Shab-e-Barat ki Dua 2026: इन दुआओं से मिलेगी मगफिरत और अल्लाह की खास रहमत
Shab-e-Barat ki Dua 2026, इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात को बेहद पाक और फज़ीलत वाली रात माना जाता है। यह वह मुबारक रात है जब अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआएं कबूल करता है,
Shab-e-Barat ki Dua 2026 : इबादत, मगफिरत और रहमत की मुबारक रात
Shab-e-Barat ki Dua 2026, इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात को बेहद पाक और फज़ीलत वाली रात माना जाता है। यह वह मुबारक रात है जब अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआएं कबूल करता है, गुनाहों को माफ करता है और आने वाले साल की तक़दीर लिखी जाती है। शब-ए-बारात की रात इबादत, तौबा, इस्तेगफार और दुआ के लिए खास मानी जाती है। साल 2026 में भी मुस्लिम समाज इस रात को पूरी अकीदत और इख़लास के साथ मनाएगा।
शब-ए-बारात का मतलब और महत्व
शब-ए-बारात का मतलब होता है “नजात की रात” यानी गुनाहों से छुटकारा पाने की रात। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत करता है और फरिश्तों को इंसानों के आने वाले साल का रिज़्क, मौत और जिंदगी का हिसाब सौंपता है।यही वजह है कि इस रात लोग नफ्ल नमाज़, कुरान की तिलावत और दुआओं में पूरी रात गुज़ारते हैं। माना जाता है कि सच्चे दिल से मांगी गई दुआ कभी खाली नहीं जाती।
शब-ए-बारात 2026 में कब है?
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक शब-ए-बारात शाबान महीने की 15वीं रात को मनाई जाती है। साल 2026 में शब-ए-बारात मार्च महीने में पड़ने की संभावना है (चांद दिखने पर तारीख में बदलाव हो सकता है)। इस रात को मुसलमान पूरी दुनिया में इबादत और दुआ में मशगूल रहते हैं।
शब-ए-बारात की रात क्यों है इतनी खास?
शब-ए-बारात की रात को रहमत और बरकत की बारिश होती है। हदीसों के मुताबिक, इस रात अल्लाह तआला सूरज डूबने के बाद पहले आसमान पर तशरीफ लाते हैं और फरमाते हैं “है कोई मगफिरत मांगने वाला, जिसे मैं माफ कर दूं? है कोई रोज़ी मांगने वाला, जिसे मैं अता करूं?” इसलिए यह रात गुनाहों की माफी और जिंदगी संवारने का बेहतरीन मौका मानी जाती है।
शब-ए-बारात की खास दुआ (Shab-e-Barat ki Dua)
इस पाक रात में यह दुआ खास तौर पर पढ़ी जाती है: “अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्वा फअफु अन्नी।” अर्थ: ऐ अल्लाह! तू माफ करने वाला है, माफी को पसंद करता है, इसलिए मुझे माफ फरमा। यह दुआ गुनाहों की मगफिरत के लिए बहुत असरदार मानी जाती है।
तरक्की और रिज़्क के लिए पढ़ें ये दुआएं
अगर आप अपनी जिंदगी में तरक्की, बरकत और कामयाबी चाहते हैं, तो शब-ए-बारात की रात यह दुआ पढ़ें:
“या अल्लाह! मेरे रिज़्क में बरकत अता फरमा, मेरे हालात आसान कर और मुझे हर बुराई से बचा।”
इसके साथ 100 मर्तबा “या रज्ज़ाक” का वज़ीफा करना भी बेहद फायदेमंद माना जाता है।
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मगफिरत के लिए खास अजकार
इस मुबारक रात में ज्यादा से ज्यादा इस्तेगफार करना चाहिए। ये अजकार खास माने जाते हैं:
- अस्तगफिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि ज़ंबिन व अतूबु इलैह
- सुभानअल्लाह
- अल्हम्दुलिल्लाह
- अल्लाहु अकबर
इन अजकार से दिल पाक होता है और अल्लाह की रहमत नज़दीक आती है।
शब-ए-बारात की रात कैसे करें इबादत?
शब-ए-बारात की रात इन बातों का खास ख्याल रखें:
- नफ्ल नमाज़ अदा करें
- कुरान-ए-पाक की तिलावत करें
- अपने गुनाहों की सच्चे दिल से तौबा करें
- माता-पिता और मरहूम रिश्तेदारों के लिए दुआ करें
- दूसरों के लिए भलाई और सलामती की दुआ मांगें
इस रात की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
शब-ए-बारात पर क्या न करें?
इस पाक रात को फिजूल कामों, आतिशबाज़ी और शोर-शराबे से बचना चाहिए। इस रात का मकसद सिर्फ और सिर्फ इबादत, सब्र और अल्लाह से जुड़ना है, न कि दिखावा या फिजूलखर्ची।
शब-ए-बारात: किस्मत बदलने का मौका
शब-ए-बारात सिर्फ एक रात नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने का मौका है। अगर इंसान इस रात सच्चे दिल से अल्लाह के सामने झुक जाए, तो उसकी जिंदगी की दिशा बदल सकती है। गुनाहों से तौबा, नेक नियत और दुआ ही इस रात की असली खूबसूरती है।
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