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Laser Hair Reduction: बार-बार आता है पसीना और बदबू? Laser Treatment कितना काम करता है, जानें Expert की राय

Laser Hair Reduction, गर्मियों में ही नहीं, बल्कि कई लोगों को पूरे साल अंडरआर्म्स में जरूरत से ज्यादा पसीना आने और तेज बदबू की समस्या परेशान करती है।

Laser Hair Reduction : क्या Laser Treatment सच में कम कर सकता है पसीना और बदबू? जानें पूरी सच्चाई

Laser Hair Reduction, गर्मियों में ही नहीं, बल्कि कई लोगों को पूरे साल अंडरआर्म्स में जरूरत से ज्यादा पसीना आने और तेज बदबू की समस्या परेशान करती है। बार-बार कपड़े बदलने, डियोड्रेंट लगाने और नहाने के बावजूद अगर पसीने और बॉडी ओडर की समस्या बनी रहती है, तो इसका असर आत्मविश्वास और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आजकल लेजर ट्रीटमेंट को भी पसीना और अंडरआर्म की बदबू कम करने के एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन क्या वाकई लेजर से पसीना और बदबू दोनों कम हो सकते हैं? एक्सपर्ट्स और मेडिकल रिसर्च इस बारे में क्या कहते हैं, आइए समझते हैं।

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सबसे पहले समझें क्यों आता है पसीना और बदबू?

पसीना आना शरीर की सामान्य प्रक्रिया है। शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए मुख्य रूप से एक्राइन (eccrine) ग्लैंड्स पसीना बनाती हैं। सामान्य परिस्थितियों में यह पसीना लगभग गंधहीन होता है। वहीं अंडरआर्म्स में मौजूद एपोक्राइन (apocrine) ग्लैंड्स से निकलने वाले पदार्थ त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद टूटते हैं और इसी प्रक्रिया से तेज गंध पैदा हो सकती है। मेडिकल भाषा में अत्यधिक बदबू को ब्रोमहाइड्रोसिस (Bromhidrosis) कहा जाता है।अगर किसी व्यक्ति को सामान्य से बहुत ज्यादा पसीना आता है, तो इसे हाइपरहाइड्रोसिस (Hyperhidrosis) कहा जा सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के मुताबिक, इसका इलाज व्यक्ति की समस्या और शरीर के उस हिस्से के आधार पर तय किया जाता है जहां ज्यादा पसीना आता है।

क्या लेजर से पसीना कम हो सकता है?

विशेषज्ञ संस्थाओं के मुताबिक, अंडरआर्म्स के अत्यधिक पसीने को कम करने के लिए कुछ प्रकार की लेजर तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इन प्रक्रियाओं में लेजर ऊर्जा त्वचा के नीचे मौजूद पसीने की ग्रंथियों को गर्म करके उन्हें नुकसान पहुंचाने या नष्ट करने का लक्ष्य रखती है। इससे उस क्षेत्र में पसीने का उत्पादन कम हो सकता है।इंटरनेशनल हाइपरहाइड्रोसिस सोसायटी के अनुसार, कुछ अध्ययनों में लेजर ट्रीटमेंट के बाद अंडरआर्म पसीने में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। हालांकि, इस तकनीक से जुड़े शुरुआती अध्ययनों में मरीजों की संख्या कम थी और इसके प्रभाव पर उपलब्ध सबूत अन्य स्थापित उपचारों की तुलना में अभी सीमित हैं।यानी लेजर को पसीना कम करने का संभावित विकल्प जरूर माना जाता है, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए पहली या एकमात्र पसंद का इलाज नहीं कहा जा सकता।

बदबू पर भी हो सकता है असर?

यहां पसीने और बदबू के बीच का अंतर समझना जरूरी है। बदबू केवल पसीने की मात्रा पर निर्भर नहीं करती। त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया, एपोक्राइन ग्लैंड्स, हाइजीन, कुछ दवाएं, खान-पान और कुछ स्वास्थ्य स्थितियां भी बॉडी ओडर को प्रभावित कर सकती हैं।कुछ रिसर्च में अंडरआर्म की बदबू यानी ब्रोमहाइड्रोसिस के लिए लेजर ट्रीटमेंट से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। एक अध्ययन में 1,444-nm Nd लेजर के बाद छह महीने के फॉलो-अप में बड़ी संख्या में मरीजों में बदबू में कमी देखी गई। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि अलग-अलग तकनीकों की तुलना के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।ब्रोमहाइड्रोसिस के इलाज पर हुई एक साहित्य समीक्षा में भी लेजर थेरेपी को संभावित विकल्प बताया गया, खासकर उन मामलों में जहां सामान्य उपचारों से पर्याप्त फायदा नहीं मिलता। लेकिन इसके लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों को लेकर अभी और प्रमाण जरूरी हैं।

क्या हर लेजर एक जैसा होता है?

