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Antiquity Blue: शराब प्रेमियों को लग सकता है झटका! इन मशहूर Whisky-Rum Brands के स्वाद में हो सकता है बदलाव

Antiquity Blue, शराब के शौकीनों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। दुनिया की प्रमुख स्पिरिट्स कंपनियों में शामिल Diageo ने भारत में अपने कुछ लोकप्रिय व्हिस्की और रम ब्रांड्स के फॉर्मूले में बदलाव करने पर सहमति जताई है। यह फैसला भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI की ओर से फ्लेवरिंग और लेबलिंग को लेकर उठाई गई आपत्तियों के बाद सामने आया है।

Antiquity Blue : FSSAI की सख्ती का असर! Diageo ने Whisky और Rum Brands की Formulation बदलने का लिया फैसला

Antiquity Blue, शराब के शौकीनों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। दुनिया की प्रमुख स्पिरिट्स कंपनियों में शामिल Diageo ने भारत में अपने कुछ लोकप्रिय व्हिस्की और रम ब्रांड्स के फॉर्मूले में बदलाव करने पर सहमति जताई है। यह फैसला भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI की ओर से फ्लेवरिंग और लेबलिंग को लेकर उठाई गई आपत्तियों के बाद सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी कुछ उत्पादों में इस्तेमाल किए जा रहे विवादित फ्लेवरिंग पदार्थों को हटाकर उनकी फॉर्मुलेशन में बदलाव करेगी। इस खबर के बाद उन ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ गई है जो नियमित रूप से इन ब्रांड्स का सेवन करते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किन ब्रांड्स पर असर पड़ेगा और क्या आने वाले समय में इनके स्वाद में भी बदलाव महसूस हो सकता है?

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किन Whisky और Rum Brands पर पड़ेगा असर?

रिपोर्ट के अनुसार, Diageo के भारतीय कारोबार से जुड़े कुछ प्रमुख ब्रांड्स इस बदलाव के दायरे में हैं। इनमें Antiquity Blue Whisky, Royal Challenge Whisky और McDowell’s No. 1 Celebration Matured XXX Rum शामिल हैं। इन उत्पादों को लेकर कुछ राज्यों में नियामकीय कार्रवाई भी की गई थी। Royal Challenge भारत में Diageo के प्रमुख व्हिस्की ब्रांड्स में से एक है। कंपनी के अनुसार, इसकी बिक्री भारत में सालाना 4.5 मिलियन से अधिक 9-लीटर केस के बराबर है। ऐसे में इसकी फॉर्मुलेशन में बदलाव का असर बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

आखिर क्यों बदलना पड़ रहा है फॉर्मूला?

पूरे विवाद की जड़ added flavouring substances को लेकर है। FSSAI ने कुछ उत्पादों में ऐसे फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे, जिन्हें नियामक ने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं माना।सरल भाषा में समझें तो मामला इस बात से जुड़ा है कि व्हिस्की में व्हिस्की फ्लेवर और रम में रम फ्लेवर जैसे अतिरिक्त फ्लेवरिंग पदार्थों का इस्तेमाल किस तरह और किन नियमों के तहत किया जा सकता है। नियामक की आपत्ति के बाद Diageo ने अब विवादित फ्लेवरिंग पदार्थों को हटाने की दिशा में कदम उठाया है।

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FSSAI की कार्रवाई के बाद आया फैसला

अगस्त 2026 की शुरुआत में भारत में शराब उत्पादों पर खाद्य सुरक्षा नियमों को लेकर कार्रवाई तेज हुई थी। Diageo और कुछ अन्य कंपनियों के उत्पादों को लेकर फ्लेवरिंग और लेबलिंग संबंधी सवाल उठे थे। कुछ राज्यों में संबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक या प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद Diageo की भारतीय इकाई United Spirits और नियामक के बीच समाधान की दिशा में बातचीत हुई। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक कंपनी फॉर्मुलेशन में बदलाव करेगी और नए मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार करेगी।

क्या बदल जाएगा शराब का स्वाद?

