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Vijaya Ekadashi 2026: भगवान विष्णु की कृपा, विजया एकादशी 2026 में क्यों रखी जाती है व्रत

Vijaya Ekadashi 2026, हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में विजया एकादशी को बेहद पुण्यदायी बताया गया है।

Vijaya Ekadashi 2026 : सफलता और विजय पाने का दिन, जानें पूजा विधि

Vijaya Ekadashi 2026, हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में विजया एकादशी को बेहद पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को हर कार्य में विजय प्राप्त होती है और जीवन के बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। विजया एकादशी 2026 में भी श्रद्धालुओं के लिए खास संयोग लेकर आ रही है।

कब मनाई जाएगी विजया एकादशी 2026?

पंचांग के अनुसार, विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह एकादशी फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च की शुरुआत में पड़ सकती है (स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि में अंतर संभव है)। इस दिन सूर्योदय से लेकर द्वादशी तिथि तक व्रत रखा जाता है और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

क्यों कहलाती है विजया एकादशी?

“विजया” शब्द का अर्थ होता है जीत या सफलता। शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। चाहे वह शत्रुओं पर विजय हो, रोगों से मुक्ति हो या फिर मानसिक तनाव से छुटकारा—इस व्रत को करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं।

विजया एकादशी का पौराणिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों में विजया एकादशी का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से ही उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई। इसी कारण यह एकादशी विशेष रूप से विजय दिलाने वाली मानी जाती है।

विजया एकादशी व्रत का महत्व

विजया एकादशी का व्रत केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानसिक रूप से भी लाभकारी माना गया है।
मान्यताओं के अनुसार—

  • इस व्रत से सभी पापों का नाश होता है
  • जीवन में चल रही असफलता और रुकावटें दूर होती हैं
  • शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों पर विजय प्राप्त होती है
  • मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है

विजया एकादशी व्रत की पूजा विधि

विजया एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद—

  1. घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें
  2. पीले फूल, तुलसी पत्र, फल और धूप-दीप अर्पित करें
  3. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें
  4. विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें
  5. रात्रि में भजन-कीर्तन करें और जागरण का भी विशेष महत्व है

विजया एकादशी व्रत में क्या खाएं?

व्रत रखने वाले लोग इस दिन फलाहार कर सकते हैं।
व्रत में खाई जाने वाली चीजें—

  • फल और ड्राई फ्रूट्स
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • दूध और दही

इस दिन अनाज, दाल, चावल और नमक का सेवन वर्जित माना जाता है।

विजया एकादशी के दिन क्या न करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ कार्यों से बचना चाहिए—

  • झूठ बोलना और क्रोध करना
  • किसी का अपमान या निंदा करना
  • मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन
  • बाल और नाखून काटना

इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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विजया एकादशी से जुड़ी खास मान्यताएं

ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से विजया एकादशी का व्रत करता है, उसे जीवन में कभी हार का सामना नहीं करना पड़ता। यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो नौकरी, व्यापार, मुकदमे या प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता चाहते हैं।

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क्यों खास है विजया एकादशी 2026?

विजया एकादशी 2026 में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति इस व्रत को और भी फलदायी बना सकती है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। विजया एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और आत्मशुद्धि का पर्व है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन की नकारात्मकता दूर होती है और सफलता के नए मार्ग खुलते हैं। अगर आप अपने जीवन में विजय, शांति और पापों से मुक्ति चाहते हैं, तो विजया एकादशी 2026 का व्रत अवश्य करें।

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