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Money Laundering Act: रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप पर ED का शिकंजा, 2 पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

Money Laundering Act, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक महत्वपूर्ण मामले में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है।

Money Laundering Act : ED ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के पूर्व अधिकारियों को दबोचा

Money Laundering Act, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक महत्वपूर्ण मामले में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई है और इसे समूह से जुड़े कथित बैंक लोन फ्रॉड मामले में बड़ी जांची कार्रवाई माना जा रहा है।

किन अधिकारियों को किया गया गिरफ्तार?

ED ने मुंबई से सतीश सेठ (Sateesh Seth) और गौतम दोशी (Gautam Doshi) को गिरफ्तार किया है। दोनों पहले Reliance Telecom Ltd. में निदेशक पद पर कार्य कर चुके हैं और रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे हैं। गिरफ्तारी के बाद ED ने दोनों का ट्रांजिट रिमांड लिया और उन्हें आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया गया, क्योंकि मामला दिल्ली में दर्ज है।

क्या है पूरा मामला?

यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज एक बैंक लोन फ्रॉड मामले से जुड़ी है। CBI ने मार्च 2026 में दोनों अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी और उन पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से जुड़े 114.98 करोड़ रुपये के कथित लोन फ्रॉड में भूमिका निभाने का आरोप लगाया था।  CBI के अनुसार, SBI उन 11 बैंकों के कंसोर्टियम का हिस्सा था जिसने Reliance Telecom Ltd. को कुल 735 करोड़ रुपये का टर्म लोन स्वीकृत किया था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस लोन के उपयोग में वित्तीय अनियमितताएं हुईं, जिसके बाद ED ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।

ED की जांच किस आधार पर आगे बढ़ी?

प्रवर्तन निदेशालय ने CBI की FIR और जांच में सामने आए तथ्यों को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े धन का इस्तेमाल कैसे किया गया और क्या उससे अवैध संपत्तियां बनाई गईं या धन को अन्य माध्यमों से ट्रांसफर किया गया।

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PMLA क्या है?

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 भारत का वह कानून है जिसके तहत अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) को वैध दिखाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

इस कानून के तहत ED को निम्न अधिकार प्राप्त हैं:

  • संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ करना
  • गिरफ्तारी करना
  • संदिग्ध संपत्तियों को जब्त या कुर्क करना
  • बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच करना
  • अदालत में अभियोजन चलाना

इसी कानून के तहत इस मामले में दोनों पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी की गई है।

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अनिल अंबानी का नाम क्या इस गिरफ्तारी में शामिल है?

वर्तमान कार्रवाई दो पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी से संबंधित है। हालांकि, रिलायंस समूह से जुड़े विभिन्न बैंक लोन मामलों की जांच पहले से अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जा रही है।हाल ही में SBI की याचिका पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत गारंटर के रूप में दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी है। इस आदेश पर अनिल अंबानी की ओर से कहा गया है कि उनकी कानूनी टीम इसे उचित मंच पर चुनौती देगी और वे अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।

पहले भी हुई थी कार्रवाई

इससे पहले जून 2026 में CBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर अमिताभ झुनझुनवाला को भी कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया था। एजेंसियां रिलायंस समूह से जुड़े कई वित्तीय लेनदेन और बैंक लोन मामलों की जांच कर रही हैं।

आगे क्या होगा?

ED अब दोनों गिरफ्तार अधिकारियों से पूछताछ कर कथित लोन फ्रॉड और उससे जुड़े धन के प्रवाह की जांच करेगी। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो एजेंसी आरोपपत्र दाखिल कर सकती है और कथित अपराध से जुड़ी संपत्तियों पर भी कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल जांच जारी है और मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही पर सभी की नजर बनी हुई है।

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