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Jharkhand High Court: झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, JSSC CGL और CDPO नियुक्ति रद्द करने पर लगी अंतरिम रोक

Jharkhand High Court, झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच JSSC CGL और CDPO नियुक्तियों से जुड़े अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से इन परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है।

Jharkhand High Court : JSSC CGL-CDPO नियुक्तियों पर मंडरा रहा संकट टला? हाई कोर्ट ने रद्दीकरण आदेश पर लगाई रोक

Jharkhand High Court, झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच JSSC CGL और CDPO नियुक्तियों से जुड़े अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से इन परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को चार अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है, जिनकी मेहनत से हासिल सरकारी नौकरी पर परीक्षा रद्द होने के बाद संकट खड़ा हो गया था। हालांकि, हाई कोर्ट की यह रोक अंतिम फैसला नहीं है। मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी और अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही नियुक्तियों के भविष्य को लेकर पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

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क्या है पूरा मामला?

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है। अभ्यर्थियों ने कई परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया।सरकार के फैसले की चपेट में JSSC-CGL जैसी महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा भी आई। इसके अलावा TDPL के जरिए कराई गई कई अन्य परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने कथित अनियमितताओं की जांच का भी फैसला किया है। सरकार के इस कदम से उन अभ्यर्थियों में नाराजगी फैल गई, जिन्होंने परीक्षा पास करके नियुक्ति हासिल कर ली थी। उनका तर्क था कि अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई भी है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

हाई कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला?

नियुक्तियां रद्द किए जाने के सरकारी आदेश के खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों की ओर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। इस मामले में अलग-अलग याचिकाएं दायर की गईं। शुक्रवार को अदालत ने ऐसी चार याचिकाओं पर सुनवाई की।सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने JSSC-CGL और CDPO परीक्षा से संबंधित नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है। इसका मतलब यह है कि सरकार फिलहाल इन नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश को आगे लागू नहीं कर सकेगी, जब तक अदालत इस मामले में आगे कोई आदेश नहीं देती।

करीब 2 हजार JSSC CGL अभ्यर्थियों को राहत

JSSC-CGL नियुक्तियों को रद्द किए जाने के फैसले से करीब 2,000 सफल अभ्यर्थियों के सामने नौकरी जाने का संकट खड़ा हो गया था। इन उम्मीदवारों ने परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति हासिल की थी और कई लोग अपने पद पर काम भी कर रहे थे।सरकार के रद्दीकरण के फैसले के बाद प्रभावित कर्मचारियों और अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि उन्होंने परीक्षा में मेहनत करके सफलता हासिल की और अगर परीक्षा प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन चयनित उम्मीदवारों को सामूहिक रूप से सजा नहीं दी जानी चाहिए। हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इन अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।

सरकार ने क्यों लिया था परीक्षा रद्द करने का फैसला?

झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की शिकायतों के बीच कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। रिपोर्टों के मुताबिक सरकार ने JSSC-CGL 2024 समेत TDPL द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का निर्णय लिया। साथ ही कई मामलों की जांच के लिए CID स्तर पर कार्रवाई भी आगे बढ़ाई गई है। सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में कथित खामियों की जांच करना और भविष्य में परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी तरीके से आयोजित करना बताया गया है।

अभ्यर्थियों का क्या कहना है?

नियुक्त अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि परीक्षा में किसी भी तरह की कथित अनियमितता के लिए उन लोगों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी और सफल हुए।कई चयनित उम्मीदवारों ने सरकार से मांग की थी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। नियुक्ति रद्द होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता भी अपनाया। रिपोर्टों में ऐसे उम्मीदवारों की परेशानी का जिक्र है, जिनकी आर्थिक और पारिवारिक योजनाएं सरकारी नौकरी मिलने के बाद तय हो चुकी थीं। ऐसे में हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश उनके लिए तत्काल राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

CDPO अभ्यर्थियों को भी राहत

इस मामले में केवल JSSC-CGL ही नहीं, बल्कि CDPO यानी Child Development Project Officer परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियां भी शामिल हैं। सरकार द्वारा नियुक्तियां रद्द करने के आदेश में CDPO भर्ती भी प्रभावित हुई थी।हाई कोर्ट ने CDPO से संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के क्रियान्वयन पर भी रोक लगा दी है। इससे उन उम्मीदवारों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां सरकारी आदेश के कारण खतरे में आ गई थीं।

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क्या अब नौकरी पूरी तरह सुरक्षित हो गई है?

यहां अभ्यर्थियों को एक महत्वपूर्ण बात समझनी होगी। हाई कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने नियुक्तियों को स्थायी रूप से सही ठहरा दिया है या मामले का अंतिम फैसला सुना दिया है।अदालत आगे मामले की सुनवाई करेगी और सरकार तथा अन्य संबंधित पक्षों का जवाब भी देखा जाएगा। इसके बाद अदालत तथ्यों और कानूनी पहलुओं के आधार पर अंतिम निर्णय ले सकती है।इसलिए अभ्यर्थियों के लिए अभी सबसे जरूरी है कि वे अदालत की अगली सुनवाई और आधिकारिक आदेश पर नजर रखें।

सरकार की जांच भी रहेगी महत्वपूर्ण

एक तरफ अदालत में नियुक्तियों को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है, वहीं दूसरी तरफ भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्टों के मुताबिक JSSC-CGL पेपर लीक से जुड़े मामले में जांच का दायरा बढ़ाया गया है और SIT ने कई संदिग्धों से पूछताछ की है। आने वाले समय में जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में किस स्तर पर अनियमितता हुई थी और उसकी जिम्मेदारी किन लोगों की थी।

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अगली सुनवाई कब होगी?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होनी है। तब तक हाई कोर्ट की अंतरिम रोक लागू रहने से संबंधित नियुक्तियों पर तत्काल कार्रवाई का खतरा टल गया है। हालांकि, अंतिम फैसला आने तक मामले को लेकर कानूनी अनिश्चितता बनी रहेगी। JSSC CGL और CDPO नियुक्तियों को रद्द करने के झारखंड सरकार के आदेश पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक ने हजारों अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सरकार के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच भी आगे बढ़ रही है। ऐसे में अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला तत्काल राहत जरूर है, लेकिन नियुक्तियों का अंतिम भविष्य हाई कोर्ट के आगे के आदेश पर निर्भर करेगा

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