Indian Army: लद्दाख की बर्फीली चोटियों पर उतरेंगे भारतीय जवान, 18,000 फीट तक स्वदेशी पैराशूट की तैयारी
Indian Army, भारत ने हाई-एल्टीट्यूड डिफेंस क्षमता के क्षेत्र में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने पूर्वी लद्दाख के न्योमा स्थित मुध ड्रॉप जोन में स्वदेशी
Indian Army : सेना के लिए बड़ी उपलब्धि, 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्वदेशी पैराशूट का सफल लाइव जंप
Indian Army, भारत ने हाई-एल्टीट्यूड डिफेंस क्षमता के क्षेत्र में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने पूर्वी लद्दाख के न्योमा स्थित मुध ड्रॉप जोन में स्वदेशी Advanced High-Altitude Parachute यानी AHAP का पहला लाइव जंप परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह परीक्षण ऐसे इलाके में किया गया, जहां बेहद ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियां पैराशूट ऑपरेशन को काफी मुश्किल बनाती हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस स्वदेशी पैराशूट की ऑपरेशनल क्षमता 18,000 फीट तक की ऊंचाई के लिए विकसित की गई है।

16,000 फीट से जवान ने लगाई छलांग
DRDO के मुताबिक, AHAP का पहला लाइव जंप समुद्र तल से करीब 16,000 फीट की ऊंचाई से किया गया। इस दौरान पैराशूट को लगभग 15,500 फीट की ऊंचाई पर खोला गया और पैराट्रूपर ने करीब 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित न्योमा-मुध ड्रॉप जोन में सुरक्षित लैंडिंग की। इस परीक्षण का मकसद बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में पैराशूट सिस्टम की कार्यक्षमता और सैन्य इस्तेमाल की क्षमता को परखना था।यानी खबर में जिस 18,000 फीट की ऊंचाई की बात हो रही है, वह इस परीक्षण से हुई लैंडिंग की ऊंचाई नहीं बल्कि AHAP की अधिकतम ऑपरेशनल ऊंचाई है। पहला लाइव जंप 16,000 फीट से किया गया था। यह अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि परीक्षण के दौरान पैराशूट अलग ऊंचाई पर खोला गया और लैंडिंग ड्रॉप जोन की ऊंचाई पर हुई।
क्यों खास है लद्दाख में यह परीक्षण?
लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में पैराशूट से जवानों को उतारना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा का घनत्व कम हो जाता है और ऑक्सीजन का स्तर भी कम होता है। इसके अलावा पहाड़ी इलाकों में तेज हवाएं, ठंड और कठिन लैंडिंग क्षेत्र भी चुनौती बढ़ाते हैं।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इतनी अधिक ऊंचाई पर static-line parachute jump अपने आप में जटिल और जोखिम भरा होता है। पैराशूट खुलने के समय लगने वाला झटका और उतरने की दर दोनों महत्वपूर्ण चुनौतियां होती हैं। AHAP को इन परिस्थितियों में सुरक्षित और प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
क्या है Advanced High-Altitude Parachute?
