Aditya Pancholi: रेप आरोपों के बीच Aditya Pancholi की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट सख्त
Aditya Pancholi, की 2019 में दर्ज रेप FIR को रद्द करने की मांग पर Bombay High Court ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया।
Aditya Pancholi : FIR कैंसिल कराने पहुंचे Aditya Pancholi, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
Aditya Pancholi, की 2019 में दर्ज रेप FIR को रद्द करने की मांग पर Bombay High Court ने गुरुवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने मामले में नया नोटिस जारी करते हुए शिकायतकर्ता महिला को अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अगली तारीख 24 फरवरी, 2026 तय की गई है।
क्या है मामला?
मामला साल 2019 का है, जब मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में आदित्य पंचोली के खिलाफ रेप सहित कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई थी। एक्टर ने इस FIR को रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। गुरुवार को इसी याचिका पर सुनवाई हुई।पंचोली की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत पाटिल ने कोर्ट के सामने FIR रद्द करने की मांग दोहराई। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस द्वारा 11 नोटिस जारी किए जाने के बावजूद शिकायतकर्ता महिला जांच के लिए उपस्थित नहीं हुई। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने महिला को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई में मौजूद रहने का निर्देश दिया।
किन धाराओं में दर्ज हुई थी FIR?
27 जून 2019 को दर्ज इस FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। इनमें धारा 376 (रेप), 328 (नशीला पदार्थ देकर नुकसान पहुंचाना), 384 (जबरन वसूली), 341 (गलत तरीके से रोकना), 342 (गैरकानूनी रूप से कैद करना), 323 (मारपीट) और 506 (आपराधिक धमकी) शामिल हैं। इन धाराओं के तहत मामला काफी गंभीर माना जाता है, इसलिए कोर्ट इस पूरे प्रकरण को विस्तार से सुन रहा है।
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याचिका में क्या कहा गया?
हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में आदित्य पंचोली ने दावा किया है कि शिकायत कथित घटना के लगभग 15 साल बाद दर्ज की गई। उनके अनुसार, इतनी लंबी देरी के बाद दर्ज की गई शिकायत संदेह पैदा करती है।याचिका में FIR को ‘दुर्भावनापूर्ण’ और ‘गलत इरादे से प्रेरित’ बताया गया है। बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक भजनलाल फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला उन परिस्थितियों में आता है, जहां आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया जा सकता है।भजनलाल केस में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मापदंड तय किए थे, जिनके आधार पर हाई कोर्ट आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर सकता है, यदि मामला प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण प्रतीत हो।
रिकॉर्डिंग का दावा
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कोर्ट को यह भी बताया कि FIR दर्ज होने से पहले एक व्यक्ति आदित्य पंचोली से मिला था और उस मुलाकात की कथित रिकॉर्डिंग मौजूद है। वकील प्रशांत पाटिल ने कहा कि यह रिकॉर्डिंग अदालत के सामने इसलिए रखी गई है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि शिकायत के पीछे कथित रूप से क्या मंशा थी। बचाव पक्ष का दावा है कि इससे यह साबित किया जा सकता है कि मामला ‘गलत इरादे’ से दर्ज कराया गया। हालांकि, इस दावे पर अदालत ने अभी कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।
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पंचोली का पक्ष
2019 में FIR दर्ज होने के तुरंत बाद आदित्य पंचोली ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज किया था और कहा था कि वे कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे।अब, करीब सात साल बाद भी यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में लंबित है। हाई कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या FIR को रद्द करने का कोई कानूनी आधार बनता है या नहीं।
आगे क्या?
फिलहाल, मामला Bombay High Court में विचाराधीन है। अदालत ने शिकायतकर्ता को अगली तारीख यानी 24 फरवरी, 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है। उस दिन यह तय हो सकता है कि FIR रद्द करने की याचिका पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा। यह मामला कानूनी रूप से जटिल है और इसमें गंभीर आरोप शामिल हैं। ऐसे में कोर्ट सभी पक्षों की दलीलें सुनकर ही कोई फैसला देगा। आदित्य पंचोली की FIR रद्द करने की याचिका पर हाई कोर्ट का सख्त रुख इस बात का संकेत है कि अदालत मामले को गंभीरता से ले रही है। शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति और बचाव पक्ष की दलीलों के बीच अब निगाहें 24 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं।
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