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Diarrhea during periods: पीरियड्स के दिनों में क्यों बिगड़ जाता है Digestion? जानें इसके पीछे की वजह

Diarrhea during periods, पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द, कमर में ऐंठन, थकान और मूड में बदलाव होना आम बात है। लेकिन कई महिलाओं को इस दौरान एक और परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है और लूज मोशन होने लगते हैं, तो कभी पेट साफ नहीं होता और कब्ज की समस्या परेशान करती है।

Diarrhea during periods : पीरियड्स में पाचन क्यों हो जाता है कमजोर? जानें पेट से जुड़ी परेशानियों की वजह

Diarrhea during periods, पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द, कमर में ऐंठन, थकान और मूड में बदलाव होना आम बात है। लेकिन कई महिलाओं को इस दौरान एक और परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है और लूज मोशन होने लगते हैं, तो कभी पेट साफ नहीं होता और कब्ज की समस्या परेशान करती है। कई बार पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले ही पेट से जुड़ी ये दिक्कतें महसूस होने लगती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर एक ही समय में शरीर में ऐसे अलग-अलग बदलाव क्यों होते हैं? इसकी मुख्य वजह हार्मोन में उतार-चढ़ाव, आंतों की गतिविधियों में बदलाव और शरीर में बनने वाले कुछ खास केमिकल हो सकते हैं।

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पीरियड्स में हार्मोन का क्या होता है असर?

महिलाओं के मासिक धर्म चक्र में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नाम के हार्मोन की अहम भूमिका होती है। इन हार्मोन का स्तर पूरे महीने बदलता रहता है। पीरियड्स शुरू होने से पहले प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिरने लगता है। इसका असर केवल गर्भाशय पर ही नहीं, बल्कि पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। कुछ महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण आंतों की गति धीमी हो सकती है, जिससे मल त्यागने में परेशानी होती है और कब्ज की शिकायत हो सकती है। वहीं, कुछ महिलाओं में आंतों की गतिविधि तेज हो जाती है, जिससे मल जल्दी बाहर निकलता है और लूज मोशन की समस्या हो सकती है। हालांकि, हर महिला का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है, इसलिए सभी को एक जैसे लक्षण महसूस नहीं होते।

प्रोस्टाग्लैंडिन्स की वजह से क्यों होते हैं लूज मोशन?

पीरियड्स के दौरान लूज मोशन होने की एक अहम वजह प्रोस्टाग्लैंडिन्स नाम के पदार्थ हैं। ये शरीर में बनने वाले ऐसे केमिकल हैं जो गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकुड़ने में मदद करते हैं, ताकि गर्भाशय की अंदरूनी परत बाहर निकल सके। इसी प्रक्रिया के कारण पीरियड्स में ऐंठन और दर्द महसूस होता है। लेकिन प्रोस्टाग्लैंडिन्स का असर केवल गर्भाशय तक सीमित नहीं रहता। ये आंतों की गतिविधियों को भी बढ़ा सकते हैं। जब आंतें सामान्य से ज्यादा तेजी से काम करती हैं, तो शरीर को मल से पानी सोखने के लिए कम समय मिलता है। इससे मल पतला हो सकता है और बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से कुछ महिलाओं को पीरियड्स के पहले दिन या शुरुआती दिनों में लूज मोशन ज्यादा महसूस होते हैं।

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फिर पीरियड्स में कब्ज क्यों होती है?

अगर पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाओं को लूज मोशन होता है, तो कुछ को कब्ज की समस्या भी हो सकती है। इसकी वजह आंतों की गति में बदलाव, खानपान, पानी की कमी और शारीरिक गतिविधि कम होना हो सकता है। हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाओं में पाचन प्रक्रिया धीमी महसूस हो सकती है। इसके अलावा, पीरियड्स के दर्द या थकान के कारण चलना-फिरना कम हो जाता है, जिससे भी कब्ज बढ़ सकती है। इस दौरान अगर पानी कम पिया जाए या फाइबर से भरपूर भोजन न लिया जाए, तो मल सख्त हो सकता है। कुछ महिलाओं को पेट फूलने और भारीपन की शिकायत भी होती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पीरियड्स के दौरान कब्ज होना केवल हार्मोन की वजह से ही नहीं होता; रोजमर्रा की आदतें भी इसमें भूमिका निभाती हैं।

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क्या पीरियड्स से पहले भी पेट खराब हो सकता है?

हां, कुछ महिलाओं को पीरियड्स शुरू होने से पहले ही पाचन संबंधी परेशानियां होने लगती हैं। यह प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) से जुड़ा हो सकता है। PMS में पेट फूलना, स्तनों में संवेदनशीलता, चिड़चिड़ापन, थकान और खाने की इच्छा में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इस दौरान कुछ महिलाओं को मीठा, तला हुआ या ज्यादा नमक वाला खाना खाने की इच्छा होती है। अगर खानपान में अचानक बदलाव होता है, तो इसका असर पेट पर भी पड़ सकता है। तनाव और नींद की कमी भी पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। यदि हर महीने एक ही समय पर ये लक्षण दिखाई देते हैं और पीरियड्स खत्म होने के बाद कम हो जाते हैं, तो उनका संबंध मासिक धर्म चक्र से हो सकता है।

पीरियड्स में पेट की समस्या से राहत कैसे पाएं?

पीरियड्स के दौरान पेट को आराम देने के लिए सबसे पहले पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं। अगर लूज मोशन हो रहे हैं, तो शरीर में पानी और नमक की कमी से बचना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर ORS का इस्तेमाल किया जा सकता है। हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लें। बहुत ज्यादा तला हुआ, मसालेदार भोजन, कैफीन और ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें जिनसे आपकी परेशानी बढ़ती हो।अगर कब्ज की समस्या है, तो खाने में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें। फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं। हल्की वॉक करने से भी आंतों की गतिविधि बेहतर हो सकती है। पेट में ऐंठन होने पर गर्म पानी की थैली से सिकाई करने से राहत मिल सकती है। अपने लक्षणों को समझने के लिए दो-तीन महीने तक नोट करें कि पीरियड्स के किस दिन लूज मोशन या कब्ज की समस्या ज्यादा होती है। इससे डॉक्टर को भी सही कारण समझने में मदद मिल सकती है।

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कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

पीरियड्स के दौरान हल्के पाचन संबंधी बदलाव आम हो सकते हैं, लेकिन हर बार इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर लूज मोशन लगातार बने रहें, मल में खून आए, तेज पेट दर्द हो, बुखार हो या शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखाई दें, तो डॉक्टर से संपर्क करें। इसी तरह, कई दिनों तक कब्ज रहने, मल त्यागते समय तेज दर्द होने या बार-बार ऐसी परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।अगर हर महीने पीरियड्स के दौरान बहुत तेज पेट दर्द, मल त्यागते समय दर्द या लगातार दस्त और कब्ज की समस्या होती है, तो डॉक्टर से एंडोमेट्रियोसिस या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी स्थितियों के बारे में भी बात की जा सकती है। इन समस्याओं में पेट और आंतों से जुड़े लक्षण मासिक धर्म के आसपास बढ़ सकते हैं।

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