India-EU Trade Deal: भारत-EU समझौते से किन चीजों पर मिलेगा बड़ा सस्ता सौदा?
India-EU Trade Deal, भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) पर सहमति जताई है, जिसे दोनों पक्षों ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है।
India-EU Trade Deal : भारत-EU डील के बाद ये सामान होंगे सस्ते, चेक करें लिस्ट
India-EU Trade Deal, भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) पर सहमति जताई है, जिसे दोनों पक्षों ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है। यह डील करीब 18 साल की बातचीत के बाद अंतिम चरण में पहुंची है और अगर लागू हो जाती है, तो यह भारत और EU के बीच का सबसे बड़ा व्यापार समझौता साबित हो सकता है। यह डील भारत के लगभग सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक EU के साथ टैरिफ (आयात शुल्क) हटाने/कम करने पर ध्यान केंद्रित करती है। इसका सीधा असर न सिर्फ व्यापार और निवेश पर होगा बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ेगा।
समझौता लागू होने से कौन-सी चीजें होंगी सस्ती?
India-EU FTA के तहत यूरोपीय संघ के कई उत्पादों पर भारत पहले से लागू ऊंचे टैरिफ को हटा देगा या घटा देगा, जिससे ये सामान भारत में सस्ते मिल सकते हैं। नीचे वे प्रमुख उत्पादों की सूची है जिनके दाम कम होने की संभावना है:
1. यूरोपीय कार (Luxury & Premium Vehicles)
हाल में भारत में यूरोप से आयात होने वाली लग्ज़री कारों पर 110% तक टैरिफ लगता था। FTA के तहत यह टैरिफ क्रमशः घटाकर लगभग 10% कर दिया जाएगा, हालांकि कोटा (250,000 गाड़ियों तक) के भीतर। इसका मतलब यह है कि BMW, Mercedes, Audi, Volkswagen जैसे ब्रांडों की गाड़ियाँ भारत में पहले की तुलना में किफायती हो सकती हैं।
2. वाइन, स्पिरिट्स और बियर
भारत में यूरोपियन शराब पर बहुत ऊँचा शुल्क लगता है:
- वाइन पर 150% से घटाकर 20-30% तक
- स्पिरिट्स (जैसे स्कॉच व्हिस्की) पर 150% से 40% तक
- बियर पर 110% से 50% तक
इन कटौती के चलते फ्रेंच वाइन, इटालियन प्रोसैको, स्कॉच व्हिस्की और यूरोपीय बियर जैसे उत्पादों के दाम में ख़ासी कमी देखने को मिल सकती है।
3. ऑलिव ऑयल और प्रॉसेस्ड फ़ूड
कई यूरोपीय खाद्य उत्पादों पर भारत पहले उच्च आयात शुल्क लगाता था:
- ऑलिव ऑयल के टैरिफ को 0% तक
- बिस्कुट, पास्ता, चॉकलेट, ब्रेड जैसी प्रोसेस्ड चीज़ों को 0% तक
इसका मतलब है कि ऑलिव ऑयल, पास्ता, फ्रूट जूस और चॉकलेट जैसे उत्पाद भारतीय बाज़ार में पहले से अधिक बजट-फ्रेंडली हो सकते हैं।
4. दवाइयाँ और मेडिकल उपकरण
भारत यूरोप से उच्च-स्तरीय फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल उपकरण भी आयात करता है। FTA के तहत इन उत्पादों पर भी टैरिफ को शून्य तक ले जाने का प्रावधान है। इससे:
- उन्नत मेडिकल डिवाइसेज़ (जैसे डायग्नोस्टिक मशीन, ऑप्टिकल उपकरण)
- कुछ विशिष्ट लाइसेंस वाली दवाएँ
भारतीय बाजार में पहले से अधिक सस्ते और सुलभ हो सकते हैं।
5. मशीनरी, इलेक्ट्रिकल उपकरण और केमिकल्स
FTA में शामिल बड़े उद्योग-स्तर के घटकों/उपकरणों पर भी टैरिफ हटाने या शून्य करने की घोषणा है:
- मशीनरी & इलेक्ट्रिकल सामान
- ऑप्टिकल/सरजिकल उपकरण
- केमिकल्स और प्लास्टिक
- लोहे-इस्पात से जुड़ी वस्तुएँ
ये सामान सीधे उपभोक्ता-सामान्य नहीं हैं, लेकिन इनसे बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, निर्माण उत्पाद और फ़ैक्टरी उपकरण अधिक सस्ते और प्रतिस्पर्धात्मक हो सकते हैं।
6. कुछ खाद्य फलों और पैकेज्ड ड्रिंक्स
कुछ फल और जूस जैसे:
- किवी और नाशपाती पर टैरिफ घटकर 10%
- फलों के जूस और नॉन-अल्कोह़ॉलिक बियर पर टैरिफ 0% तक
इससे यूरोपीय आयातित पैन्ट्री आइटम्स और फलों के चयन पर भी कीमतें कम हो सकती हैं।
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किन चीज़ों के दाम में तुरंत कमी नहीं आएगी?
FTA के बावजूद कुछ मुद्दों पर संवेदनशील (sensitive) क्षेत्रों को अलग रखा गया है। उदाहरण के लिए:
- डेयरी (दूध, पनीर)
- कुछ कृषि उत्पाद
ये अभी भी भारत-EU FTA से बाहर रखे गए हैं या इन्हें चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जा सकता है।
इसका मतलब यह है कि रोज़मर्रा की कुछ आवश्यक चीज़ों की कीमतों पर जल्द 큰 असर नहीं पड़ेगा, लेकिन प्राकृतिक संक्रमण और बाजार प्रतिस्पर्धा से दीर्घकालिक प्रभाव मिल सकता है।
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आम लोगों के लिए क्या असर होगा?
भारत-EU FTA से:
✔️ 进口欧盟 के कई प्रीमियम उत्पाद सस्ते होंगे
✔️ भारत में यूरोप से आने वाली लक्ज़री और उच्च गुणवत्ता वाली वस्तुएँ अभी से किफायती हो सकती हैं
✔️ उद्योगों को सस्ते इनपुट्स मिलेंगे, जिससे समय के साथ उत्पादों के दाम में गिरावट आ सकती है
✔️ निर्यात में बढ़ोतरी के कारण रोज़गार और उत्पादन को भी लाभ मिल सकता है
लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि मूल्य गिरावट तुरंत नहीं होती; टैरिफ कटौती का असर चरणबद्ध तरीके से लागू होगा। भारत-EU ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ वह समझौता है जिसे भारत और 27 EU देशों के बीच सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता माना जा रहा है। इसके लागू होने से न केवल व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि लग्ज़री कारें, यूरोपियन वाइन, प्रोसेस्ड फ़ूड, ऑलिव ऑयल, मेडिकल डिवाइसेज़ और विविध उद्योग-उत्पाद जैसे सामान भारतीय बाजार में पहले से सस्ते मिल सकते हैं।
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