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Tamil Nadu: छात्रों की पढ़ाई से सरकारी कामकाज तक, PM मोदी को तेजस सुदर्शन ने क्या सुझाया?

Tamil Nadu, कभी-कभी किसी इंसान को अपनी बात रखने के लिए बहुत ज्यादा समय की जरूरत नहीं होती। अगर विचार स्पष्ट हों और समस्या की सही समझ हो, तो कुछ मिनट भी बड़ा मौका बन सकते हैं। ऐसा ही एक मौका चेन्नई के स्टार्टअप फाउंडर तेजस पार्थसारथी सुदर्शन को मिला, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सिर्फ 90 सेकेंड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े दो विचार पेश किए।

Tamil Nadu : 17 स्टार्टअप फाउंडर्स में शामिल तेजस सुदर्शन क्यों आए चर्चा में? PM मोदी के सामने रखे 2 AI आइडिया

Tamil Nadu, कभी-कभी किसी इंसान को अपनी बात रखने के लिए बहुत ज्यादा समय की जरूरत नहीं होती। अगर विचार स्पष्ट हों और समस्या की सही समझ हो, तो कुछ मिनट भी बड़ा मौका बन सकते हैं। ऐसा ही एक मौका चेन्नई के स्टार्टअप फाउंडर तेजस पार्थसारथी सुदर्शन को मिला, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने सिर्फ 90 सेकेंड में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े दो विचार पेश किए। 11 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री के चेन्नई दौरे के दौरान मेट्रो में हुई इस बातचीत ने तेजस को चर्चा में ला दिया। उन्होंने ऐसे सुझाव दिए, जिनका मकसद छात्रों को AI का व्यावहारिक ज्ञान देना और आम लोगों के लिए सरकारी सेवाओं को आसान बनाना है।

कौन हैं तेजस पार्थसारथी सुदर्शन?

तेजस पार्थसारथी सुदर्शन एक भारतीय उद्यमी और Winsen Labs के संस्थापक हैं। उनकी कंपनी का काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए इस्तेमाल करने पर केंद्रित है। यानी उनका जोर केवल AI तकनीक विकसित करने पर नहीं, बल्कि यह समझने पर भी है कि इस तकनीक से कारोबार, प्रशासन और आम लोगों की जिंदगी में किस तरह सुधार लाया जा सकता है।तेजस का पेशेवर सफर भी दिलचस्प रहा है। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से बिजनेस और कॉमर्स की पढ़ाई की। इसके अलावा, उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी की योग्यता भी हासिल की और KPMG India में काम किया। बाद में उन्होंने Fanpit नाम का एक इवेंट्स और कम्युनिटी प्लेटफॉर्म भी शुरू किया। इसके बाद उनका काम AI आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा। तेजस की कहानी की खास बात यह है कि तकनीक और शिक्षा में उनकी दिलचस्पी कोई नई नहीं है। साल 2017 में, जब वह अपने स्कूल में छात्र प्रतिनिधि के चुनाव में हिस्सा ले रहे थे, तब उन्होंने पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए Google Classroom के इस्तेमाल का सुझाव दिया था। करीब नौ साल बाद, वही तेजस प्रधानमंत्री के सामने यह विचार रख रहे थे कि भारत के छात्र AI का इस्तेमाल करके असली समस्याओं को कैसे हल कर सकते हैं।

चेन्नई मेट्रो में कैसे मिला PM मोदी से बात करने का मौका?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेन्नई दौरे के दौरान 17 स्टार्टअप फाउंडर्स को उनसे बातचीत करने का अवसर मिला था। इस दौरान उद्यमियों को अपने काम और देश की समस्याओं के संभावित तकनीकी समाधानों के बारे में बताने का मौका दिया गया। तेजस भी इन चुनिंदा संस्थापकों में शामिल थे।मेट्रो यात्रा के दौरान तेजस को लगा कि शायद उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाएगा। लेकिन बातचीत आगे बढ़ी और उन्हें प्रधानमंत्री के सामने अपने विचार रखने के लिए लगभग 90 सेकेंड मिले। इतने कम समय में उन्होंने दो प्रस्ताव पेश किए, जिनमें शिक्षा और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए AI के इस्तेमाल पर जोर दिया गया था। उनके सुझाव केवल तकनीक के इस्तेमाल तक सीमित नहीं थे। दोनों विचारों का मुख्य उद्देश्य यह था कि AI से लोगों की वास्तविक समस्याएं हल हों और नई पीढ़ी को ऐसी तकनीकी समझ मिले, जिसका इस्तेमाल वह अपने काम में कर सके।

