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Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ी हलचल, ईरान को लेकर ट्रंप का तीखा बयान

Iran Conflict, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों के बेहद करीब पहुंच चुका है और यह अभियान जल्द ही अपने अंतिम चरण में होगा।

Iran Conflict : ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी, ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव

Iran Conflict, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों के बेहद करीब पहुंच चुका है और यह अभियान जल्द ही अपने अंतिम चरण में होगा। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी स्थिति में उन्हें नुकसान नहीं होने देगा।

‘जीत करीब है’—ट्रंप का दावा

अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और Israel के संयुक्त अभियान से ईरान को भारी सैन्य क्षति पहुंची है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना लगभग निष्क्रिय हो चुकी है, उसकी वायुसेना कमजोर पड़ गई है और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को नुकसान हुआ है।ट्रंप ने कहा कि इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की आक्रामक क्षमताओं को समाप्त करना था, और अब वह लक्ष्य लगभग हासिल हो चुका है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान को “पाषाण युग” जैसी स्थिति में पहुंचा दिया जाएगा।

2-3 हफ्तों में निर्णायक कार्रवाई के संकेत

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आने वाले दो से तीन सप्ताह में अमेरिका और कड़े हमले कर सकता है, ताकि मिशन को पूरी तरह सफल बनाया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि बहुत जल्द यह संघर्ष समाप्त कर दिया जाएगा।ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका अपने सहयोगियों, विशेषकर इजरायल, की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है, जबकि विरोधी पक्ष लगातार कमजोर होता जा रहा है।

बातचीत या सख्त कदम—दोनों विकल्प खुले

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक वार्ता सफल नहीं होती है, तो अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे बिजली संयंत्रों और सामरिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति रही है।उनके अनुसार, अमेरिका ने पहले भी बातचीत के कई प्रस्ताव दिए, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। ऐसे में सैन्य कार्रवाई को अनिवार्य कदम के रूप में अपनाया गया।

परमाणु कार्यक्रम पर गंभीर आरोप

ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देता रहा है और वह परमाणु हथियार विकसित करने के बेहद करीब पहुंच चुका था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।उन्होंने दावा किया कि हालिया हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप के मुताबिक, यह कार्रवाई केवल अमेरिका की नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के हित में उठाया गया कदम है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और वैश्विक सुरक्षा

राष्ट्रपति ने अन्य देशों से भी अपील की कि वे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, विशेषकर Strait of Hormuz, की सुरक्षा की जिम्मेदारी साझा करें। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत अहम माना जाता है।ट्रंप ने कहा कि अगर इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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तेल कीमतों पर ईरान को ठहराया जिम्मेदार

अपने बयान में ट्रंप ने हालिया तेल मूल्य वृद्धि के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने तेल टैंकरों पर हमले कर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिससे बाजार में अस्थिरता आई है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल और गैस उत्पादक देश है और वह किसी भी आपूर्ति संकट से निपटने में सक्षम है।

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क्षेत्रीय सहयोगियों की सराहना

ट्रंप ने अपने मध्य-पूर्वी सहयोगियों Saudi Arabia, Qatar, United Arab Emirates, Kuwait और Bahrain की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।कुल मिलाकर, ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने रुख में कोई ढील देने के मूड में नहीं है। जहां एक ओर वे कूटनीति की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य विकल्प को भी खुला रखते हैं।आने वाले हफ्तों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक दोनों देशों के कदमों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका पर निर्भर करेगा। फिलहाल ट्रंप ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अमेरिका अपने लक्ष्यों के करीब है और वह अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

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