India-Japan Border Terrorism: ‘आतंकवाद के लिए नहीं होगी कोई सहानुभूति’, भारत-जापान ने पाकिस्तान को घेरा
India-Japan Border Terrorism, भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ अपने साझा रुख को दोहराते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक
India-Japan Border Terrorism : पाकिस्तान को भारत-जापान की खरी-खरी, आतंकवाद पर दुनिया से भी की बड़ी अपील
India-Japan Border Terrorism, भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ अपने साझा रुख को दोहराते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़े शब्दों में निंदा की तथा आतंकवादी संगठनों और उनके समर्थकों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
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आतंकवाद पर साझा और सख्त रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के बीच हुई वार्ता में दोनों नेताओं ने कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है। संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद और आतंकवाद को वित्तीय एवं अन्य प्रकार का समर्थन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। दोनों देशों ने सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष लेकिन स्पष्ट संदेश
हालांकि संयुक्त बयान में कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसमें पाकिस्तान से जुड़े सीमा पार आतंकवाद पर स्पष्ट चिंता जताई गई। भारत और जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और उनके सहयोगी नेटवर्क के खिलाफ ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की जाए।संयुक्त बयान में लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों का उल्लेख करते हुए इनके खिलाफ वैश्विक सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई।
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा
भारत और जापान ने पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की भी कड़ी निंदा की। दोनों देशों ने निर्दोष नागरिकों पर हुए हमलों को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों के दोषियों, साजिशकर्ताओं और उन्हें समर्थन देने वालों को न्याय के कटघरे में लाना जरूरी है।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग होगा मजबूत
शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के अलावा रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, आपूर्ति श्रृंखला और उभरती प्रौद्योगिकियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने पर सहमति जताई।भारत और जापान ने रक्षा सहयोग को और गहरा करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाने तथा समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वय मजबूत करने का भी फैसला किया।
क्वाड और क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर
बैठक में दोनों नेताओं ने क्वाड (Quad) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का यह समूह स्वतंत्र, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करता रहेगा।इसके साथ ही दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की।
आर्थिक और तकनीकी साझेदारी भी होगी मजबूत
सुरक्षा के अलावा दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया। जापान ने भारत में बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, हाई-स्पीड रेल, सेमीकंडक्टर और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।दोनों नेताओं ने कहा कि आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी सहयोग आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख आधार बनेगा।
वैश्विक समुदाय से भी की अपील
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तभी प्रभावी हो सकती है, जब सभी देश बिना किसी भेदभाव के आतंकवाद के हर रूप का विरोध करें। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के पूर्ण पालन और आतंकवादी संगठनों को वित्तीय सहायता, हथियार तथा सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
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भारत-जापान संबंधों को मिली नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस शिखर सम्मेलन ने भारत और जापान की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत किया है। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देगा।भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। ऐसे में जापान का खुलकर इस मुद्दे पर भारत के साथ खड़ा होना कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, रक्षा, तकनीक और आर्थिक क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और गहरा करेगा।
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