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Delhi High Court: ‘Energy Drink’ लिखकर नए प्रॉडक्ट्स नहीं बना सकेगी PepsiCo? दिल्ली HC में क्या हुआ

Delhi High Court, दिल्ली हाई कोर्ट ने PepsiCo को ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल के साथ नए प्रॉडक्ट्स बनाने की अनुमति देने के मामले में फिलहाल तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला कंपनी के Sting Energy और Adrenaline Rush जैसे पेय पदार्थों पर ‘Energy Drink’ लिखने से जुड़ा है।

Delhi High Court : दिल्ली हाई कोर्ट में PepsiCo को राहत नहीं, ‘Energy Drink’ लेबल विवाद फिर चर्चा में

Delhi High Court, दिल्ली हाई कोर्ट ने PepsiCo को ‘एनर्जी ड्रिंक’ लेबल के साथ नए प्रॉडक्ट्स बनाने की अनुमति देने के मामले में फिलहाल तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला कंपनी के Sting Energy और Adrenaline Rush जैसे पेय पदार्थों पर ‘Energy Drink’ लिखने से जुड़ा है। अदालत ने इस मामले में पहले दिए गए आदेश पर सवाल उठाते हुए संबंधित एकल न्यायाधीश की पीठ से एक सप्ताह के भीतर स्पष्ट कारण दर्ज करने को कहा है। फिलहाल कंपनी को पहले से तैयार स्टॉक बेचने की अनुमति है, लेकिन नए बैच पर यही लेबल लगाकर उत्पादन करने की छूट नहीं मिली है।

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क्या है पूरा मामला?

यह विवाद खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के उस निर्देश से शुरू हुआ, जिसमें कुछ पेय पदार्थों पर ‘Energy Drink’ शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई थी। नियामक ने 30 जून 2026 को PepsiCo सहित संबंधित कंपनियों को अपने उत्पादों से इस विवरण को हटाने के निर्देश दिए थे। इसके पीछे आशंका थी कि इस तरह का लेबल उपभोक्ताओं के लिए गलतफहमी पैदा कर सकता है और उत्पाद की श्रेणी को लेकर भ्रम की स्थिति बन सकती है।PepsiCo ने इन निर्देशों को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। कंपनी का कहना था कि संबंधित उत्पादों को पहले से निर्धारित खाद्य श्रेणियों के तहत लाइसेंस मिला हुआ है और ‘Energy Drink’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर पहले नियामक की ओर से स्पष्टीकरण भी दिया गया था। कंपनी ने यह भी दलील दी कि उसके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसे कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी नहीं मिला।

6 अक्टूबर को एकल न्यायाधीश ने क्या आदेश दिया था?

6 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश ने PepsiCo को अंतरिम राहत देते हुए FSSAI के संबंधित निर्देशों पर रोक लगाई थी। अदालत ने कंपनी को पहले से तैयार उन उत्पादों का स्टॉक बेचने की अनुमति दी थी, जिन पर ‘Energy Drink’ का लेबल लगा हुआ था। हालांकि, इस राहत के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई।आदेश में स्पष्ट किया गया कि पहले से तैयार स्टॉक बेचने की अनुमति का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी या उसके बॉटलिंग पार्टनर नए उत्पादों का निर्माण भी उसी लेबल के साथ कर सकते हैं। यानी पुराने स्टॉक की बिक्री जारी रह सकती है, लेकिन नए बैच के उत्पादन पर ‘Energy Drink’ विवरण के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी गई। इसी हिस्से को लेकर कंपनी ने दोबारा अदालत का रुख किया।

PepsiCo ने हाई कोर्ट में क्या दलील दी?

PepsiCo की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि कंपनी को पुराने स्टॉक की बिक्री की अनुमति तो मिल गई है, लेकिन नए बैच बनाने के मामले में राहत नहीं दी गई। कंपनी ने यह भी दलील दी कि इसी तरह के एक अन्य मामले में दूसरी कंपनी को समान प्रकार की राहत मिली थी। ऐसे में PepsiCo ने अपने मामले में भी नए उत्पादों के निर्माण पर लगी रोक पर विचार करने की मांग की।कंपनी का पक्ष था कि जब मौजूदा स्टॉक की बिक्री की अनुमति दी गई है, तो नए उत्पादन के मामले में अलग प्रतिबंध लगाने के पीछे स्पष्ट कारण होना चाहिए। हालांकि, इस दलील पर अंतिम फैसला देने से पहले अदालत ने संबंधित एकल न्यायाधीश के आदेश में दर्ज कारणों को स्पष्ट करने की जरूरत बताई।

डिवीजन बेंच ने क्या कहा?

