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Brij Bhushan Singh: महिला पहलवानों के आरोपों वाले केस में बृज भूषण सिंह बरी, अदालत ने सुनाया फैसला

Brij Bhushan Singh, भारतीय कुश्ती जगत से जुड़े सबसे चर्चित और लंबे समय तक चर्चा में रहे यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

Brij Bhushan Singh : यौन उत्पीड़न मामले में बृज भूषण सिंह को क्लीन चिट नहीं, बल्कि कोर्ट से बरी होने का फैसला

Brij Bhushan Singh, भारतीय कुश्ती जगत से जुड़े सबसे चर्चित और लंबे समय तक चर्चा में रहे यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न मामले में बृज भूषण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसी मामले में सह-आरोपी और पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को भी अदालत ने दोषमुक्त करार दिया। यह फैसला लगभग तीन वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद आया है।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2023 में उस समय सामने आया था जब देश की कई नामी महिला पहलवानों ने बृज भूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप लगाने वालों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी कई महिला पहलवान शामिल थीं। इन आरोपों के बाद देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया और दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक पहलवानों का धरना-प्रदर्शन भी चला।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई FIR

शुरुआत में मामला दर्ज होने में देरी को लेकर भी काफी विवाद हुआ था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसके आधार पर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी।

अदालत ने क्या कहा?

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा के बाद फैसला सुनाया। अदालत ने बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।

लंबे समय तक चली सुनवाई

यह मामला भारतीय खेल इतिहास के सबसे चर्चित कानूनी मामलों में शामिल रहा। अदालत में कई महीनों तक गवाहों के बयान दर्ज किए गए और दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनी गईं। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।

फैसले के बाद बृज भूषण सिंह की प्रतिक्रिया

फैसले के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और शुरुआत से ही उन्होंने स्वयं को निर्दोष बताया था। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि अदालत ने उन्हें सम्मानपूर्वक बरी किया है।

महिला पहलवानों की अगली रणनीति

अदालत के फैसले के बाद महिला पहलवानों की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, पहलवानों का कहना है कि वे अभी अपनी कानूनी लड़ाई खत्म नहीं मानतीं और फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने पर विचार करेंगी।

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खेल जगत और राजनीति में रहा बड़ा असर

इस मामले ने भारतीय कुश्ती संघ, खिलाड़ियों और खेल प्रशासन पर व्यापक प्रभाव डाला। लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शनों के कारण भारतीय कुश्ती महासंघ की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में रही। इस प्रकरण ने खेल संगठनों में खिलाड़ियों की सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को जन्म दिया।

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आगे क्या?

फिलहाल दिल्ली की अदालत ने बृज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया है। हालांकि यदि शिकायतकर्ता पक्ष इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देता है, तो मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है। ऐसे में इस बहुचर्चित प्रकरण पर अंतिम कानूनी स्थिति भविष्य में उच्च अदालतों के निर्णय पर निर्भर करेगी। दिल्ली की अदालत का यह फैसला भारतीय खेल जगत के सबसे चर्चित मामलों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। करीब तीन वर्षों तक चले विवाद, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद बृज भूषण शरण सिंह को अदालत से राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर, शिकायतकर्ता महिला पहलवानों की ओर से फैसले को आगे चुनौती दिए जाने की संभावना भी बनी हुई है। ऐसे में यह मामला अभी भी कानूनी और सार्वजनिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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