यही सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। फॉर्मूलेशन में बदलाव का मतलब यह जरूरी नहीं है कि हर उपभोक्ता को स्वाद में बड़ा अंतर महसूस होगा। हालांकि, जब किसी पेय की रेसिपी या उसमें इस्तेमाल होने वाले फ्लेवरिंग घटकों में बदलाव किया जाता है, तो उसके स्वाद, खुशबू या overall flavour profile में कुछ अंतर संभव है।कंपनी जिन विवादित फ्लेवरिंग पदार्थों को हटाने की योजना बना रही है, उनका उद्देश्य नियामकीय नियमों का पालन करना है। इसलिए आने वाले समय में बाजार में मिलने वाले नए बैच पुराने उत्पादों से कुछ हद तक अलग महसूस हो सकते हैं। हालांकि, यह कितना स्पष्ट होगा, यह नए फॉर्मूलेशन और उत्पादन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

पूरे भारत में लागू होगा बदलाव

इस फैसले की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बदलाव केवल उन राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा जहां संबंधित उत्पादों पर प्रतिबंध या रोक लगी थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, संशोधित फॉर्मुलेशन को भारत में कंपनी के उत्पादन पर व्यापक रूप से लागू किया जाएगा। इसका मतलब है कि भविष्य में अलग-अलग राज्यों में एक ही ब्रांड के अलग फॉर्मूलेशन के बजाय कंपनी देशभर में नए मानकों के अनुसार उत्पाद तैयार कर सकती है।

लेबल पर भी होगा बदलाव

फॉर्मूलेशन बदलने की प्रक्रिया पूरी होने तक कंपनी को उत्पादों के लेबल पर इस्तेमाल किए गए फ्लेवरिंग पदार्थों के बारे में अधिक स्पष्ट जानकारी देने की दिशा में भी कदम उठाना होगा।रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमण अवधि के दौरान फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग के जरिए फ्लेवरिंग के इस्तेमाल की जानकारी स्पष्ट करने पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को उत्पाद में मौजूद अतिरिक्त फ्लेवरिंग के बारे में अधिक पारदर्शी जानकारी देना है।

शराब उद्योग के लिए भी बड़ा संकेत

Diageo का यह फैसला केवल एक कंपनी या कुछ ब्रांड्स तक सीमित मामला नहीं माना जा रहा है। इससे भारत के पूरे अल्कोहलिक बेवरेज सेक्टर में फ्लेवरिंग और लेबलिंग नियमों को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।भारत दुनिया के बड़े स्पिरिट्स बाजारों में से एक है। ऐसे में नियामकीय मानकों का सख्ती से पालन कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर किसी उत्पाद में सामग्री, फ्लेवरिंग या लेबलिंग से जुड़ी शर्तों का पालन नहीं होता है तो कंपनियों को उत्पादन, वितरण और बिक्री के स्तर पर बदलाव करने पड़ सकते हैं।

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उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

आम ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि आने वाले महीनों में बाजार में पुराने और नए फॉर्मूलेशन वाले उत्पादों के बैच दिखाई दें। कंपनी को मौजूदा स्टॉक को नए नियमों के अनुरूप करने और नए फॉर्मूलेशन के उत्पादन के बीच एक ट्रांजिशन पीरियड की जरूरत होगी।इस दौरान उपभोक्ताओं को लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए और यह देखना चाहिए कि उत्पाद पर कौन-कौन सी सामग्री और फ्लेवरिंग संबंधी जानकारी दी गई है।

Diageo के लिए भारत क्यों अहम है?

Diageo भारत को अपने महत्वपूर्ण बाजारों में गिनती है और कंपनी की भारतीय इकाई United Spirits के पास कई लोकप्रिय घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्पिरिट ब्रांड्स हैं। Diageo India के आधिकारिक पोर्टफोलियो में 50 से अधिक स्पिरिट ब्रांड्स शामिल हैं। कंपनी के वैश्विक पोर्टफोलियो में Johnnie Walker और Captain Morgan जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी शामिल हैं। यही वजह है कि भारत में नियामकीय बदलावों का असर कंपनी की रणनीति और उत्पादन प्रक्रियाओं पर महत्वपूर्ण हो सकता है।

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आगे क्या होगा?

अब अगला महत्वपूर्ण कदम नए फॉर्मूलेशन को लागू करना और संबंधित उत्पादों को नियामकीय मानकों के अनुरूप बाजार में उपलब्ध कराना होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, फॉर्मूला बदलने के साथ विवादित फ्लेवरिंग पदार्थों को हटाया जाएगा और लेबलिंग में भी जरूरी बदलाव किए जाएंगे। कुल मिलाकर, Diageo के कुछ लोकप्रिय Whisky और Rum Brands के फॉर्मूले में बदलाव की खबर शराब बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। Royal Challenge, Antiquity Blue और McDowell’s No. 1 Celebration Matured XXX Rum जैसे लोकप्रिय उत्पाद इस घटनाक्रम के केंद्र में हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं के लिए सबसे अहम बात यह है कि नए बैच आने के बाद लेबल और उत्पाद की जानकारी पर नजर रखें। साथ ही, यह देखना दिलचस्प होगा कि नए फॉर्मूलेशन के बाद इन लोकप्रिय ब्रांड्स के स्वाद और उपभोक्ता पसंद पर कितना असर पड़ता है।

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