Martina Devi Maibam: मार्टिना की शानदार वापसी! दो फेल प्रयासों के बाद 105kg स्नैच कर बनीं चर्चा का विषय
Martina Devi Maibam, ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर मार्टिना देवी माईबाम भले ही पदक जीतने से चूक गईं, लेकिन उनके जज्बे और साहस ने लाखों खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।
Martina Devi Maibam : दो बार फेल, तीसरी बार इतिहास! कॉमनवेल्थ गेम्स में मार्टिना की प्रेरणादायक कहानी
Martina Devi Maibam, ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टर मार्टिना देवी माईबाम भले ही पदक जीतने से चूक गईं, लेकिन उनके जज्बे और साहस ने लाखों खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। 18 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने महिलाओं के +86 किलोग्राम वर्ग में ऐसी वापसी की, जिसने उन्हें सोशल मीडिया से लेकर खेल जगत तक चर्चा का विषय बना दिया।मार्टिना ने स्नैच स्पर्धा में शुरुआती दो प्रयासों में असफल होने के बाद हार नहीं मानी। उन्होंने जोखिम उठाते हुए तीसरे और अंतिम प्रयास में वजन बढ़ाकर 105 किलोग्राम चुना और उसे सफलतापूर्वक उठाकर शानदार वापसी की। उनका यह लिफ्ट मुकाबले के सबसे प्रेरणादायक पलों में शामिल रहा।
दो बार मिली असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला
प्रतियोगिता की शुरुआत Martina Devi Maibam के लिए अच्छी नहीं रही। उन्होंने 103 किलोग्राम के अपने पहले और दूसरे स्नैच प्रयास में सफलता हासिल नहीं की। लगातार दो असफल प्रयासों के बाद अधिकांश खिलाड़ी सुरक्षित विकल्प चुनते हैं, लेकिन Martina Devi Maibam ने इसके बजाय 105 किलोग्राम का वजन चुना।यह फैसला जोखिम भरा था क्योंकि तीसरी कोशिश भी असफल रहने पर वह प्रतियोगिता से बाहर हो सकती थीं। लेकिन उन्होंने दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया और शानदार तकनीक के साथ 105 किलोग्राम सफलतापूर्वक उठाकर अपनी चुनौती बरकरार रखी। यह लिफ्ट दर्शकों की जोरदार तालियों के बीच पूरी हुई और सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुई।
क्लीन एंड जर्क में भी दिखाया दम
स्नैच में शानदार वापसी के बाद मार्टिना ने क्लीन एंड जर्क में 140 किलोग्राम का सफल प्रयास किया। इसके बाद उन्होंने 144 और 146 किलोग्राम उठाने की कोशिश की, लेकिन दोनों प्रयास सफल नहीं हो सके।अंत में उनका कुल स्कोर 245 किलोग्राम (105 किग्रा स्नैच + 140 किग्रा क्लीन एंड जर्क) रहा, जिसके साथ उन्होंने प्रतियोगिता में पांचवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक से दूर रहीं, लेकिन उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की हर तरफ सराहना हुई।
पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा
Martina Devi Maibam के लिए यह पहला कॉमनवेल्थ गेम्स था। इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव के बावजूद उन्होंने जिस तरह खुद को संभाला, उसने यह साबित कर दिया कि भारत के पास भविष्य के लिए एक मजबूत वेटलिफ्टर तैयार है।विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम उम्र में इस तरह का प्रदर्शन आने वाले वर्षों में उनके करियर के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।

सोशल मीडिया पर हुई जमकर तारीफ
Martina Devi Maibam के 105 किलोग्राम वाले लिफ्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। खेल प्रेमियों ने उनकी हिम्मत और मानसिक मजबूती की तारीफ की। कई लोगों ने लिखा कि हार और जीत खेल का हिस्सा है, लेकिन जिस खिलाड़ी में आखिरी प्रयास तक लड़ने का जज्बा हो, वही असली चैंपियन कहलाता है।पूर्व खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों ने भी कहा कि मार्टिना ने यह साबित कर दिया कि सफलता केवल पदक जीतने से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में हार न मानने से भी मिलती है।
Martina Devi Maibam भारत के लिए उम्मीद की नई किरण
भारत की वेटलिफ्टिंग टीम पिछले कुछ वर्षों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। मीराबाई चानू, बिंदियारानी देवी और हरजिंदर कौर जैसी खिलाड़ियों के बाद अब मार्टिना देवी भी भविष्य की बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई हैं।कोचों का मानना है कि यदि उन्हें लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव मिलता रहा तो वह आने वाले एशियाई खेलों, विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतने की प्रबल दावेदार बन सकती हैं।
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हार के बावजूद जीत लिया दिल
खेलों में कई बार नतीजे खिलाड़ियों के पक्ष में नहीं आते, लेकिन कुछ प्रदर्शन ऐसे होते हैं जिन्हें लंबे समय तक याद रखा जाता है। Martina Devi Maibam का 105 किलोग्राम वाला सफल लिफ्ट भी ऐसा ही एक पल था।लगातार दो असफल प्रयासों के बाद दबाव में शानदार वापसी करना आसान नहीं होता। उनकी यह मानसिक मजबूती बताती है कि वह भविष्य में और भी बड़े मंचों पर भारत का नाम रोशन करने की क्षमता रखती हैं।कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में Martina Devi Maibam भले ही पदक नहीं जीत सकीं, लेकिन उन्होंने अपने साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष से करोड़ों भारतीयों का दिल जरूर जीत लिया। दो असफल प्रयासों के बाद 105 किलोग्राम का सफल स्नैच केवल एक लिफ्ट नहीं था, बल्कि यह उनके अटूट विश्वास और कभी हार न मानने वाले जज्बे का प्रतीक था। यही कारण है कि उनका प्रदर्शन इस प्रतियोगिता के सबसे प्रेरणादायक क्षणों में गिना जा रहा है और भारतीय खेल प्रेमियों को उनसे भविष्य में बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद है।
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