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लॉकडाउन 3.0 में छूट मिलने के बाद शराब की दुकानो के बाहर भारी भीड़, Social Distancing की उड़ी धज्जियां

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आज से भारत में लॉकडाउन 3.0 शुरू हुआ है जो 17 मई को खत्म होगा। लॉकडाउन 3.0 शुरू होने के साथ ही शराब कारोबार को भी खोल दिया गया है।  इसको लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। इंडस्ट्री तो काफी समय से शराब की बिक्री खोलने के लिए भारी दबाव बना ही रही थी। हरियाणा जैसी कई राज्य सरकारें भी इसकी मांग कर रही थी। आज लॉकडाउन 3.0 शुरू होने के साथ  दिल्ली में शराब की दुकाने खुली तो लोगों की भारी सख्या में शराब की दुकानों के बहार नजर आये। धीरे-धीरे ये भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोगों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग खतम हो गयी और अफरातफरी का माहौल हो गया। कई जगहों पर स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को लाठी चार्ज कर दुकान बंद करवाना पड़ा। लॉकडाउन के दौरान केंद्र सरकार ने घरों में बंद जनता को कई प्रकार की राहत दी। परन्तु आज शराब की दुकानें खोलने से राज्य सरकार को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सकेगी।

किनको मिली शराब की दुकान खोलने की अनुमति

आज से पुरे भारत में लॉकडाउन 3.0 शुरू हुआ है इसके साथ ही दिल्ली में शराब की दुकाने खोलने की अनुमति भी मिल गई है आज से दिल्ली में 123 दुकानों पर शराब की बिक्री शुरू हो गई। दिल्ली में सिर्फ दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम, दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम, दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड और दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक स्टोर को शराब की दुकानें सार्वजनिक स्थानों पर खोलने का अधिकार मिला है।

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कैसे होती है शराब से राज्यों की कमाई

राज्यों की कमाई के मुख्य स्रोत है जीएसटी, भू-राजस्व, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला सेल्स टैक्स, शराब पर लगने वाला एक्साइज और गाड़ियों आदि पर लगने वाला टैक्स। शराब और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है। इसलिए राज्य इन पर भारी टैक्स लगाकर अपना राजस्व बढ़ाते है। अभी हाल ही में राजस्थान सरकार ने शराब पर एक्साइज टैक्स 10 फीसदी बढ़ा दिया। राज्य में अब देश में निर्मित विदेशी शराब पर टैक्स 35 से 45 फीसदी तक हो गया है।

कितनी होती है राज्यों की शराब से कमाई

राज्यों के कुल राजस्व का 15 से 30 फीसदी हिस्सा शराब से आता है। शराब की बिक्री से यूपी और उत्तराखंड में कुल टैक्स राजस्व का करीब 20 फीसदी हिस्सा मिलता है। सभी राज्यों की बात करे तो पिछले वर्ष में उन्होंने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की कमाई यानी टैक्स राजस्व शराब बिक्री से हासिल की थी। शराब की बिक्री से वित्त वर्ष 2019-20 में उत्तर प्रदेश ने 26,000 करोड़ जबकि दिल्ली में 5,500 करोड़ रुपये का आबकारी शुल्क हासिल किया।

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