Onion Inflation: महंगा हुआ प्याज तो सरकार ने चलाया ‘कांदा एक्सप्रेस’, 59% कीमत बढ़ने के बाद बड़ा फैसला
Onion Inflation, रसोई के बजट पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ रही है। देशभर में प्याज की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 24 अगस्त 2026 को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर करीब 59 फीसदी बढ़कर ₹43.53 प्रति किलो पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह करीब ₹27.37 प्रति किलो थी। वहीं, औसत थोक कीमत भी करीब 68 फीसदी बढ़कर ₹35.58 प्रति किलो हो गई।
Onion Inflation : प्याज ने निकाले आंसू! कीमतों में 59% उछाल, महंगाई पर लगाम लगाने के लिए चलेगी ‘कांदा एक्सप्रेस’
Onion Inflation, रसोई के बजट पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ रही है। देशभर में प्याज की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 24 अगस्त 2026 को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर करीब 59 फीसदी बढ़कर ₹43.53 प्रति किलो पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह करीब ₹27.37 प्रति किलो थी। वहीं, औसत थोक कीमत भी करीब 68 फीसदी बढ़कर ₹35.58 प्रति किलो हो गई। प्याज की बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने अब ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए बड़े शहरों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने का फैसला किया है। महाराष्ट्र के नासिक से विशेष रेलवे रैक के जरिए प्याज दिल्ली समेत कई बड़े खपत केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। दिल्ली में पहली कांदा एक्सप्रेस करीब 800 टन प्याज लेकर पहुंच रही है, जिसे रियायती दर पर बेचने की तैयारी है।
दिल्ली में ₹35 किलो मिलेगा प्याज
दिल्ली के लोगों के लिए सरकार की यह पहल राहत देने वाली हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक कांदा एक्सप्रेस से आने वाला करीब 800 टन प्याज राजधानी में ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर बेचा जाएगा। इस प्याज की खुदरा बिक्री NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार के स्टोर के माध्यम से की जाएगी। इससे बाजार में महंगे प्याज के मुकाबले लोगों को कम कीमत पर प्याज खरीदने का विकल्प मिलेगा। सरकार का उद्देश्य सिर्फ सस्ता प्याज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बाजार में उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना भी है।
दिल्ली में प्याज ₹55 तक पहुंचा
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रमुख शहरों में इसके खुदरा भाव काफी ऊपर चले गए हैं। 24 अगस्त को दिल्ली में प्याज करीब ₹55 प्रति किलो, चेन्नई में ₹60 और कोलकाता में ₹53 प्रति किलो तक बताया गया। पिछले साल इसी समय दिल्ली में प्याज का भाव करीब ₹35 प्रति किलो था। यानी दिल्ली में उपभोक्ताओं को एक साल के मुकाबले प्याज के लिए काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। ऐसे में ₹35 प्रति किलो की सरकारी बिक्री आम लोगों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।
किन शहरों तक पहुंचेगी ‘कांदा एक्सप्रेस’?
सरकार ने शुरुआत में प्याज की आपूर्ति उन शहरों तक पहुंचाने की योजना बनाई है, जहां खपत ज्यादा है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इनमें दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी शामिल हैं। जरूरत के अनुसार आगे और शहरों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। नासिक में मौजूद सरकारी बफर स्टॉक को रेलवे रैक के माध्यम से इन बड़े बाजारों तक भेजा जा रहा है। इससे सड़क के मुकाबले बड़े पैमाने पर प्याज की ढुलाई करने में मदद मिल सकती है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में इस तेजी के पीछे सप्लाई में कमी और मौसम से जुड़ी चुनौतियां अहम कारण मानी जा रही हैं। महाराष्ट्र देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में है। इस साल मार्च-अप्रैल के दौरान बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का असर रबी प्याज की फसल और उपलब्ध स्टॉक पर पड़ा। रबी प्याज की कटाई आमतौर पर मार्च-अप्रैल के दौरान होती है और इसका स्टॉक अगले कई महीनों तक बाजार में सप्लाई किया जाता है। अगर स्टॉक प्रभावित होता है तो नई फसल आने से पहले बाजार में उपलब्धता कम हो सकती है। यही स्थिति कीमतों पर दबाव बढ़ा सकती है।

खरीफ प्याज की फसल पर भी नजर
आने वाले समय में प्याज की कीमतों के लिए खरीफ फसल की आवक महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों के अनुसार मानसून में देरी से किसानों की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे खरीफ प्याज की नई फसल के बाजार में आने के समय को लेकर दबाव बना हुआ है। खरीफ प्याज की आवक आमतौर पर सितंबर से नवंबर के बीच होती है। ऐसे में नई फसल बाजार में पर्याप्त मात्रा में आने तक सरकार का बफर स्टॉक और अतिरिक्त सप्लाई कीमतों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सरकार के पास कितना प्याज है?
