Ministry of External Affairs: विदेशी नेताओं की तबीयत बिगड़ने की खबरों पर MEA का फैक्ट चेक, सोशल मीडिया दावों की खुली पोल
Ministry of External Affairs, नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे दावे तेजी से वायरल होने लगे, जिनमें कहा गया कि भारत आए कई विदेशी नेताओं की तबीयत खराब हो गई।
Ministry of External Affairs : BRICS Summit के बाद वायरल हो रही थी नेताओं की खराब तबीयत की खबर, MEA ने किया खारिज
Ministry of External Affairs, नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बाद सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे दावे तेजी से वायरल होने लगे, जिनमें कहा गया कि भारत आए कई विदेशी नेताओं की तबीयत खराब हो गई। इन पोस्ट में खास तौर पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के स्वास्थ्य को लेकर कई तरह की बातें कही गईं। अब भारत के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए इन्हें फेक और भ्रामक बताया है। विदेश मंत्रालय की फैक्ट-चेक यूनिट ने 17 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लोगों को ऐसे दावों से सावधान रहने की सलाह दी।
विदेश मंत्रालय ने जारी किया ‘फेक अलर्ट’
विदेश मंत्रालय की फैक्ट-चेक यूनिट ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट को लेकर स्पष्ट चेतावनी जारी की। मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में इसे ‘Fake Alert’ बताया और कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की दुर्भावनापूर्ण पोस्ट से सावधान रहना चाहिए। MEA ने वायरल दावों को लेकर लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने का संकेत दिया।मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब BRICS सम्मेलन के कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग पोस्ट और दावे तेजी से फैल रहे थे। इन पोस्ट में सम्मेलन में शामिल विदेशी नेताओं की तबीयत खराब होने और कुछ नेताओं के भारत से लौटने के बाद स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों की बात कही जा रही थी।
शी चिनफिंग को लेकर क्या दावा हुआ?
सोशल मीडिया पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा देखने को मिली। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि BRICS सम्मेलन के दौरान वह बेहोश हो गए थे और उन्हें स्ट्रोक आया था। एक वायरल दावे में यहां तक कहा गया कि उन्हें इलाज के लिए सैन्य हेलीकॉप्टर से बीजिंग के अस्पताल ले जाया गया।हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे दावों को फेक और मिसलीडिंग बताया है। वहीं, चीन की ओर से भी इस कथित घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए गंभीर स्वास्थ्य संबंधी दावों को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है।
सिरिल रामफोसा की तबीयत को लेकर क्या है आधिकारिक जानकारी?
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा को लेकर स्थिति थोड़ी अलग है। उनकी सरकार की ओर से यह जानकारी सामने आई कि BRICS सम्मेलन से लौटने के बाद उन्हें स्वास्थ्य कारणों से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने और आराम करने की सलाह दी गई है। उनके कार्यालय ने बताया कि जहां संभव होगा, निर्धारित कार्यक्रमों में संबंधित मंत्री उनका प्रतिनिधित्व करेंगे।यानी रामफोसा के स्वास्थ्य को लेकर आधिकारिक तौर पर आराम करने की जानकारी सामने आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे व्यापक दावों और BRICS सम्मेलन से जोड़कर बनाई जा रही अलग-अलग कहानियों को विदेश मंत्रालय ने भ्रामक बताया है। इसी वजह से सोशल मीडिया की किसी पोस्ट और आधिकारिक बयान के बीच अंतर समझना जरूरी है।
BRICS सम्मेलन में कौन-कौन से मुद्दे रहे प्रमुख?
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit में सदस्य देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन का विषय ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ था। सम्मेलन के बाद जारी नई दिल्ली घोषणा में BRICS देशों ने आपसी सहयोग को मजबूत करने और बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने पर जोर दिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। BRICS के विस्तारित स्वरूप में अब कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिससे संगठन की वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा भी बढ़ी है।
सोशल मीडिया पर क्यों तेजी से फैलीं अफवाहें?
किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया के कई शीर्ष नेता एक जगह मौजूद हों तो उनके कार्यक्रम, आवाजाही और सार्वजनिक उपस्थिति से जुड़ी छोटी-सी जानकारी भी सोशल मीडिया पर तेजी से फैल सकती है। BRICS Summit के बाद भी कुछ नेताओं की सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर पोस्ट सामने आईं और उनसे कई तरह के निष्कर्ष निकाले जाने लगे।ऐसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि किसी नेता का सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल न होना अपने आप में गंभीर बीमारी का प्रमाण नहीं होता। स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के मामले में आधिकारिक बयान या विश्वसनीय स्रोतों की पुष्टि जरूरी होती है। शी चिनफिंग को लेकर वायरल किए गए दावों के मामले में ऐसी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।
विदेश मंत्रालय की चेतावनी क्यों अहम है?
MEA की फैक्ट-चेक यूनिट का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला सिर्फ किसी एक व्यक्ति से जुड़ा नहीं है, बल्कि कई देशों के शीर्ष नेताओं के स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे थे। विदेश मंत्रालय ने लोगों को ऐसे पोस्ट को आगे बढ़ाने से पहले उनकी सत्यता जांचने की चेतावनी दी है।BRICS सम्मेलन भारत में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन था और इसमें कई देशों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए। ऐसे में सम्मेलन से संबंधित गलत जानकारी का तेजी से फैलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भ्रम पैदा कर सकता है। इसलिए आधिकारिक स्रोतों और विश्वसनीय समाचार संस्थानों से मिली जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
कुल मिलाकर, BRICS Summit के बाद कई विदेशी नेताओं की तबीयत खराब होने का दावा सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। विदेश मंत्रालय ने इन दावों को फेक और भ्रामक बताते हुए लोगों को सावधान किया है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका ने राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के स्वास्थ्य को लेकर आराम की सलाह दिए जाने की आधिकारिक जानकारी दी है। दूसरी ओर, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग को स्ट्रोक या गंभीर बीमारी होने जैसी सोशल मीडिया पर वायरल बातों की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।इस पूरे घटनाक्रम से एक बार फिर यह साफ होता है कि अंतरराष्ट्रीय नेताओं या अन्य सार्वजनिक हस्तियों के स्वास्थ्य से जुड़ी खबरों को लेकर सोशल मीडिया की अपुष्ट पोस्ट पर तुरंत विश्वास करने के बजाय आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। विदेश मंत्रालय का ताजा फैक्ट-चेक भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण चेतावनी है।
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