2 women in race for un chief: महासचिव पद की दौड़ में 2 महिलाएं, संयुक्त राष्ट्र में नई शुरुआत के संकेत
2 women in race for un chief, संयुक्त राष्ट्र (UN) के अगले महासचिव के चुनाव को लेकर इस बार वैश्विक स्तर पर खास उत्साह और उम्मीद देखने को मिल रही है।
2 women in race for un chief : 80 साल बाद UN में महिला नेतृत्व की उम्मीद, महासचिव पद पर कड़ा मुकाबला
2 women in race for un chief, संयुक्त राष्ट्र (UN) के अगले महासचिव के चुनाव को लेकर इस बार वैश्विक स्तर पर खास उत्साह और उम्मीद देखने को मिल रही है। वजह साफ है 80 वर्षों के इतिहास में पहली बार महिला नेतृत्व को शीर्ष पद तक पहुंचाने की मांग तेज हो गई है। इस बार महासचिव पद की दौड़ में कुल चार उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें दो प्रमुख महिला नेता भी शामिल हैं।यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु संकट, आर्थिक असमानता और युद्ध जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में नेतृत्व की दिशा और दृष्टि को लेकर सदस्य देशों के बीच गंभीर मंथन चल रहा है।
वर्तमान महासचिव का कार्यकाल कब तक?
संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव António Guterres दिसंबर 2026 में अपना दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने 2017 में यह पद संभाला था। गुतारेस इससे पहले पुर्तगाल के प्रधानमंत्री और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त भी रह चुके हैं।उनके कार्यकाल में कोविड-19 महामारी, यूक्रेन युद्ध, जलवायु परिवर्तन और पश्चिम एशिया में तनाव जैसी बड़ी वैश्विक चुनौतियां सामने आईं। अब दुनिया की निगाहें उनके उत्तराधिकारी पर टिकी हैं।
कौन-कौन हैं दावेदार?
इस बार महासचिव पद के लिए चार प्रमुख नाम सामने आए हैं:
- Michelle Bachelet – चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त रह चुकीं।
- Rebeca Grynspan – कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति और व्यापार एवं विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) की महासचिव।
- Rafael Grossi – अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख।
- Macky Sall – सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति।
इनमें बैचेलेट को ब्राजील और मैक्सिको, ग्रिन्स्पैन को कोस्टा रिका, ग्रोसी को अर्जेंटीना और सॉल को बुरुंडी ने नामित किया है। महिला उम्मीदवारों की मौजूदगी ने इस चुनाव को ऐतिहासिक मोड़ दे दिया है।
चुनाव प्रक्रिया कैसे होगी?
महासचिव की नियुक्ति 193 सदस्यीय महासभा द्वारा की जाती है, लेकिन इसके लिए पहले सुरक्षा परिषद की सिफारिश जरूरी होती है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के पास वीटो शक्ति होती है।21 और 22 अप्रैल को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सभी उम्मीदवारों के लिए तीन-तीन घंटे के संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में उम्मीदवार सदस्य देशों के सवालों का जवाब देंगे और अपनी प्राथमिकताओं को साझा करेंगे।महासभा की अध्यक्ष Annalena Baerbock ने जानकारी दी है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता और खुली चर्चा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।
महिला नेतृत्व की मांग क्यों तेज?
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में हुई थी, लेकिन अब तक इस संगठन के शीर्ष पद पर कोई महिला नहीं पहुंची है। पिछले वर्ष सितंबर में पारित एक प्रस्ताव में इस बात पर खेद जताया गया कि अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी। सदस्य देशों से महिलाओं को नामित करने का आग्रह भी किया गया।कई वैश्विक अभियान जैसे “Women SG” और “1 for 8 Billion”लगातार यह मांग कर रहे हैं कि महासचिव पद पर महिला का चयन केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं होगा, बल्कि यह संगठन की विश्वसनीयता और समावेशिता को मजबूत करेगा।समर्थकों का तर्क है कि जब संयुक्त राष्ट्र लैंगिक समानता की वकालत करता है, तो उसके शीर्ष नेतृत्व में भी यह झलकना चाहिए।
Read More: Top 10 bhojpuri sexy actress: भोजपुरी की हॉट डीवाज़, स्टाइल और अदा में बॉलीवुड को देती हैं टक्कर
वैश्विक राजनीति और संभावित चुनौतियां
महासचिव का पद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नैतिक और कूटनीतिक नेतृत्व का भी प्रतीक होता है। सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की सहमति अहम भूमिका निभाती है। यदि किसी उम्मीदवार पर वीटो लग जाता है, तो उसका चयन रुक सकता है।इसलिए उम्मीदवारों को न केवल महासभा का समर्थन चाहिए, बल्कि बड़े शक्तिशाली देशों का भरोसा भी जीतना होगा।
Read More: Ramayana Teaser: भव्य सेट, शानदार VFX और Ranbir Kapoor का दमदार अंदाज़
क्या इतिहास बदलेगा?
दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज समूहों का मानना है कि यह समय परिवर्तन का है। यदि इस बार किसी महिला को महासचिव चुना जाता है, तो यह संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण होगा।हालांकि अंतिम फैसला सदस्य देशों की राजनीतिक प्राथमिकताओं और कूटनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव का चुनाव केवल एक पद भरने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा तय करने वाला फैसला है। दो महिला उम्मीदवारों की मजबूत दावेदारी ने उम्मीदें बढ़ा दी हैं कि इस बार इतिहास रचा जा सकता है।दिसंबर 2026 में मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने से पहले यह तय हो जाएगा कि क्या संयुक्त राष्ट्र को पहली महिला महासचिव मिलेगी या फिर परंपरा बरकरार रहेगी। दुनिया की नजरें अब इस ऐतिहासिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।
We’re now on WhatsApp. Click to join.
अगर आपके पास भी हैं कुछ नई स्टोरीज या विचार, तो आप हमें इस ई-मेल पर भेज सकते हैं info@oneworldnews.com







