‘तुरंत इस्तीफा दें’, मनन मिश्रा के खिलाफ BCI को-चेयरमैन का बड़ा कदम
BCI, Bar Council of India (BCI) में नेतृत्व को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता YR सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है।
मनन मिश्रा की कुर्सी पर संकट? BCI को-चेयरमैन ने गिनाए इस्तीफे के 8 कारण
BCI, Bar Council of India (BCI) में नेतृत्व को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता YR सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। रेड्डी ने 22 अगस्त 2026 को मिश्रा को लिखे छह पन्नों के पत्र में कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि ‘बार इससे बेहतर की हकदार है।’ उन्होंने आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने और मिश्रा से पद छोड़ने की मांग की है।
रेड्डी ने क्यों मांगा मनन मिश्रा का इस्तीफा?
YR सदाशिव रेड्डी ने अपने पत्र में BCI के कामकाज और नेतृत्व को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन, नियुक्तियों में पारदर्शिता की कमी और NALSAR के छात्रों से जुड़े हालिया विवाद को इस्तीफे की मांग के प्रमुख आधारों में शामिल किया है।रेड्डी ने मिश्रा से कहा है कि वह तत्काल पद छोड़ें और किसी भी स्थिति में पत्र मिलने के 15 दिनों के भीतर इस्तीफा दें। साथ ही उन्होंने BCI की विशेष बैठक बुलाने की मांग भी की है, जिसमें इन आरोपों और परिषद के कामकाज पर चर्चा की जा सके।
₹150 करोड़ के फंड को लेकर लगाए आरोप
रेड्डी के पत्र में सबसे गंभीर आरोप BCI के कथित फंड ट्रांसफर को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब ₹150 करोड़ की परिषद की राशि को एक नए ट्रस्ट में ट्रांसफर किया गया।LiveLaw की रिपोर्ट के मुताबिक, रेड्डी ने ‘BCI Trust PEARL – First’ नाम के ट्रस्ट का जिक्र करते हुए दावा किया कि यह ट्रस्ट 17 सितंबर 2020 को बनाया गया था और इसके ट्रस्टी चेयरमैन द्वारा चुने गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक वैधानिक नियामक संस्था की राशि को उसके चेयरमैन से जुड़े निजी ट्रस्ट में ट्रांसफर करने का कानूनी आधार है। ये फिलहाल रेड्डी द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच की मांग खुद उन्होंने की है। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों का कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
लॉ कॉलेजों से ‘योगदान’ का भी आरोप
रेड्डी ने अपने पत्र में कुछ लॉ कॉलेजों से कथित तौर पर ट्रस्ट के लिए योगदान मांगे जाने का भी आरोप लगाया है। उनके अनुसार, BCI से मान्यता या नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजरने वाले कुछ कॉलेजों से कथित तौर पर ₹25 लाख से ₹1 करोड़ तक के योगदान की मांग की गई।रेड्डी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि मान्यता देने और नवीनीकरण की शक्ति एक नियामक अधिकार है और इसे धन जुटाने के साधन के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
नियुक्तियों में परिवारवाद का आरोप
BCI को-चेयरमैन ने परिषद में नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परिषद के स्टाफ में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका मनन मिश्रा से व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंध है।रेड्डी का दावा है कि इन नियुक्तियों के लिए विज्ञापन, चयन समिति या मेरिट लिस्ट जैसे पारदर्शी रिकॉर्ड परिषद के सामने नहीं रखे गए। हालांकि, इन आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।
NALSAR विवाद बना बड़ा मुद्दा
मनन मिश्रा के खिलाफ बढ़ते विरोध की सबसे हालिया वजह NALSAR University of Law से जुड़ा विवाद है। 13 अगस्त 2026 को BCI चेयरमैन के कार्यालय से एक निर्देश जारी हुआ था, जिसमें राज्य बार काउंसिलों से NALSAR के 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के नामांकन को लेकर रोक लगाने को कहा गया था।यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब NALSAR के कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। BCI का निर्देश सामने आने के बाद कानूनी समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया हुई और इसे बाद में वापस ले लिया गया।