नहीं। यह बात बेहद महत्वपूर्ण है। “लेजर ट्रीटमेंट” एक ही तरह की प्रक्रिया का नाम नहीं है। अलग-अलग वेवलेंथ और तकनीकों का इस्तेमाल अलग उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। कुछ लेजर सीधे पसीने की ग्रंथियों को टारगेट करते हैं, जबकि कुछ तकनीकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से बालों को कम करने के लिए होता है।2024 की एक व्यवस्थित समीक्षा में अंडरआर्म हाइपरहाइड्रोसिस और ओस्मिड्रोसिस यानी बदबू के लिए डायोड लेजर और Nd लेजर समेत कई स्थानीय प्रक्रियाओं का अध्ययन किया गया। कुछ अध्ययनों में पसीने और बदबू दोनों में सुधार पाया गया, लेकिन सभी लेजर तकनीकों के परिणाम समान नहीं थे।इसलिए केवल “लेजर करवा लेने” से समस्या खत्म होने की गारंटी नहीं होती। सही तकनीक का चुनाव त्वचा विशेषज्ञ द्वारा समस्या की वजह और गंभीरता को देखकर किया जाना चाहिए।

क्या लेजर ट्रीटमेंट पूरी तरह सुरक्षित है?

लेजर ट्रीटमेंट को विशेषज्ञ द्वारा सही तरीके से किया जाए तो यह एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। उपचार के बाद कुछ लोगों को दर्द, सूजन, लालिमा, सुन्नपन, जलन या त्वचा में बदलाव महसूस हो सकता है। दुर्लभ मामलों में जलने जैसी समस्या भी हो सकती है।इसी वजह से विशेषज्ञ सलाह के बिना किसी कॉस्मेटिक क्लीनिक में जाकर लेजर करवाना सही नहीं माना जाता। खासकर अगर पसीना अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया है या बदबू के साथ त्वचा पर संक्रमण, खुजली या घाव भी हैं, तो पहले कारण का पता लगाना जरूरी है।

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पहले किन उपायों को आजमाया जाता है?

हर व्यक्ति को सीधे लेजर की जरूरत नहीं होती। हाइपरहाइड्रोसिस के इलाज में डॉक्टर शुरुआत में क्लिनिकल-स्ट्रेंथ या प्रिस्क्रिप्शन एंटीपर्सपिरेंट जैसी चीजों की सलाह दे सकते हैं। जरूरत के अनुसार बोटुलिनम टॉक्सिन, आयोनटोफोरेसिस, दवाएं या अन्य प्रक्रियाएं भी विकल्प हो सकती हैं।अगर समस्या मुख्य रूप से बदबू की है और पसीना सामान्य मात्रा में आता है, तो डॉक्टर पहले हाइजीन, त्वचा संक्रमण, बैक्टीरियल ओवरग्रोथ और अन्य संभावित कारणों को देखते हैं। क्योंकि केवल पसीना कम करना हर बार बदबू की समस्या का पूरा समाधान नहीं होता।

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एक्सपर्ट की राय का सार क्या है?

मेडिकल रिसर्च से यह जरूर संकेत मिलता है कि कुछ लेजर तकनीकें अंडरआर्म्स में अत्यधिक पसीना और बदबू दोनों को कम करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लेजर हर व्यक्ति के लिए स्थायी या 100 प्रतिशत प्रभावी इलाज है। उपलब्ध रिसर्च में अलग-अलग तकनीकों और मरीजों के परिणाम अलग रहे हैं और लंबे समय के प्रभावों पर अभी और अध्ययन की जरूरत है।इसलिए अगर आपको लगातार अंडरआर्म्स में बहुत ज्यादा पसीना आता है या तेज बदबू की समस्या है, तो पहले डर्मेटोलॉजिस्ट से जांच करवाना बेहतर है। डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि समस्या हाइपरहाइड्रोसिस है, ब्रोमहाइड्रोसिस है या इसके पीछे कोई दूसरा कारण है। उसके बाद ही तय किया जा सकता है कि एंटीपर्सपिरेंट, दवा, बोटॉक्स, लेजर या कोई अन्य उपचार आपके लिए सही रहेगा।

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