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Delhi Police: दिल्ली पुलिस ने SC में खोला प्रदर्शन का राज, बैरिकेडिंग टूटने के बाद क्यों करना पड़ा बल प्रयोग?

Delhi Police, दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई 2026 को हुए छात्र प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को खारिज किया है।

Delhi Police : जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामला, 30 हजार की भीड़ से लेकर हिंसा तक, SC में दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा

Delhi Police, दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई 2026 को हुए छात्र प्रदर्शन और उसके दौरान पुलिस कार्रवाई का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में करीब 30 हजार लोग मौजूद थे, जबकि कानून-व्यवस्था संभालने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात थे। पुलिस के मुताबिक स्थिति तब बिगड़ी जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की।

 

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस ने अपने काउंटर-अफिडेविट में कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक प्रस्तावित ‘संसद चलो’ मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर जाने की कोशिश की।पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले बातचीत, अपील और चेतावनी जैसे उपाय किए गए। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश हुई, तब पुलिस ने स्थिति के अनुरूप बल का इस्तेमाल किया। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई ग्रेडेड और कानून के मुताबिक थी, न कि अत्यधिक बल प्रयोग।

30 हजार लोगों की भीड़ और 5 हजार पुलिसकर्मी

दिल्ली पुलिस के अनुसार उस दिन प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाके में 30 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी थे। इतनी बड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए करीब 5 हजार पुलिसकर्मी लगाए गए थे। पुलिस ने इसी अनुपात का हवाला देते हुए कहा कि उस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती थी। पुलिस का कहना है कि भीड़ को निर्धारित क्षेत्र में रखने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई थी। लेकिन प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से ने इन अवरोधों को पार करने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति तेजी से तनावपूर्ण हो गई।

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बैरिकेड टूटने के बाद क्यों बढ़ा तनाव?

पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों का लक्ष्य संसद की ओर मार्च करना था, जबकि उन्हें जंतर-मंतर के निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रखने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस ने आरोप लगाया कि चेतावनी के बावजूद भीड़ आगे बढ़ती रही और बैरिकेडिंग तोड़ दी गई।मीडिया रिपोर्टों में सामने आए पुलिस के विवरण के मुताबिक कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी। पुलिस ने यह भी दावा किया कि कुछ पुलिसकर्मियों पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं। इसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने अत्यधिक बल के आरोपों को किया खारिज

प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठे थे। आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने स्थिति के अनुरूप और सीमित तरीके से कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि संसद और आसपास के संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।

पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी दावा

20 जुलाई की घटना के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें सामने आई थीं। उस समय की रिपोर्टों के अनुसार कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस की ओर से दर्ज FIR में पुलिसकर्मियों पर हमला, सरकारी काम में बाधा, दंगा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने अपने जवाब में इसी घटनाक्रम को बल प्रयोग के पीछे प्रमुख कारणों में शामिल किया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर अलग दावे किए गए हैं। ऐसे में पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं पर अदालत में सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

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2,873 लोगों पर दर्ज हुए आपराधिक मामले

मामले में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में 2,873 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस की कार्रवाई और इन मामलों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान चेहरे की पहचान तकनीक यानी Facial Recognition Technology के इस्तेमाल को भी उचित और अनुपातिक कदम बताया है। इस तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी निजता और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठ रहे हैं।

संसद की सुरक्षा को बताया अहम कारण

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की है कि प्रदर्शन स्थल संसद और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों के बेहद करीब था। ऐसे में बड़ी भीड़ के अचानक आगे बढ़ने की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।इसी वजह से पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ाई थी। घटना के बाद भी पुलिस ने इलाके में मजबूत बैरिकेडिंग की। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक संसद मार्ग और आसपास के रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग लगाई गई थी, ताकि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाने से रोका जा सके।

अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

दिल्ली पुलिस का जवाब इस मामले में उसका पक्ष स्पष्ट करता है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण दोनों पर अदालत विचार करेगी।फिलहाल इस मामले ने प्रदर्शन के अधिकार, कानून-व्यवस्था, पुलिस बल के इस्तेमाल और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि 30 हजार से अधिक लोगों की भीड़, बैरिकेड तोड़े जाने और स्थिति बिगड़ने के बाद बल प्रयोग आवश्यक हो गया था। वहीं, प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर न्यायिक परीक्षण यह तय करने में अहम होगा कि उस कार्रवाई की सीमा और तरीका कानून के अनुरूप था या नहीं।

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