PM Narendra Modi: ‘मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं…’, PM मोदी के इस बयान पर हंस पड़े IIT दिल्ली के स्टूडेंट्स
PM Narendra Modi, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 8 अगस्त 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी कर रहे छात्रों को नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए काम करने की सलाह दी।
PM Narendra Modi : PM मोदी का IIT दिल्ली में मजेदार अंदाज, ‘बाबा बागेश्वर’ वाले बयान पर गूंजा ठहाका
PM Narendra Modi, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 8 अगस्त 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी कर रहे छात्रों को नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए काम करने की सलाह दी। पीएम मोदी के संबोधन में जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीक और विकसित भारत जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई, वहीं उनका एक हल्का-फुल्का अंदाज भी देखने को मिला, जिसने पूरे सभागार का माहौल खुशनुमा कर दिया। पीएम मोदी ने छात्रों के भविष्य को लेकर बात करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा, “मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं, लेकिन निश्चित रूप से हर छात्र के मन में कुछ न कुछ चल रहा होगा।” प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राएं हंस पड़े। इस दौरान सभागार में तालियां और हंसी सुनाई दी।

छात्रों के भविष्य को लेकर पीएम मोदी की चुटकी
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज सभी छात्र एक साथ दीक्षांत समारोह में बैठे हैं, लेकिन उनके मन में आने वाले भविष्य को लेकर अलग-अलग विचार चल रहे होंगे। किसी छात्र के सामने पहली नौकरी का सपना होगा, कोई स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोच रहा होगा, तो कोई आगे की पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहता होगा।इसी संदर्भ में पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए बाबा बागेश्वर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन इतना जरूर जानते हैं कि छात्रों के मन में आने वाले कल को लेकर कुछ न कुछ जरूर चल रहा होगा। प्रधानमंत्री की इस सहज टिप्पणी ने गंभीर भाषण के बीच माहौल को हल्का कर दिया और छात्रों के चेहरों पर मुस्कान आ गई।
57वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए पीएम मोदी
IIT दिल्ली का 57वां दीक्षांत समारोह इस साल कई मायनों में खास रहा। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार, समारोह में 587 पीएचडी शोधार्थियों सहित 3,000 से अधिक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। मेधावी छात्रों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक, शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक और परफेक्ट टेन स्वर्ण पदक जैसे सम्मान भी दिए गए। दीक्षांत समारोह छात्रों के लिए सिर्फ डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह उनके विद्यार्थी जीवन से पेशेवर जीवन की ओर बढ़ने का महत्वपूर्ण पड़ाव भी होता है। प्रधानमंत्री ने इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए छात्रों को भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
‘कल ही हुआ था ओरिएंटेशन, आज दीक्षांत’
पीएम मोदी ने छात्रों को उनके IIT दिल्ली में पहले दिन की याद भी दिलाई। उन्होंने कहा कि कई छात्रों को ऐसा लग सकता है कि उनका ओरिएंटेशन कार्यक्रम अभी कल ही हुआ था और देखते ही देखते दीक्षांत समारोह का दिन आ गया।उन्होंने छात्रों से कहा कि आज से उनके जीवन में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। पढ़ाई के दौरान उन्होंने जो ज्ञान, अनुभव और कौशल हासिल किया है, अब उसे वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने में इस्तेमाल करने का समय है।प्रधानमंत्री ने छात्रों को यह भी याद दिलाया कि IIT जैसे संस्थान से निकलने के बाद उनकी जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहती। देश और समाज की जरूरतों को समझकर काम करना भी उनके सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी।
अगले 30-35 साल को लेकर दिया बड़ा संदेश
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में भारत के विकास और युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले 30 से 35 वर्षों में छात्र जो भी काम करेंगे, उसका असर विकसित भारत की यात्रा पर पड़ेगा। इसलिए उन्हें अपने हर फैसले में यह विचार करना चाहिए कि उससे देश को क्या फायदा होगा और देश की कौन-सी जरूरत पूरी हो सकती है। प्रधानमंत्री का यह संदेश खास तौर पर उन छात्रों के लिए था जो अब शिक्षा पूरी करके उद्योग, रिसर्च, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, प्रशासन और अन्य क्षेत्रों में प्रवेश करने जा रहे हैं।
AI और टेक्नोलॉजी पर भी बोले पीएम मोदी
दीक्षांत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा की। उन्होंने छात्रों को तकनीक के बदलते स्वरूप को समझने और उसका इस्तेमाल देश की जरूरतों के लिए करने पर जोर दिया।आज AI शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, वित्त, कृषि और शासन समेत कई क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में IIT से निकलने वाले युवा तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री ने छात्रों को केवल तकनीक के उपभोक्ता बनने के बजाय उसके निर्माण और विकास में योगदान देने की दिशा में सोचने का संदेश दिया।
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उपलब्धियों पर छात्रों को दी बधाई
पीएम मोदी ने डिग्री और मेडल हासिल करने वाले छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी गर्व का विषय है। उन्होंने छात्रों की मेहनत और उनके माता-पिता के योगदान की सराहना की।उन्होंने विशेष रूप से मेधावी छात्रों की उपलब्धियों का उल्लेख किया और कहा कि पुरस्कार हासिल करने वाले छात्रों ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। हालांकि, उन्होंने छात्राओं की संख्या को लेकर भी हल्के अंदाज में टिप्पणी की और कहा कि उपलब्धि हासिल करने वाली लड़कियों की संख्या और अधिक होनी चाहिए।
छात्रों के बीच खूब पसंद आया पीएम का अंदाज
पीएम मोदी के भाषण में गंभीर मुद्दों के साथ-साथ इस तरह की हल्की-फुल्की टिप्पणियां भी देखने को मिलीं। “मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं” वाली टिप्पणी ने खास तौर पर छात्रों का ध्यान खींचा। सोशल मीडिया पर भी इस बयान के वीडियो और क्लिप को लेकर चर्चा शुरू हो गई।हालांकि, प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश छात्रों के भविष्य, तकनीकी बदलाव और देश के विकास से जुड़ा रहा। बाबा बागेश्वर का संदर्भ उन्होंने छात्रों के मन में चल रहे भविष्य से जुड़े विचारों को लेकर मजाकिया अंदाज में दिया था।
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IIT छात्रों को दी देश के लिए काम करने की सीख
प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि उनकी शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। उन्हें अपने ज्ञान और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल देश की समस्याओं के समाधान के लिए भी करना चाहिए।भारत आज AI, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। IIT से निकलने वाले इंजीनियर, वैज्ञानिक और शोधकर्ता इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।पीएम मोदी का जोर इसी बात पर रहा कि युवा अपने करियर के साथ-साथ देश की प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखें।IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन छात्रों के लिए प्रेरणादायक संदेशों से भरा रहा। उन्होंने एक तरफ AI और आधुनिक तकनीक के दौर में युवाओं की भूमिका पर बात की, तो दूसरी तरफ विकसित भारत की यात्रा में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।इसी दौरान जब उन्होंने छात्रों के भविष्य के विचारों को लेकर मजाकिया अंदाज में कहा, “मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं…”, तो सभागार में मौजूद छात्र-छात्राएं हंस पड़े। पीएम मोदी की इस टिप्पणी ने समारोह के गंभीर माहौल के बीच एक यादगार और हल्का-फुल्का पल बना दिया।
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