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WHO: 131 मौतों ने बढ़ाई टेंशन, WHO ने कहा- वायरस को हल्के में न लें

WHO, दुनिया अभी कोविड-19 महामारी के प्रभाव से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि एक बार फिर एक खतरनाक वायरस ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

दुनिया पर नया स्वास्थ्य संकट? WHO की चेतावनी ने खींचा ध्यान

WHO, दुनिया अभी कोविड-19 महामारी के प्रभाव से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई है कि एक बार फिर एक खतरनाक वायरस ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अफ्रीका के कुछ देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस के नए प्रकोप को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गंभीर चेतावनी जारी की है। बढ़ते मामलों और मौतों को देखते हुए WHO ने इसे “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC)” यानी अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है।

131 लोगों की मौत से बढ़ी चिंता

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) में फैले इस इबोला प्रकोप से अब तक 131 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक आंकड़े इससे भी अधिक हो सकते हैं, क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों में जांच और निगरानी की सुविधाएं सीमित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी का फैलाव जिस गति से हो रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। यही कारण है कि WHO ने इसे केवल स्थानीय संकट नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम के रूप में देखा है।

WHO प्रमुख ने जताई गहरी चिंता

WHO के महानिदेशक Tedros Adhanom Ghebreyesus ने हालात को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रकोप का “पैमाना और गति” दोनों चिंताजनक हैं। वायरस न केवल कांगो के कई क्षेत्रों में फैल चुका है, बल्कि पड़ोसी देशों तक भी पहुंच गया है। WHO के अनुसार, यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई की मांग करती है, ताकि वायरस को और अधिक देशों में फैलने से रोका जा सके।

कौन सा इबोला स्ट्रेन फैला रहा है खतरा?

इस बार फैल रहा वायरस बुंडिबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन का इबोला है। यह इबोला वायरस का अपेक्षाकृत दुर्लभ प्रकार माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण को शुरुआती चरण में पहचानने, मरीजों को अलग रखने और संपर्कों की निगरानी पर विशेष जोर दे रही हैं।

पड़ोसी देशों तक पहुंचा संक्रमण

WHO और स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक वायरस अब कांगो की सीमाओं से बाहर भी पहुंच चुका है। युगांडा में कम से कम दो पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है। सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और कई देशों ने अतिरिक्त स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी है।विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित इलाकों में लोगों की आवाजाही अधिक होने के कारण संक्रमण के अन्य क्षेत्रों में फैलने का जोखिम बना हुआ है।

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क्या है इबोला वायरस?

इबोला एक गंभीर और कई मामलों में जानलेवा वायरल बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, शारीरिक तरल पदार्थ या संक्रमित वस्तुओं के संपर्क से फैलता है। बीमारी की शुरुआत आमतौर पर बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द से होती है। गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है।हालांकि यह वायरस कोविड-19 की तरह हवा में आसानी से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव देखा जा रहा है। कई स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमण की चपेट में आए हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। WHO ने चेतावनी दी है कि संघर्ष प्रभावित और दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी वायरस नियंत्रण की कोशिशों को मुश्किल बना रही है। WHO ने आपातकालीन फंड जारी करने के साथ-साथ निगरानी, संपर्क अनुरेखण (Contact Tracing), प्रयोगशाला परीक्षण और उपचार केंद्रों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है।

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क्या दुनिया को फिर महामारी का खतरा है?

WHO ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्थिति को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है, लेकिन इसे अभी “महामारी आपातकाल” नहीं माना गया है। फिर भी संगठन का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो संक्रमण का दायरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों और सरकारों को सतर्क रहना होगा ताकि बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके। अफ्रीका में फैल रहे इबोला वायरस के नए प्रकोप ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर संक्रामक रोगों की ओर खींच दिया है। 131 मौतों और सैकड़ों संदिग्ध मामलों के बीच WHO द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाना इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है। बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए प्रभावी वैक्सीन और उपचार की अनुपलब्धता चुनौती को और बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में वैश्विक सहयोग, तेज निगरानी और प्रभावी स्वास्थ्य उपाय ही इस खतरनाक वायरस के प्रसार को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

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