Ayodhya Investigation: राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच पूरी, तीन सदस्यीय SIT ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट
Ayodhya Investigation, अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट
Ayodhya Investigation : अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामला, जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद बढ़ी हलचल
Ayodhya Investigation, अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। तीन सदस्यीय एसआईटी ने यह रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
कैसे शुरू हुआ मामला?
राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब मंदिर से जुड़े एक कर्मचारी के आवास से कथित तौर पर बड़ी नकदी बरामद होने की खबर सामने आई। इसके बाद दान राशि और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच कराने का अनुरोध किया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया। टीम को आरोपों की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई।
कौन-कौन थे एसआईटी में शामिल?
एसआईटी में अयोध्या मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया था। टीम ने 15 जून से 22 जून तक अयोध्या में रहकर जांच की और मंदिर प्रशासन से जुड़े दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज, दानपात्रों तथा रिकॉर्ड की पड़ताल की।
जांच में किन पहलुओं की हुई पड़ताल?
जांच के दौरान एसआईटी ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया। इनमें मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे का लेखा-जोखा, दान में मिले आभूषणों का रिकॉर्ड, दानपात्रों की खरीद और रखरखाव, कर्मचारियों की भूमिका तथा प्रशासनिक प्रक्रियाएं शामिल रहीं। टीम ने ट्रस्ट पदाधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की। रिपोर्ट के अनुसार, जांच में कुछ प्रक्रियागत कमियां और प्रबंधन संबंधी खामियां सामने आई हैं। हालांकि सरकार ने अभी तक रिपोर्ट की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की गईं?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एसआईटी ने मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें दान राशि का साप्ताहिक ऑडिट अनिवार्य करना, प्रतिदिन प्राप्त चढ़ावे का रिकॉर्ड तैयार करना और पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था लागू करना शामिल है। कुछ रिपोर्टों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की भी सिफारिश बताई गई है। इसके अलावा कुछ रिपोर्टों में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और ट्रस्ट के ढांचे में सुधार या पुनर्गठन की अनुशंसा का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा रिपोर्ट की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
150 से अधिक लोगों पर जांच की नजर
जांच के दौरान एसआईटी ने बड़ी संख्या में लोगों से पूछताछ की। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 150 संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की जांच की गई और करीब 25 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई गई है। हालांकि आधिकारिक रूप से किसी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
चढ़ावे में आई गिरावट
इस विवाद का असर मंदिर में आने वाले दान पर भी देखने को मिला। रिपोर्टों के अनुसार जांच और आरोपों के बाद मंदिर में प्रतिदिन मिलने वाले चढ़ावे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। इससे मंदिर प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
आगे क्या होगा?
एसआईटी ने फिलहाल अपनी प्रारंभिक या अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी है और जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा है। अब उत्तर प्रदेश सरकार रिपोर्ट का अध्ययन करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। यदि रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद से जुड़ी एसआईटी रिपोर्ट ने प्रशासनिक पारदर्शिता और धार्मिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार क्या कदम उठाती है। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही लोगों का विश्वास मजबूत कर सकती है।
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