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Hypothyroidism: थायराइड की समस्या में शुगर लेवल क्यों बिगड़ सकता है? एक्सपर्ट से समझें कारण

Hypothyroidism, आज के समय में थायराइड से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) एक आम समस्या है, जिसमें थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन का निर्माण नहीं कर पाती।

Hypothyroidism : हाइपोथायरायडिज्म और ब्लड शुगर का क्या है कनेक्शन? जानें शरीर पर इसका असर

Hypothyroidism, आज के समय में थायराइड से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) एक आम समस्या है, जिसमें थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन का निर्माण नहीं कर पाती। यह हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी ऊर्जा खर्च करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। यही कारण है कि हाइपोथायरायडिज्म का असर शरीर के कई हिस्सों के साथ-साथ ब्लड शुगर लेवल पर भी पड़ सकता है। कई लोगों के लिए हाइपोथायरायडिज्म के साथ ब्लड शुगर को सामान्य रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसकी वजह शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, धीमा मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन के प्रभाव में बदलाव हो सकते हैं।

हाइपोथायरायडिज्म और ब्लड शुगर का क्या संबंध है?

थायराइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा उपयोग को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब थायराइड हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी हो सकती हैं। इसका असर ग्लूकोज के इस्तेमाल और इंसुलिन की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। शोधों में पाया गया है कि हाइपोथायरायडिज्म वाले लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) का खतरा बढ़ सकता है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं और ब्लड शुगर को नियंत्रित करना कठिन हो सकता है।

1. धीमा मेटाबॉलिज्म बनता है बड़ी वजह

हाइपोथायरायडिज्म में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इसका मतलब है कि शरीर भोजन से मिलने वाली ऊर्जा को पहले की तुलना में धीमी गति से इस्तेमाल करता है।

इस स्थिति में:

  • वजन बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है।
  • शरीर में फैट जमा हो सकता है।
  • इंसुलिन के काम करने का तरीका प्रभावित हो सकता है।

वजन बढ़ने और शरीर में अतिरिक्त फैट की वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है, जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

2. इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है

इंसुलिन एक हार्मोन है जो खून में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। लेकिन जब शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर बढ़ने लगता है।हाइपोथायरायडिज्म में कुछ लोगों में इंसुलिन की संवेदनशीलता कम हो सकती है। इसके कारण खाने के बाद शुगर लेवल ज्यादा समय तक बढ़ा रह सकता है।

3. वजन बढ़ना और ब्लड शुगर कंट्रोल

हाइपोथायरायडिज्म का एक आम लक्षण वजन बढ़ना है। शरीर में अतिरिक्त वजन, खासकर पेट के आसपास जमा फैट, इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है।

ऐसे में व्यक्ति को:

  • डाइट कंट्रोल करने,
  • नियमित व्यायाम करने,
  • और ब्लड शुगर मॉनिटर करने

की ज्यादा जरूरत पड़ सकती है।

4. पाचन प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है असर

थायराइड हार्मोन कम होने से पाचन तंत्र की गति धीमी हो सकती है। इससे भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज का शरीर में अवशोषण प्रभावित हो सकता है।कुछ लोगों में खाने के बाद ब्लड शुगर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ सकता है और लंबे समय तक ऊंचा रह सकता है।

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5. थायराइड और डायबिटीज का संबंध

थायराइड और डायबिटीज दोनों ही हार्मोन से जुड़ी स्थितियां हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों को थायराइड की समस्या होती है, उनमें ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म से जुड़ी परेशानियों का खतरा अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, थायराइड डिसऑर्डर और डायबिटीज अक्सर एक साथ पाए जा सकते हैं क्योंकि दोनों में मेटाबॉलिज्म, इम्यून सिस्टम और इंसुलिन से जुड़े कारक शामिल होते हैं।

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ब्लड शुगर को स्थिर रखने के लिए क्या करें?

हाइपोथायरायडिज्म से प्रभावित लोग कुछ आदतों को अपनाकर ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते हैं।

संतुलित आहार लें

डाइट में शामिल करें:

  • फाइबर से भरपूर सब्जियां
  • साबुत अनाज
  • प्रोटीन युक्त भोजन
  • कम मात्रा में हेल्दी फैट

मीठे खाद्य पदार्थों और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से बचना फायदेमंद हो सकता है।

नियमित एक्सरसाइज करें

रोजाना वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर हो सकती है और वजन नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

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दवाइयां समय पर लें

अगर डॉक्टर ने थायराइड की दवा दी है तो उसे नियमित रूप से लेना जरूरी है। थायराइड हार्मोन का संतुलन बनाए रखना मेटाबॉलिज्म को बेहतर रखने में मदद कर सकता है।

नियमित जांच कराएं

हाइपोथायरायडिज्म वाले लोगों को समय-समय पर:

  • TSH टेस्ट
  • ब्लड शुगर टेस्ट
  • HbA1c टेस्ट

कराने की सलाह दी जाती है, खासकर अगर डायबिटीज का जोखिम हो।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

अगर हाइपोथायरायडिज्म के साथ ये लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है:

  • लगातार थकान
  • अचानक वजन बढ़ना
  • ज्यादा प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • भूख में बदलाव
  • कमजोरी महसूस होना

ये लक्षण ब्लड शुगर में बदलाव का संकेत भी हो सकते हैं। हाइपोथायरायडिज्म से प्रभावित लोगों के लिए ब्लड शुगर को स्थिर रखना इसलिए मुश्किल हो सकता है क्योंकि थायराइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन के काम को प्रभावित करते हैं। हालांकि सही दवा, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच के जरिए ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। किसी भी बदलाव या परेशानी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी है।

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