Abhijeet Dipke: दिल्ली में CJP के तिरंगा मार्च से पहले क्या होगा? अभिजीत दीपके ने जताई गिरफ्तारी की आशंका
Abhijeet Dipke, दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस उन्हें कभी भी हिरासत में ले सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी उनके ठहरने की जगह पर नजर रख रहे हैं

Abhijeet Dipke, दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस उन्हें कभी भी हिरासत में ले सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी उनके ठहरने की जगह पर नजर रख रहे हैं और बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं। 16 अक्टूबर 2026 को होने वाले मार्च से पहले दीपके के इन बयानों ने राजधानी में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, उनकी ओर से लगाए गए निगरानी के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।दीपके ने गुरुवार देर रात आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके आसपास पुलिस और खुफिया विभाग के लोग मौजूद हैं। उन्हें आशंका है कि गुरुवार रात या शुक्रवार सुबह उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह ऐसी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और तिरंगा मार्च के अपने आह्वान पर कायम हैं।
‘बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां मेरा पीछा कर रही हैं’
अभिजीत दीपके के मुताबिक, जब भी वह बाहर निकलते हैं, कुछ गाड़ियां उनके पीछे चलती दिखाई देती हैं। उन्होंने दावा किया कि इन वाहनों पर नंबर प्लेट नहीं होती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके ठहरने की जगह के आसपास पुलिस और IB के लोग घूम रहे हैं तथा वहां के चौकीदार से जानकारी ले रहे हैं।दीपके ने कहा कि उन्हें लगता है कि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसी आधार पर उन्होंने गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने की आशंका जताई। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इन विशिष्ट आरोपों की पुष्टि भी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है। इसलिए इन दावों को फिलहाल दीपके के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
‘तिरंगा लहराने के लिए जेल जाना पड़े तो तैयार हूं’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP संस्थापक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी अपने कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने दावा किया कि अगर देश में तिरंगा लहराने के लिए जेल जाना पड़े, तो वह इसके लिए भी तैयार हैं।दीपके का कहना है कि उनकी पार्टी का उद्देश्य राष्ट्रीय ध्वज फहराने के जरिए अपनी बात रखना है। उन्होंने सवाल उठाया कि सार्वजनिक स्थान पर तिरंगा फहराने के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर इतनी पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करने के अवसर मिलने चाहिए।हालांकि, किसी सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए लागू नियमों, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों का पालन करना भी जरूरी होता है। किसी कार्यक्रम की अनुमति और उस पर लगाई गई पाबंदियों का आकलन संबंधित आदेशों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में तिरंगा मार्च का ऐलान
CJP ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लेहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित करने का ऐलान किया था। पार्टी की ओर से लोगों से तिरंगा लेकर कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की गई। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है और कनॉट प्लेस तथा आसपास के इलाकों में सार्वजनिक जमावड़े को लेकर प्रतिबंध लागू किए गए हैं।नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने की जानकारी दी। प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच पुलिस ने लोगों से क्षेत्र में अनावश्यक रूप से इकट्ठा न होने की अपील भी की। पुलिस ने यह भी कहा था कि निर्धारित स्थान और शर्तों के तहत छोटे समूह को तिरंगा फहराने की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। इस घटनाक्रम के बीच सवाल यह है कि CJP का प्रस्तावित कार्यक्रम किस रूप में आगे बढ़ेगा और प्रशासन इसकी व्यवस्था कैसे करेगा। मार्च के आयोजन, संभावित भीड़ और आसपास के बाजारों में यातायात को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है।
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CJP के दो नेताओं को हिरासत में लेने पर भी जताई नाराजगी
अभिजीत दीपके के बयान के पीछे एक और अहम घटनाक्रम है। CJP के नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास को पहले जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने और नारेबाजी से जुड़े घटनाक्रम के बाद हिरासत में लिया गया था। बाद में दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई। पार्टी ने इस कार्रवाई का विरोध किया और इसे अपने आंदोलन को रोकने की कोशिश बताया। CJP का कहना है कि उसके नेताओं के खिलाफ कार्रवाई और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर लगाई जा रही पाबंदियों को लेकर सवाल उठने चाहिए। दूसरी ओर, किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और लागू प्रतिबंधों का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इस पूरे मामले में पार्टी के आरोपों और प्रशासन की कार्रवाई को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर समझना जरूरी है।
CJP का आंदोलन किन मुद्दों से जुड़ा है?
कॉकरोच जनता पार्टी और उससे जुड़े प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी आंदोलन कर रहे हैं। विवाद का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में नामों के हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।विपक्षी समूहों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े दावों और आपत्तियों को आधिकारिक आंकड़ों तथा संबंधित प्रक्रियाओं के आधार पर देखना जरूरी है।CJP का तिरंगा मार्च इसी व्यापक आंदोलन के बीच आयोजित किया जा रहा है। पार्टी इसे अपनी मांगों को सामने रखने का माध्यम बता रही है, जबकि प्रशासन की प्राथमिकता कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
अब आगे क्या होगा?
16 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च से पहले अभिजीत दीपके ने अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए स्पष्ट किया कि वह पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनके निगरानी संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि IB या दिल्ली पुलिस निश्चित रूप से उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है।अब इस मामले में प्रशासन के अगले कदम, कार्यक्रम की अनुमति से जुड़ी शर्तें और CJP की आगे की रणनीति महत्वपूर्ण होंगी। साथ ही, कनॉट प्लेस में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी नजर रहेगी।फिलहाल, अभिजीत दीपके के बयान ने CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन कार्यक्रम को लेकर क्या व्यवस्था करता है और पार्टी अपने आंदोलन को किस तरह आगे बढ़ाती है।
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