IVF and Surrogacy Centers: IVF और ART क्लीनिकों पर सरकार का कड़ा कदम, तय समय में लाइसेंस रिन्यू कराना होगा जरूरी
IVF and Surrogacy Centers, केंद्र सरकार ने आईवीएफ (IVF), एआरटी (Assisted Reproductive Technology) और सरोगेसी क्लीनिकों के नियमन को और सख्त करने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब इन केंद्रों के लिए समय पर लाइसेंस (पंजीकरण) का नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा।
IVF and Surrogacy Centers : अब नहीं चलेगी लापरवाही! IVF और सरोगेसी क्लीनिकों पर सरकार की नई सख्ती
IVF and Surrogacy Centers, केंद्र सरकार ने आईवीएफ (IVF), एआरटी (Assisted Reproductive Technology) और सरोगेसी क्लीनिकों के नियमन को और सख्त करने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब इन केंद्रों के लिए समय पर लाइसेंस (पंजीकरण) का नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य देशभर में चल रहे फर्टिलिटी और सरोगेसी केंद्रों में पारदर्शिता बढ़ाना, गुणवत्ता सुनिश्चित करना और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी निगरानी रखना है। नए नियमों के तहत सभी पंजीकृत एआरटी क्लीनिक, एआरटी बैंक और सरोगेसी क्लीनिकों को अपनी मौजूदा पंजीकरण अवधि समाप्त होने से पहले तय समय सीमा के भीतर नवीनीकरण के लिए आवेदन करना होगा। इससे बिना वैध पंजीकरण वाले केंद्रों के संचालन पर रोक लगाने में भी मदद मिलेगी।
60 दिन पहले करना होगा आवेदन
संशोधित नियमों के अनुसार, सभी पंजीकृत संस्थानों को पंजीकरण समाप्त होने से कम-से-कम 60 दिन पहले राष्ट्रीय रजिस्ट्री पोर्टल के माध्यम से नवीनीकरण के लिए आवेदन करना होगा। समय सीमा का पालन नहीं करने पर संबंधित क्लीनिक को नियमानुसार कार्रवाई और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है।
तय किया गया नवीनीकरण शुल्क
सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के केंद्रों के लिए नवीनीकरण शुल्क भी निर्धारित किया है।
- लेवल-1 एआरटी क्लीनिक और एआरटी बैंक के लिए 25,000 रुपये।
- लेवल-2 एआरटी क्लीनिक और सरोगेसी क्लीनिक के लिए 1 लाख रुपये।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से निरीक्षण, निगरानी और नियामकीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
नियमित समीक्षा होगी अनिवार्य
नए प्रावधानों के तहत क्लीनिकों की समय-समय पर नियामकीय समीक्षा भी की जाएगी। एआरटी क्लीनिकों और सरोगेसी केंद्रों को निर्धारित अवधि के बाद फिर से पंजीकरण का नवीनीकरण कराना होगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे कानूनी, तकनीकी और नैतिक मानकों का पालन कर रहे हैं।
बिना सुनवाई आवेदन खारिज नहीं होगा
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी क्लीनिक का नवीनीकरण आवेदन किसी कारण से अस्वीकार किया जाता है, तो उससे पहले संबंधित संस्था को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। यानी बिना सुनवाई के आवेदन खारिज नहीं किया जाएगा।
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गैर-पंजीकृत केंद्रों पर भी शिकंजा
हाल ही में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने निर्देश दिया है कि आईवीएफ में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख लैब सामग्री और उपभोग्य वस्तुएं (IVF Consumables) केवल उन्हीं फर्टिलिटी क्लीनिकों और स्पर्म बैंकों को बेची जाएंगी, जो एआरटी और सरोगेसी कानूनों के तहत विधिवत पंजीकृत हैं। इससे बिना पंजीकरण वाले केंद्रों के संचालन पर और कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।
क्यों जरूरी हैं ये नियम?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में बांझपन के मामलों में वृद्धि के साथ आईवीएफ और अन्य फर्टिलिटी उपचारों की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके चलते कई नए क्लीनिक भी खुले हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी केंद्र प्रशिक्षित विशेषज्ञों, सुरक्षित तकनीकों और निर्धारित कानूनी मानकों के अनुसार सेवाएं दें। नए नियमों का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता और सरोगेसी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
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मरीजों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने से मरीजों को कई लाभ मिलने की उम्मीद है—
- केवल अधिकृत और पंजीकृत केंद्रों में उपचार उपलब्ध होगा।
- चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा बेहतर होगी।
- अनियमित और गैर-कानूनी क्लीनिकों पर रोक लगेगी।
- सरोगेसी और आईवीएफ प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- उपचार से जुड़े रिकॉर्ड और निगरानी प्रणाली अधिक मजबूत होगी।
केंद्र सरकार के नए नियम आईवीएफ, एआरटी और सरोगेसी सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। समय पर लाइसेंस नवीनीकरण, नियमित निरीक्षण और केवल पंजीकृत केंद्रों को आवश्यक सामग्री की आपूर्ति जैसी व्यवस्थाओं से फर्टिलिटी सेक्टर में बेहतर नियमन सुनिश्चित होने की उम्मीद है। इससे उपचार कराने वाले दंपतियों का भरोसा भी मजबूत होगा और पूरे क्षेत्र में गुणवत्ता मानकों का पालन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।
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