पहला आइडिया: छात्रों को असली समस्याओं पर AI के इस्तेमाल का मौका

तेजस का पहला प्रस्ताव शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा था। उनका मानना है कि छात्रों को केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें वास्तविक समस्याओं पर काम करने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए सरकारी विभागों और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाया जा सकता है।इस मॉडल में सरकारी विभाग अपनी वास्तविक समस्याएं छात्रों के सामने रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी विभाग को आंकड़ों को व्यवस्थित करने, जानकारी जल्दी उपलब्ध कराने या किसी सार्वजनिक सेवा की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में परेशानी हो सकती है। विश्वविद्यालयों के छात्र AI टूल्स की मदद से इन समस्याओं के संभावित समाधान तैयार कर सकते हैं।इससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। वे समझ सकेंगे कि AI का इस्तेमाल केवल सवालों के जवाब पाने या कंटेंट बनाने के लिए नहीं, बल्कि जटिल समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने के लिए भी किया जा सकता है।दूसरी ओर, सरकारी विभागों को भी युवाओं के नए विचारों और तकनीकी कौशल का लाभ मिल सकता है। हालांकि, इस तरह की व्यवस्था को लागू करने के लिए विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल, सही मार्गदर्शन और परियोजनाओं की निगरानी जरूरी होगी। यह तेजस का प्रस्ताव है, किसी घोषित सरकारी योजना का हिस्सा नहीं।

दूसरा आइडिया: AI से आसान होंगी सरकारी सेवाएं?

तेजस का दूसरा सुझाव आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को आसान बनाने से जुड़ा था। अक्सर लोगों को किसी प्रमाणपत्र, आवेदन या दूसरी सरकारी सुविधा के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार उन्हें यह भी पता नहीं होता कि उनकी समस्या का समाधान किस विभाग के पास होगा या आवेदन की स्थिति क्या है।तेजस ने इसके लिए एक ऐसी एकीकृत AI सर्विस डेस्क का विचार रखा, जहां नागरिक अपनी समस्या बता सकें और जरूरी दस्तावेज एक ही बार जमा कर सकें। इसके बाद AI एजेंट उनकी शिकायत या आवेदन को संबंधित विभाग तक पहुंचाने और उसकी स्थिति पर नजर रखने में मदद कर सकता है।उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति को सरकारी प्रमाणपत्र बनवाना है या किसी विभाग में शिकायत दर्ज करनी है। प्रस्तावित व्यवस्था में उसे अलग-अलग वेबसाइटों और कार्यालयों पर जाने के बजाय एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन करने की सुविधा मिल सकती है। AI सिस्टम यह पहचानने में मदद करेगा कि आवेदन किस विभाग से संबंधित है और उसे आगे कहां भेजना है।इस तरह की व्यवस्था लागू होने पर नागरिकों का समय बच सकता है और आवेदन की प्रक्रिया को समझना आसान हो सकता है। हालांकि, इसके लिए व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, गलत फैसलों को सुधारने और जरूरत पड़ने पर अधिकारियों के हस्तक्षेप की व्यवस्था भी जरूरी होगी। फिलहाल यह तेजस का सुझाव है, सरकार की ओर से घोषित या लागू की गई योजना नहीं।

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AI स्टार्टअप Winsen Labs क्या करता है?

