High Court: गोहत्या बैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची विजय सरकार, हाई कोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल
High Court, तमिलनाडु में गोहत्या पर मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को लेकर कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती
High Court : गोहत्या पर हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ विजय सरकार की बड़ी चुनौती, अब सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
High Court, तमिलनाडु में गोहत्या पर मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को लेकर कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें राज्य में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया गया था। सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश राज्य के मौजूदा कानून के दायरे से आगे बढ़कर दिया गया है और इससे प्रशासनिक व कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
क्या था मद्रास हाई कोर्ट का आदेश?
मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान तमिलनाडु में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी भी परिस्थिति में गायों का वध न हो। अदालत ने अपने आदेश में संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों, विशेष रूप से अनुच्छेद 48, और तमिलनाडु के पशु संरक्षण संबंधी कानूनों का भी उल्लेख किया था।
सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंची तमिलनाडु सरकार?
तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि हाई कोर्ट का आदेश राज्य के मौजूदा कानूनी ढांचे से परे है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम में पहले से स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं और किन परिस्थितियों में गोवंश के वध की अनुमति दी जा सकती है, इसका उल्लेख कानून में किया गया है। सरकार का कहना है कि न्यायालय द्वारा पूर्ण प्रतिबंध का निर्देश देना विधायी क्षेत्र में हस्तक्षेप के समान है।
सरकार ने क्या दलील दी?
राज्य सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम की धारा 4 के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में गोवंश के वध की अनुमति दी जा सकती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई पशु निर्धारित आयु से अधिक हो, काम करने या प्रजनन के योग्य न हो और सक्षम प्राधिकारी से प्रमाणित हो, तो कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश इन वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करता है।
बकरीद का भी हुआ जिक्र
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाई कोर्ट के आदेश की व्याख्या बकरीद जैसे अवसरों पर भी गोहत्या पर पूर्ण रोक के रूप में की गई। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाई कोर्ट का आदेश अत्यधिक व्यापक है और इसकी व्याख्या को लेकर कई तरह की प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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पहले भी उठे थे आदेश पर सवाल
हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने संकेत दिए थे कि आदेश की व्याख्या को लेकर स्पष्टता आवश्यक है। अधिकारियों का कहना था कि यह स्पष्ट नहीं है कि आदेश केवल सार्वजनिक और गैर-अधिकृत स्थानों पर वध को लेकर है या फिर पूरे राज्य में पूर्ण प्रतिबंध लागू करने के लिए। इसी कारण सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
कानूनी और संवैधानिक पहलू
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 48 राज्यों को गायों और अन्य दुधारू एवं कार्यशील पशुओं के संरक्षण के लिए प्रयास करने की सलाह देता है। वहीं, गोहत्या से जुड़े कानून राज्यवार अलग-अलग हैं। तमिलनाडु में भी इस विषय पर अलग कानून लागू है, जिसके तहत कुछ परिस्थितियों में सीमित अनुमति का प्रावधान मौजूद है। इसी कानूनी ढांचे की व्याख्या को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट में क्या होगी सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट अब तमिलनाडु सरकार की याचिका पर विचार करेगा और यह तय करेगा कि मद्रास हाई कोर्ट का आदेश मौजूदा कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं। यदि सर्वोच्च अदालत याचिका स्वीकार करती है, तो वह हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम राहत देने या मामले की विस्तृत सुनवाई करने का फैसला कर सकती है।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
गोहत्या का मुद्दा लंबे समय से सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक बहस का विषय रहा है। ऐसे में मद्रास हाई कोर्ट के आदेश और उसके खिलाफ तमिलनाडु सरकार की सुप्रीम कोर्ट में अपील ने इस बहस को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वोच्च अदालत का फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। फिलहाल सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत राज्य सरकार की दलीलों को स्वीकार करती है तो हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लग सकती है या उसमें संशोधन हो सकता है। वहीं, यदि हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा जाता है तो तमिलनाडु में गोहत्या से जुड़े नियमों के पालन का स्वरूप बदल सकता है। फिलहाल मामला विचाराधीन है और अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
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