New liquor Shops: शराब की नई दुकानों पर लगा ब्रेक! CM मोहन चरण माझी ने किया 3 साल का बड़ा ऐलान
New liquor Shops, ओडिशा में शराब और नशे के खिलाफ राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि अगले तीन वर्षों तक राज्य में शराब की कोई नई दुकान नहीं खोली जाएगी।
New liquor Shops : ओडिशा में शराब की नई दुकानों पर रोक, CM मोहन चरण माझी बोले- 3 साल तक नहीं होगा नया लाइसेंस
New liquor Shops, ओडिशा में शराब और नशे के खिलाफ राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि अगले तीन वर्षों तक राज्य में शराब की कोई नई दुकान नहीं खोली जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह ऐलान भुवनेश्वर में आयोजित ‘जीवन जिंदाबाद-2.0’ जनजागरूकता कार्यक्रम के दौरान किया। यह कार्यक्रम कमिश्नरेट पुलिस की ओर से नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। सरकार के मुताबिक, नई शराब दुकानों पर रोक राज्य की नई आबकारी नीति का हिस्सा है।
नई आबकारी नीति के तहत लिया गया फैसला
मुख्यमंत्री माझी के मुताबिक, राज्य में नई शराब की दुकानों को खोलने पर तीन साल तक रोक लगाने का फैसला नई आबकारी नीति के तहत किया गया है। यह नीति 1 अप्रैल से लागू हुई है। इसका मतलब यह है कि आने वाले तीन सालों के दौरान सरकार नई शराब दुकानों को अनुमति देने की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगी। हालांकि, यह घोषणा मौजूदा शराब दुकानों को बंद करने के फैसले के तौर पर सामने नहीं आई है। इसका मुख्य फोकस नए आउटलेट खोलने पर रोक लगाने पर है।
नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में राज्य सरकार की नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि नशे की लत का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार और समाज भी प्रभावित होते हैं। सरकार का कहना है कि शराब और दूसरे नशीले पदार्थों से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए पुलिस, आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन को मिलकर काम करना होगा।माझी ने पुलिस और आबकारी प्रशासन को शराब के साथ-साथ गांजा, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों के खिलाफ भी सख्त और सक्रिय कार्रवाई करने का निर्देश दिया। सरकार की कोशिश केवल शराब की उपलब्धता को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार पर भी कार्रवाई तेज करने की है।
‘जीवन जिंदाबाद-2.0’ का क्या है उद्देश्य?
मुख्यमंत्री ने जिस ‘जीवन जिंदाबाद-2.0’ अभियान के दौरान यह घोषणा की, उसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना है। पिछले साल शुरू किए गए अभियान का फोकस आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर था। इस बार अभियान का दायरा नशे की समस्या तक बढ़ाया गया है।सरकार युवाओं को नशे से दूर रखकर उन्हें शिक्षा, खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में ‘नशे को ना और जिंदगी को हां’ जैसे संदेश को लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
शराब से होने वाली मौतों पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री माझी ने शराब सेवन से होने वाली मौतों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में हर साल शराब के सेवन के कारण करीब 2.60 लाख से 2.80 लाख लोगों की मौत होती है। उन्होंने शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं को भी गंभीर समस्या बताया और कहा कि ओडिशा में नशे में ड्राइविंग से होने वाली मौतों का आंकड़ा चिंता का विषय है।यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम में बताए गए आंकड़े उनके संबोधन का हिस्सा हैं। इन आंकड़ों का संदर्भ शराब से होने वाले व्यापक स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा प्रभावों को लेकर था।
अवैध और जहरीली शराब पर भी सख्ती
नई शराब की दुकानें नहीं खोलने के फैसले के साथ सरकार ने अवैध शराब के कारोबार पर भी प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अवैध शराब और नकली शराब की बिक्री के लिए स्थानीय प्रशासन को जवाबदेह बनाया गया है। इसका उद्देश्य अवैध शराब के नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाना और ऐसी शराब से होने वाली घटनाओं को रोकना है।सरकार की नीति का एक दूसरा हिस्सा तंबाकू और निकोटिन से जुड़े उत्पादों पर कार्रवाई भी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि तंबाकू और निकोटिन युक्त पान मसाला और गुटखा के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा स्कूल और कॉलेज परिसरों को नशामुक्त क्षेत्र घोषित किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
ड्रग्स के खिलाफ भी कार्रवाई तेज करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने पुलिस और आबकारी विभाग से सिर्फ शराब के मामलों तक सीमित न रहने की अपील की। उन्होंने गांजा, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स समेत हाई-रिस्क नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई और तेज करने की बात कही। सरकार का लक्ष्य राज्य में नशे से जुड़े अवैध कारोबार और उससे जुड़े अपराधों पर नियंत्रण करना है।माझी ने यह भी कहा कि ओडिशा सरकार 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के केंद्र के लक्ष्य के अनुरूप काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अभियान में पुलिस, प्रशासन, शिक्षण संस्थानों और आम लोगों की भागीदारी पर जोर दिया जा रहा है।
‘नशामुक्त भारत’ वेबसाइट भी लॉन्च
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कमिश्नरेट पुलिस की ओर से तैयार एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की, जिसे ‘नशामुक्त भारत’ अभियान से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना और लोगों तक संबंधित जानकारी पहुंचाना है। कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों, छात्रों और युवाओं की भी मौजूदगी रही।
तीन साल का फैसला क्यों है अहम?
ओडिशा सरकार का तीन साल तक नई शराब दुकानों को अनुमति न देने का फैसला शराब की उपलब्धता और नए रिटेल आउटलेट के विस्तार को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है। हालांकि, यह फैसला मौजूदा शराब दुकानों को पूरी तरह बंद करने की घोषणा नहीं है। इसका सीधा असर नई दुकानों के खुलने पर पड़ेगा।अब इस नीति का वास्तविक प्रभाव इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। अवैध शराब की बिक्री पर नियंत्रण, ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई और युवाओं के बीच जागरूकता अभियान इस नीति के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे। फिलहाल मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ओडिशा में अगले तीन वर्षों तक नई शराब दुकानों के लाइसेंस को लेकर रोक चर्चा में है और सरकार इसे अपने व्यापक नशामुक्ति अभियान से जोड़कर देख रही है।
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