तेजस की कंपनी Winsen Labs का मुख्य फोकस Applied AI यानी व्यावहारिक समस्याओं को हल करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना है। इस क्षेत्र में AI को केवल एक नई तकनीक के रूप में देखने के बजाय उसे कारोबार और रोजमर्रा के कामों में उपयोगी बनाने पर जोर दिया जाता है।आज वित्तीय सेवाओं, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ रही हैं। कंपनियां इस तकनीक की मदद से जानकारी का विश्लेषण करने, काम की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और कुछ दोहराए जाने वाले कार्यों को आसान करने की कोशिश कर रही हैं।तेजस का अनुभव कॉमर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और तकनीकी उद्यमिता से जुड़ा है। KPMG India में काम करने और Fanpit जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने के बाद उन्होंने AI आधारित समाधान विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया। उनका प्रधानमंत्री के सामने रखा गया प्रस्ताव भी इसी सोच से जुड़ा है कि तकनीक का इस्तेमाल वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए होना चाहिए।

स्कूल के विचार से प्रधानमंत्री तक का सफर

तेजस की यात्रा का एक दिलचस्प पहलू उनका 2017 का स्कूल वाला अनुभव है। छात्र प्रतिनिधि के चुनाव के दौरान उन्होंने पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए Google Classroom का सुझाव दिया था। उस समय उनका विचार शिक्षा में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से जुड़ा था।करीब नौ साल बाद, अक्टूबर 2026 में, उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने छात्रों को AI के जरिए व्यावहारिक समस्याएं हल करने का अवसर देने का प्रस्ताव रखा। दोनों घटनाओं के बीच एक समानता दिखाई देती है—शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल।यह सफर बताता है कि तकनीक में रुचि केवल कोडिंग या सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। समस्याओं को पहचानना, उनके समाधान पर विचार करना और अपने सुझाव को स्पष्ट रूप से पेश करना भी उद्यमिता का अहम हिस्सा है।

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चेन्नई मेट्रो यात्रा भी रही चर्चा में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेन्नई दौरा केवल स्टार्टअप फाउंडर्स से मुलाकात तक सीमित नहीं था। 11 अक्टूबर को उन्होंने चेन्नई मेट्रो के फेज-2 के पूनामल्ली बाईपास से वडापलानी तक के लगभग 15 किलोमीटर लंबे हिस्से का उद्घाटन भी किया। इस हिस्से में 11 एलिवेटेड स्टेशन शामिल हैं और इसके निर्माण पर लगभग 4,900 करोड़ रुपये खर्च हुए। यात्रा के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी मौजूद थे। इसी यात्रा में स्टार्टअप फाउंडर्स को अपने विचार रखने का अवसर मिला। तेजस के लिए यह मौका खास रहा, क्योंकि उन्होंने बहुत कम समय में दो अलग-अलग क्षेत्रों—शिक्षा और सरकारी सेवाओं—में AI के संभावित इस्तेमाल को समझाने की कोशिश की।

क्या तेजस के सुझावों से बदलेगा भारत का भविष्य?

AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसका वास्तविक फायदा तभी मिलेगा जब तकनीक आम लोगों की समस्याओं को हल करने में मदद करेगी। शिक्षा में AI का व्यावहारिक इस्तेमाल छात्रों को नए कौशल सिखा सकता है, जबकि सरकारी सेवाओं में इसका सही उपयोग आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद कर सकता है।हालांकि, ऐसे विचारों को वास्तविक व्यवस्था में बदलने के लिए केवल तकनीक पर्याप्त नहीं है। सरकारी विभागों और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग, डेटा सुरक्षा, जवाबदेही, सही जानकारी और मानव निगरानी जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा।तेजस सुदर्शन ने चेन्नई मेट्रो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने दो विचार रखे हैं। अब इन सुझावों को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, यह संबंधित संस्थानों और सरकार के फैसलों पर निर्भर करेगा। फिलहाल उनकी चर्चा का मुख्य कारण यही है कि उन्होंने AI को केवल भविष्य की तकनीक के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा और सरकारी सेवाओं से जुड़ी वास्तविक समस्याओं के समाधान के संभावित माध्यम के रूप में पेश किया।

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