आदेश वापस लेने के बाद मांगी थी माफी
विवाद बढ़ने के बाद मनन कुमार मिश्रा ने NALSAR के छात्रों से माफी भी मांगी थी। स्वतंत्रता दिवस के संदेश में उन्होंने कहा था कि यदि उनके शब्दों या पत्र से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है।उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध और संवाद के अधिकार की भी बात कही। इसके बावजूद कानूनी बिरादरी के एक वर्ग की ओर से उनके इस्तीफे की मांग जारी रही।
CJI सूर्यकांत ने भी जताई थी आपत्ति
NALSAR विवाद के दौरान CJI सूर्यकांत की टिप्पणी ने भी मामले को और गंभीर बना दिया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने BCI के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए कहा था कि छात्रों और उनके बीच होने वाले संवाद में BCI को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।इसके बाद इस मामले को लेकर बार संगठनों और वकीलों के बीच बहस और तेज हो गई। कुछ वकील समूहों ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी।
वकीलों के प्रदर्शन से बढ़ा दबाव
20 अगस्त को दिल्ली में BCI कार्यालय के बाहर वकीलों ने प्रदर्शन कर मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग की थी। प्रदर्शन में NALSAR मामले को लेकर जवाबदेही और BCI के कामकाज में सुधार की मांग उठाई गई।इससे पहले भी कई वकील संगठनों ने मिश्रा के खिलाफ आवाज उठाई थी। तीन वकील संगठनों ने NALSAR विवाद के बाद उनके इस्तीफे की मांग की थी और कहा था कि यदि वह पद नहीं छोड़ते तो BCI के सदस्य उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जैसे विकल्प पर विचार करें।
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मनन मिश्रा ने इस्तीफा देने से किया इनकार
इन बढ़ते दबाव के बीच मनन कुमार मिश्रा ने इस्तीफा देने से इनकार किया है। उन्होंने अपने पद को चुनावी प्रक्रिया से मिला हुआ बताया और कहा कि वह देशभर के लाखों वकीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। मिश्रा ने सोशल मीडिया पर चल रही आलोचनाओं के आधार पर BCI चेयरमैन का इस्तीफा मांगने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी संवैधानिक या वैधानिक संस्था के प्रमुख को हटाने की मांग उचित नहीं है।
रेड्डी ने स्वतंत्र ऑडिट की मांग की
YR सदाशिव रेड्डी ने केवल इस्तीफे की मांग तक खुद को सीमित नहीं रखा है। उन्होंने BCI और संबंधित ट्रस्ट के खातों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की है।रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने CAG के पैनल में शामिल किसी स्वतंत्र फर्म से विशेष ऑडिट कराने और लॉ कॉलेजों से कथित योगदान की मांग को रोकने की मांग की है। इसके अलावा इन मुद्दों पर चर्चा के लिए BCI की विशेष बैठक बुलाने की मांग भी की गई है।
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BCI में नेतृत्व संकट के संकेत?
BCI देश में वकीलों और कानूनी शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियामकीय मामलों में भूमिका निभाता है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच सार्वजनिक मतभेद संस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करते हैं।एक तरफ मनन मिश्रा इस्तीफा देने से इनकार कर रहे हैं, वहीं को-चेयरमैन रेड्डी स्वतंत्र जांच और उनके पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा अलग-अलग वकील संगठन भी अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुके हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर BCI की आगामी बैठकों और इस पूरे विवाद पर होने वाली संभावित जांच पर है। यदि रेड्डी की मांग के अनुसार विशेष बैठक होती है तो वित्तीय आरोपों, नियुक्तियों और NALSAR मामले पर परिषद के भीतर चर्चा हो सकती है।फिलहाल मनन मिश्रा ने पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, YR सदाशिव रेड्डी ने आरोपों की स्वतंत्र जांच के साथ अपने इस्तीफे की मांग दोहराई है। ऐसे में BCI का यह आंतरिक विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।
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