Neurological disorder: नर्वस सिस्टम से जुड़ी 100+ बीमारियां, चेतावनी देते हैं ये शुरुआती लक्षण
Neurological disorder, मानव शरीर का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण अंग मस्तिष्क (Brain) है, जो पूरे शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों से मिलकर बना तंत्रिका तंत्र
Neurological disorder : बार-बार सिरदर्द से लेकर भूलने तक, हो सकते हैं न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के संकेत
Neurological disorder, मानव शरीर का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण अंग मस्तिष्क (Brain) है, जो पूरे शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों से मिलकर बना तंत्रिका तंत्र (Nervous System) शरीर की हर क्रिया सोचने, चलने, बोलने, महसूस करने और याद रखने को संचालित करता है। जब इस तंत्रिका तंत्र में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या क्षति होती है, तो उसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार 100 से अधिक प्रकार के न्यूरोलॉजिकल विकार होते हैं, जो हल्के से लेकर गंभीर और जानलेवा तक हो सकते हैं। इन विकारों के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे विकसित होते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं।
क्या होते हैं न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर?
न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर वे रोग हैं जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी या नसों को प्रभावित करते हैं। इन विकारों से शरीर की कार्यप्रणाली, मानसिक क्षमता, संवेदनाएं और मांसपेशियों का नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।इनमें अल्जाइमर, पार्किंसन, मिर्गी, स्ट्रोक, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, न्यूरोपैथी और माइग्रेन जैसे रोग शामिल हैं। हर विकार के लक्षण और गंभीरता अलग-अलग होती है।
न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के प्रमुख प्रकार
1. डीजेनेरेटिव विकार
इनमें मस्तिष्क की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होती हैं। जैसे—अल्जाइमर और पार्किंसन रोग।
2. वास्कुलर विकार
जब मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित होता है तो स्ट्रोक जैसे विकार होते हैं।
3. इंफेक्शन से जुड़े विकार
मेनिन्जाइटिस और एन्सेफलाइटिस जैसे संक्रमण तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं।
4. ऑटोइम्यून विकार
मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसे रोगों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही नसों पर हमला करती है।
5. न्यूरोमस्कुलर विकार
इनमें नसों और मांसपेशियों के बीच संचार प्रभावित होता है, जैसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी।
नजरअंदाज न करने वाले लक्षण
न्यूरोलॉजिकल विकारों के लक्षण व्यक्ति और रोग के प्रकार के अनुसार अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
- बार-बार सिरदर्द या माइग्रेन
- हाथ-पैर में सुन्नता या झनझनाहट
- संतुलन बिगड़ना या चक्कर आना
- याददाश्त कमजोर होना
- बोलने या समझने में कठिनाई
- मांसपेशियों में कमजोरी
- दौरे (Seizures)
- दृष्टि धुंधली होना
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
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न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के कारण
इन विकारों के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- आनुवंशिकता
- सिर या रीढ़ की चोट
- संक्रमण
- रक्त प्रवाह में कमी
- ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया
- ट्यूमर
- विषैले पदार्थों का संपर्क
- उम्र से संबंधित परिवर्तन
अक्सर एक से अधिक कारण मिलकर भी रोग पैदा कर सकते हैं।
समय पर पहचान क्यों जरूरी है?
न्यूरोलॉजिकल विकारों की शुरुआती पहचान और इलाज बेहद महत्वपूर्ण है। कई रोग जैसे स्ट्रोक या मिर्गी का समय पर उपचार करने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
यदि लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए तो:
- स्थायी न्यूरोलॉजिकल क्षति हो सकती है
- चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित हो सकती है
- स्मरण शक्ति और मानसिक क्षमता कम हो सकती है
- जीवन की गुणवत्ता घट सकती है
इसलिए शुरुआती संकेतों को समझना और तुरंत जांच कराना जरूरी है।
निदान और उपचार
न्यूरोलॉजिकल विकारों का निदान न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा किया जाता है। इसके लिए MRI, CT स्कैन, EEG, ब्लड टेस्ट और न्यूरोलॉजिकल परीक्षा की जाती है।उपचार रोग के प्रकार पर निर्भर करता है, जिसमें दवाएं, फिजियोथेरेपी, सर्जरी और पुनर्वास शामिल हो सकते हैं। कई विकार पूरी तरह ठीक नहीं होते, लेकिन सही उपचार से नियंत्रित किए जा सकते हैं।
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तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने के उपाय
- संतुलित और पोषक आहार लें
- नियमित व्यायाम करें
- पर्याप्त नींद लें
- तनाव नियंत्रित रखें
- धूम्रपान और शराब से बचें
- रक्तचाप और शुगर नियंत्रित रखें
- हेलमेट और सुरक्षा उपाय अपनाएं
न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर 100 से अधिक प्रकार के होते हैं और ये शरीर की कार्यक्षमता पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। इनके लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है।मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र हमारे पूरे शरीर के नियंत्रण केंद्र हैं, इसलिए उनकी सेहत को प्राथमिकता देना जरूरी है। यदि कोई भी असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए। जागरूकता, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हम कई न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से बच सकते हैं और बेहतर मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रख सकते हैं।
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