लाइफस्टाइल

UGC New Regulations: यूजीसी के नए नियमों पर लगी रोक? सुप्रीम कोर्ट ने कहा– अभी 2012 का नियम मान्य

UGC New Regulations, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जनवरी 2026 में कुछ महत्वपूर्ण नए नियम (Regulations 2026) लागू किए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव के खिलाफ प्रभावी व्यवस्थाएं बनाना था।

UGC New Regulations : यूजीसी के 2026 नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, 2012 नियम फिलहाल प्रभावी

UGC New Regulations, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जनवरी 2026 में कुछ महत्वपूर्ण नए नियम (Regulations 2026) लागू किए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और भेदभाव के खिलाफ प्रभावी व्यवस्थाएं बनाना था। लेकिन इन नियमों को लेकर देश भर में विवाद उठ गया है और अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया। फिलहाल अदालत ने नए नियमों पर रोक लगाते हुए पुराने 2012 के नियम को फिर से प्रभावी कर दिया है, और अगले आदेश तक यही लागू रहेगा।

1. UGC के नए 2026 नियम क्या थे?

UGC ने 13 जनवरी 2026 को “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” नाम से नए नियम लागू किए थे। इन नियमों को संसद और शिक्षा जगत की मंज़ूरी के बाद अधिसूचित किया गया था, जिसका लक्ष्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना और समावेशी व्यवस्थाएँ बनाना था।

इन नए नियमों के तहत:

  • संस्थानों में Equal Opportunity Centres और Equity Committees बनाना अनिवार्य था
  • SC, ST और OBC समुदायों के लिए विशेष ग्रिवांस निवारण तंत्र प्रस्तावित था
  • शिकायत निपटान, हेल्पलाइन और रिपोर्टिंग तंत्र को सख्त बनाना शामिल था

लेकिन आलोचक कहते हैं कि नए नियम:

  • कुछ वर्गों को बाहर रखते हैं
  • सामान्य श्रेणी के छात्रों को संरक्षण नहीं देते
  • भेदभाव की परिभाषाएं अस्पष्ट हैं और दुरुपयोग का जोखिम है

2. सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने एक इंटरिम आदेश जारी किया, जिसमें:

  • 2026 के नए नियमों पर रोक लगा दी गई
  • और कहा गया कि अब 2012 के नियम ही लागू रहेंगे
  • मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को होगी

इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह यह है कि कोर्ट ने पाया कि नए 2026 नियम “अस्पष्ट” (vague) हैं और दुरुपयोग के लिए खुला वातावरण बना सकते हैं। इसके अलावा, कई नियमों में सामाजिक विभाजन के जोखिम की बात भी सामने आई है।  मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि नियमों का भाषा और संरचना स्पष्ट नहीं है और संविधान के समानता सिद्धांत से मेल खाती भी नहीं लग रही है।

3. 2012 के पुरालेख (एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियम) क्या कहते हैं?

2012 के UGC नियम “Promotion of Equity in Higher Educational Institutions Regulations, 2012” थे। वे इस प्रकार थे:

  • छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने पर केंद्रित
  • शिकायत निपटान तंत्र, इंक्वायरी, सपोर्ट सिस्टम की अवधारणा दी
  • संस्थानों को जागरूकता और सलाह-मशविरा कार्यक्रम चलाने के लिए प्रेरित किया

ये नियम अपेक्षाकृत सिम्पल और छात्रों-केन्द्रित थे, जबकि नए 2026 नियमों में नियमों का दायरा संस्थान, शिक्षक, कर्मचारी सहित व्यापक कर दिया गया था।

Read More: Rice Soup Benefits: बीमारी में क्यों पिएं राइस सूप? जानें इसके सेहतमंद फायदे

4. सुप्रीम कोर्ट किस आधार पर जांच करेगा?

कोर्ट अगले हफ्तों में इन मुख्य बिंदुओं पर विस्तृत सुनवाई करेगा:

  1. क्या Clause 3(c) में दी गई जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा संविधान के अनुरूप है?
  2. क्या नए नियमों में सामान्य श्रेणी के छात्रों को विशेष सुरक्षा तंत्र से बाहर रखा गया है?
  3. क्या नियम भाषा और संरचना में अस्पष्ट हैं और दुरुपयोग का जोखिम पैदा कर सकते हैं?
  4. क्या संघीय शिक्षा नीतियों के उद्देश्य और नियमों के ढांचे में विसंगति है?

अदालत ने केंद्र और UGC दोनों से प्रतिवादी के रूप में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। अब कोर्ट यह तय करेगी कि नए नियमों में संशोधन की आवश्यकता है या नहीं।

Read More: How to make perfect chai at home: घर पर टपरी-जैसी स्वादिष्ट चाय बनाने का आसान तरीका

5. यूजीसी नए नियमों का विरोध क्यों हुआ?

नई UGC नियमावली को लेकर कई छात्र संगठनों, शिक्षाविदों और राजनीतिक दलों ने चिंता जताई क्योंकि:

  • कुछ का कहना है कि नियम भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं
  • कुछ ने इसे राजनीतिक एजेंडा कहते हुए विवादित बताया
  • सामान्य श्रेणी के छात्रों के अधिकारों को लेकर भी बहस है

इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि शिक्षा-सम्बंधित नियमों को बनाते समय सामाजिक संतुलन और संविधानिक समानता का ध्यान कितना दिया जाता है।

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के 2026 के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम रोक आदेश शिक्षा जगत में बड़ी खबर है। कोर्ट ने नए नियमों की भाषा, संरचना और सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठाए हैं और फिलहाल 2012 वाले नियम को प्रभावी रखते हुए विस्तृत समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस फैसले का व्यापक प्रभाव कॉलेज-विश्वविद्यालयों के नीति-निर्माण, छात्रों के अधिकारों और बराबरी-संबंधी तंत्रों पर पड़ेगा, और मार्च 2026 में अंतिम निर्णय आने तक यही बहस जारी रहेगी।

We’re now on WhatsApp. Click to join.

अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com

Back to top button