सरकार ने कीमतों में अचानक उछाल जैसी स्थिति से निपटने के लिए प्याज का बफर स्टॉक तैयार रखा है। 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक होने की जानकारी सामने आई है। इसी स्टॉक में से प्याज निकालकर बड़े शहरों में भेजा जा रहा है। बफर स्टॉक का उद्देश्य यही होता है कि जब बाजार में किसी जरूरी खाद्य वस्तु की सप्लाई कम हो और कीमतें तेजी से बढ़ने लगें, तब सरकार अपने भंडार से सामान निकालकर बाजार में उपलब्धता बढ़ा सके।
थोक कीमत में भी बड़ा उछाल
सिर्फ खुदरा बाजार में ही प्याज महंगा नहीं हुआ है। 24 अगस्त को प्याज की औसत थोक कीमत करीब ₹35.58 प्रति किलो रही, जो पिछले साल इसी अवधि में करीब ₹21.23 प्रति किलो थी। यानी थोक कीमत में लगभग 68 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। थोक बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर खुदरा बाजार पर पड़ता है। परिवहन, भंडारण और अन्य लागत जुड़ने के बाद उपभोक्ताओं को प्याज और महंगा मिल सकता है। इसलिए सरकार का फोकस थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर सप्लाई बढ़ाने का है।
‘कांदा एक्सप्रेस’ से क्या बदलेगा?
‘कांदा एक्सप्रेस’ का मुख्य उद्देश्य एक साथ बड़ी मात्रा में प्याज को उन बाजारों तक पहुंचाना है जहां इसकी मांग अधिक है। रेलवे के जरिए बड़े पैमाने पर प्याज भेजने से बाजार में स्टॉक बढ़ाया जा सकता है।अगर पर्याप्त मात्रा में प्याज बाजार में पहुंचता है, तो कारोबारियों पर भी कीमतें बढ़ाने का दबाव कम हो सकता है। साथ ही सरकारी स्टोरों पर रियायती दर में प्याज मिलने से उपभोक्ताओं को सीधे राहत मिल सकती है।हालांकि, इसका असर कितने समय तक रहेगा, यह काफी हद तक नई खरीफ फसल की आवक, मौसम और बाजार में सप्लाई की स्थिति पर निर्भर करेगा।
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त्योहारों से पहले राहत की कोशिश
आने वाले दिनों में देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे समय में घरेलू खपत बढ़ सकती है। प्याज भारतीय रसोई की लगभग हर तरह की सब्जी और कई व्यंजनों में इस्तेमाल होता है। इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का असर सीधे आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है।सरकार का बफर स्टॉक बाजार में उतारने और कांदा एक्सप्रेस से बड़े शहरों में प्याज पहुंचाने का फैसला इसी दबाव को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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आम लोगों को कब और कैसे मिलेगा सस्ता प्याज?
दिल्ली में कांदा एक्सप्रेस से पहुंचने वाला प्याज NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार के स्टोरों के माध्यम से ₹35 प्रति किलो की दर पर बेचा जाना है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर स्टॉक की उपलब्धता और बिक्री केंद्रों की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए खरीदारों को संबंधित सरकारी बिक्री केंद्रों पर उपलब्धता और बिक्री की जानकारी पहले जांच लेना बेहतर होगा।प्याज की कीमतों में 59 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में प्याज का भाव ₹55 प्रति किलो तक पहुंचने के बीच केंद्र सरकार ने नासिक से प्याज की सप्लाई बढ़ाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू की है। पहली कांदा एक्सप्रेस करीब 800 टन प्याज लेकर दिल्ली पहुंच रही है, जिसे NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार के जरिए ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर बेचने की योजना है। अब इस सरकारी हस्तक्षेप का बाजार पर कितना असर पड़ता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल सरकार की कोशिश यही है कि नई फसल आने तक पर्याप्त सप्लाई बनाए रखी जाए और प्याज की बढ़ती कीमतों से आम उपभोक्ताओं को राहत मिले।
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