AHAP एक static-line parachute system है, जिसे बड़ी संख्या में पैराट्रूपर्स को विमान से एक साथ उतारने के लिए डिजाइन किया गया है। Static-line प्रणाली में पैराशूट के खुलने की प्रक्रिया विमान से जुड़े सिस्टम के जरिए शुरू होती है। इसका इस्तेमाल सैन्य अभियानों में पैराट्रूपर्स की तैनाती के लिए किया जाता है।DRDO के अनुसार, AHAP में अलग-अलग deployment modes उपलब्ध हैं और इसका ऑपरेशनल altitude range 18,000 फीट तक है। सिस्टम की descent rate को भी भारतीय रक्षा बलों की हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
आगरा में डिजाइन, कानपुर में हुआ निर्माण
इस स्वदेशी पैराशूट सिस्टम के विकास में देश की कई रक्षा संस्थाओं ने भूमिका निभाई है। AHAP को DRDO की Aerial Delivery Research and Development Establishment यानी ADRDE, आगरा ने डिजाइन और विकसित किया है। इसके बाद इसका निर्माण Ordnance Parachute Factory यानी OPF, कानपुर ने किया।पैराशूट सिस्टम का निरीक्षण Directorate General of Aeronautical Quality Assurance यानी DGAQA द्वारा किया गया, जबकि इसे Centre for Military Airworthiness and Certification यानी CEMILAC, RCMA कानपुर से प्रमाणन मिला है। इससे सिस्टम के विकास से लेकर निर्माण, गुणवत्ता जांच और प्रमाणन तक देश में तैयार की गई पूरी स्वदेशी क्षमता सामने आती है।
हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन में मिलेगी नई क्षमता
इस परीक्षण की सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका संभावित सैन्य इस्तेमाल है। ऊंचाई वाले इलाकों में सैनिकों और पैराट्रूपर्स की तेजी से तैनाती किसी भी सैन्य ऑपरेशन के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। खासकर हिमालयी क्षेत्र जैसे कठिन भूभाग में सड़क या सामान्य जमीनी मार्ग से पहुंचना समय लेने वाला और कई बार चुनौतीपूर्ण होता है।ऐसे में एयरबोर्न माध्यम से जवानों की तैनाती के लिए भरोसेमंद पैराशूट सिस्टम एक महत्वपूर्ण क्षमता बन सकता है। हालांकि किसी भी सैन्य सिस्टम की वास्तविक तैनाती और व्यापक परिचालन इस्तेमाल कई चरणों के परीक्षण और मूल्यांकन पर निर्भर करता है। मौजूदा लाइव जंप ने AHAP की हाई-एल्टीट्यूड परिस्थितियों में उपयोगिता का एक अहम प्रदर्शन किया है।
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आत्मनिर्भर भारत के लिए भी अहम उपलब्धि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने AHAP के सफल पहले लाइव जंप पर DRDO, रक्षा बलों, रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और उद्योग से जुड़े लोगों को बधाई दी। उन्होंने इस स्वदेशी पैराशूट सिस्टम के सफल परीक्षण को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बताया।यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पैराशूट जैसी तकनीक सिर्फ कपड़े और रस्सियों का सिस्टम नहीं होती, बल्कि इसमें एयरोडायनामिक्स, सामग्री विज्ञान, सुरक्षा, विमान से तैनाती, लैंडिंग नियंत्रण और बेहद कठिन मौसम में विश्वसनीयता जैसे कई तकनीकी पहलू शामिल होते हैं।
पहले भी हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट क्षमता पर काम
भारत लगातार अलग-अलग तरह के सैन्य पैराशूट सिस्टम विकसित और परीक्षण कर रहा है। इससे पहले DRDO ने स्वदेशी Military Combat Parachute System यानी MCPS का भी उच्च ऊंचाई पर परीक्षण किया था। अगस्त 2026 में लद्दाख के न्योमा-मुध ड्रॉप जोन में करीब 22,000 फीट से सैन्य कॉम्बैट पैराशूट सिस्टम के परीक्षण की रिपोर्ट सामने आई थी।हालिया AHAP परीक्षण हालांकि एक अलग सिस्टम और उद्देश्य से जुड़ा है। इसका फोकस हाई-एल्टीट्यूड इलाके में static-line प्रणाली के जरिए पैराट्रूपर्स की तैनाती पर है।कुल मिलाकर, लद्दाख के न्योमा में 16,000 फीट से किया गया AHAP का पहला लाइव जंप भारत की स्वदेशी एयरबोर्न डिफेंस तकनीक के लिए अहम उपलब्धि है। सिस्टम की अधिकतम ऑपरेशनल क्षमता 18,000 फीट तक बताई गई है और सफल परीक्षण से बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में इसके संभावित सैन्य इस्तेमाल का रास्ता मजबूत हुआ है।
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