दा

रूस की चिंता केवल जापान की स्वतंत्र रक्षा नीति तक सीमित नहीं है। टोक्यो और वॉशिंगटन के बीच मजबूत सैन्य गठजोड़ भी मॉस्को की नजर में महत्वपूर्ण है।जापान अमेरिका के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। चीन, रूस और उत्तर कोरिया की ओर से जापान की सैन्य क्षमताओं में वृद्धि को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं जापान का कहना है कि चीन, रूस और उत्तर कोरिया से बढ़ते सुरक्षा खतरों के कारण अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करना जरूरी है।

विवाद का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है

कुरील द्वीप विवाद के बीच लावरोव का ताजा बयान दोनों देशों के संबंधों में सुधार की संभावनाओं के लिए चुनौती माना जा रहा है। राजदूत को तलब किया जाना और दोनों पक्षों की तीखी बयानबाजी बताती है कि फिलहाल इस मुद्दे पर समझौते की संभावना आसान नहीं है।जापान के लिए यह क्षेत्र ऐतिहासिक और राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है, जबकि रूस इसे अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है। दोनों पक्षों की स्थिति बेहद अलग होने के कारण विवाद लंबे समय से जारी है।

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आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि रूस और जापान के बीच यह कूटनीतिक तनाव किस दिशा में जाता है। अगर दोनों देशों की ओर से बयानबाजी और बढ़ती है, तो पहले से खराब रिश्तों पर और असर पड़ सकता है।लावरोव की टिप्पणी से रूस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह कुरील द्वीपों पर जापान के दावे को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर, जापान भी अपने क्षेत्रीय दावे से पीछे हटता नजर नहीं आ रहा।

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