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Alex Honnold: ना सेफ्टी, ना रस्सी, एलेक्स होनोल्ड ने 101 मंजिला इमारत पर किया असंभव कारनामा

Alex Honnold, रस्सियों का कोई डर नहीं: दुनिया के मशहूर फ्री-सोलो क्लाइंबर एलेक्स होनोल्ड ने एक बार फिर इंसानी हिम्मत और साहस की सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। इस बार उन्होंने ताइवान की 101 मंजिला गगनचुंबी इमारत पर बिना किसी रस्सी

Alex Honnold : डर को दी मात, एलेक्स होनोल्ड ने बिना रस्सी पूरी की 101 मंजिला इमारत की चढ़ाई

Alex Honnold, रस्सियों का कोई डर नहीं: दुनिया के मशहूर फ्री-सोलो क्लाइंबर एलेक्स होनोल्ड ने एक बार फिर इंसानी हिम्मत और साहस की सारी सीमाएं तोड़ दी हैं। इस बार उन्होंने ताइवान की 101 मंजिला गगनचुंबी इमारत पर बिना किसी रस्सी और सुरक्षा उपकरण के अकेले चढ़ाई पूरी कर ली। जैसे ही यह खबर सामने आई, पूरे ताइवान में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक, हर जगह एलेक्स होनोल्ड की बहादुरी की चर्चा हो रही है।

क्या है पूरा मामला?

एलेक्स होनोल्ड, जिन्हें दुनिया फ्री सोलो क्लाइंबिंग का बेताज बादशाह मानती है, उन्होंने ताइवान की प्रतिष्ठित 101 मंजिला इमारत पर चढ़ाई का फैसला किया। खास बात यह रही कि इस खतरनाक स्टंट के दौरान उन्होंने कोई रस्सी, हार्नेस या सेफ्टी गियर इस्तेमाल नहीं किया। यानी एक छोटी सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती थी। यह चढ़ाई सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, फोकस और आत्मविश्वास की भी परीक्षा थी। इमारत की ऊंचाई, तेज हवाएं और फिसलन भरी सतह—हर कदम पर खतरा मौजूद था।

ताइवान में क्यों मना जश्न?

ताइवान की 101 मंजिला गगनचुंबी इमारत देश की पहचान मानी जाती है। इस इमारत पर सफल चढ़ाई को ताइवान के लोगों ने सिर्फ एक स्टंट नहीं, बल्कि मानव साहस की जीत के रूप में देखा।
चढ़ाई पूरी होने के बाद:

  • स्थानीय लोगों ने तालियों और नारों से स्वागत किया
  • सोशल मीडिया पर #AlexHonnold और #Taiwan101 ट्रेंड करने लगे
  • कई युवाओं ने इसे प्रेरणा का पल बताया

ताइवान के खेल और पर्यटन जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस उपलब्धि से देश को वैश्विक पहचान भी मिली है।

कौन हैं एलेक्स होनोल्ड?

एलेक्स होनोल्ड का नाम आते ही दिमाग में डर को मात देने वाला इंसान सामने आता है। उन्होंने इससे पहले भी कई ऐसी चढ़ाइयां की हैं, जिन्हें आम इंसान तो क्या, प्रोफेशनल क्लाइंबर भी खतरनाक मानते हैं।
उनकी पहचान:

  • फ्री सोलो क्लाइंबिंग में महारत
  • बिना सुरक्षा उपकरण के पहाड़ और ऊंची संरचनाएं चढ़ना
  • मानसिक मजबूती और अनुशासन

एलेक्स का मानना है कि डर को समझना जरूरी है, लेकिन डर के आगे झुकना नहीं।

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चढ़ाई के दौरान किन चुनौतियों का सामना?

101 मंजिला इमारत पर चढ़ना किसी पहाड़ पर चढ़ने से बिल्कुल अलग होता है। यहां एलेक्स को कई मुश्किलों से जूझना पड़ा:

  • तेज हवाएं, जो संतुलन बिगाड़ सकती थीं
  • कांच और धातु की सतह, जहां पकड़ बनाना मुश्किल था
  • ऊंचाई पर ऑक्सीजन और फोकस बनाए रखना
  • नीचे का नजारा, जो मानसिक दबाव बढ़ा सकता था

इन सबके बावजूद एलेक्स ने हर कदम बेहद सोच-समझकर रखा।

सोशल मीडिया पर रिएक्शन

एलेक्स होनोल्ड की इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया यूजर्स जमकर रिएक्ट कर रहे हैं। किसी ने लिखा “ये इंसान डर को नहीं मानता, डर इसे मानता है।” तो किसी ने कहा “यह सिर्फ चढ़ाई नहीं, इंसानी हौसले का लाइव उदाहरण है।” कई लोगों ने इसे युवाओं के लिए सपनों को पूरा करने की प्रेरणा बताया।

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सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

जहां एक तरफ लोग एलेक्स की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इस तरह के स्टंट को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • ऐसे स्टंट केवल प्रोफेशनल्स को ही करने चाहिए
  • आम लोगों को इससे प्रेरित होकर जोखिम नहीं उठाना चाहिए

हालांकि एलेक्स होनोल्ड खुद भी कई बार कह चुके हैं कि वह अपनी सीमाओं और क्षमताओं को अच्छी तरह समझकर ही ऐसा करते हैं। एलेक्स होनोल्ड द्वारा ताइवान की 101 मंजिला गगनचुंबी इमारत पर बिना रस्सी चढ़ाई करना सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मानव साहस, आत्मविश्वास और अनुशासन की मिसाल है। इस उपलब्धि ने ताइवान को खुशी का मौका दिया और दुनिया को एक बार फिर याद दिलाया कि अगर डर पर काबू पा लिया जाए, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो सकता है।

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