12 अक्टूबर को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की डिवीजन बेंच ने PepsiCo की अपील पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि 6 अक्टूबर के आदेश में नए उत्पादों पर ‘Energy Drink’ लेबल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देने के पीछे विशिष्ट कारण दर्ज नहीं किए गए थे।अदालत ने संबंधित एकल न्यायाधीश की पीठ को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर अपने आदेश के उस हिस्से के कारण स्पष्ट करे, जिसमें नए बैच बनाने पर रोक लगाई गई थी। इससे डिवीजन बेंच को आगे मामले पर विचार करने में मदद मिलेगी।हालांकि, अदालत ने इस चरण पर विवाद के मूल मुद्दे पर अंतिम राय देने से परहेज किया। पीठ ने यह भी ध्यान दिलाया कि एकल न्यायाधीश के सामने अंतरिम राहत की पुष्टि से जुड़ा अनुरोध अभी लंबित है। इसलिए फिलहाल PepsiCo को नए उत्पादों पर ‘Energy Drink’ लेबल लगाने के साथ उत्पादन करने की तत्काल अनुमति नहीं मिली है।

FSSAI की भूमिका और लेबलिंग पर सवाल

इस विवाद के केंद्र में खाद्य उत्पादों की सही पहचान और लेबलिंग के नियम हैं। किसी पेय पदार्थ के पैकेट पर लिखे शब्द उपभोक्ताओं को यह समझने में मदद करते हैं कि उत्पाद किस श्रेणी का है और उसमें किस तरह के तत्व हो सकते हैं। इसलिए खाद्य नियामक कंपनियों के लेबल और उनके इस्तेमाल किए जाने वाले विवरणों की जांच कर सकते हैं।FSSAI की आपत्ति इस बात से जुड़ी है कि संबंधित उत्पादों पर ‘Energy Drink’ का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप है या नहीं। दूसरी ओर, कंपनियों ने नियामक कार्रवाई की प्रक्रिया और लेबल के इस्तेमाल की अनुमति से जुड़े सवाल उठाए हैं। अदालत में इन दलीलों की जांच की जा रही है। अभी इस विवाद में अंतिम फैसला नहीं आया है, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ‘Energy Drink’ शब्द पर सभी उत्पादों के लिए स्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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ग्राहकों पर क्या असर पड़ सकता है?

फिलहाल इस आदेश का सीधा संबंध नए उत्पादों के निर्माण पर लेबल के इस्तेमाल से है। पहले से तैयार स्टॉक की बिक्री की अनुमति बनी हुई है। इसलिए इस फैसले को Sting Energy या Adrenaline Rush की बिक्री पर पूरी तरह रोक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।हालांकि, अगर आगे अदालत या नियामक की ओर से नए निर्देश आते हैं, तो कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव करना पड़ सकता है। ऐसे बदलावों का असर बाजार में उपलब्ध पैकेजिंग और उत्पादों के विवरण पर दिखाई दे सकता है। फिलहाल यह निर्भर करेगा कि मामले में आगे क्या आदेश आता है।

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आगे क्या होगा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए मामले को संबंधित एकल न्यायाधीश की पीठ के पास वापस भेजा है, ताकि नए बैच पर ‘Energy Drink’ लेबल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देने के कारण दर्ज किए जा सकें। इसके बाद डिवीजन बेंच मामले पर आगे विचार कर सकती है।अब इस विवाद में अगला महत्वपूर्ण कदम अदालत की ओर से कारण दर्ज किया जाना और उसके बाद होने वाली सुनवाई होगी। तब तक PepsiCo को पहले से तैयार स्टॉक बेचने की अनुमति है, लेकिन नए उत्पादों के निर्माण में ‘Energy Drink’ लेबल के इस्तेमाल पर लगी रोक लागू है। इस मामले का अंतिम परिणाम यह तय करने में अहम होगा कि संबंधित उत्पादों की लेबलिंग को लेकर कंपनी और खाद्य नियामक के बीच विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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