Karva Chauth 2026: कब है करवा चौथ? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चांद निकलने का समय
Karva Chauth 2026, करवा चौथ हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय पर्व है। यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखती हैं। बदलते समय के साथ अब कई पति भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए यह व्रत रखते हैं।
Karva Chauth 2026 : करवा चौथ 2026 कब है? जानिए चतुर्थी तिथि, चंद्रोदय का समय और व्रत नियम
Karva Chauth 2026, करवा चौथ हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय पर्व है। यह व्रत मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखती हैं। बदलते समय के साथ अब कई पति भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए यह व्रत रखते हैं। करवा चौथ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।साल 2026 में करवा चौथ 26 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन देशभर में महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा करती हैं तथा चंद्र दर्शन के बाद अपना व्रत खोलती हैं।

करवा चौथ 2026 की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है।
- करवा चौथ 2026: 26 अक्टूबर, सोमवार
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: पंचांग के अनुसार 25 अक्टूबर की रात्रि से
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर की रात्रि तक
स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और चंद्रोदय के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
करवा चौथ का महत्व
करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है। यह पर्व परिवार की खुशहाली और आपसी विश्वास को भी मजबूत करता है।आज के समय में करवा चौथ केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्तों में प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का उत्सव भी बन चुका है।
करवा चौथ की पूजा सामग्री
पूजा के लिए सामान्यतः निम्नलिखित सामग्री रखी जाती है—
- करवा (मिट्टी या तांबे का)
- छलनी
- दीपक
- रोली और कुमकुम
- अक्षत (चावल)
- फूल
- धूप और अगरबत्ती
- मिठाई
- फल
- नारियल
- गेहूं
- जल से भरा लोटा
- पूजा की थाली
- माता गौरी का चित्र या प्रतिमा
करवा चौथ व्रत की पूजा विधि
सुबह सूर्योदय से पहले महिलाएं सरगी ग्रहण करती हैं। इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम को स्नान कर नए वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार किया जाता है।पूजा स्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित की जाती है। करवा में जल भरकर दीपक जलाया जाता है। पूजा के दौरान करवा चौथ की कथा सुनी जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।रात्रि में चंद्रमा निकलने पर छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का मुख देखा जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।

करवा चौथ की कथा
करवा चौथ की सबसे प्रसिद्ध कथा रानी वीरवती से जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार वीरवती ने पहला करवा चौथ व्रत रखा था। दिनभर भूखी-प्यासी रहने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। भाइयों ने बहन की परेशानी देखकर पेड़ पर दीपक जलाकर नकली चंद्रमा का भ्रम उत्पन्न कर दिया। वीरवती ने उसे वास्तविक चंद्रमा समझकर व्रत खोल दिया।इसके बाद उनके पति पर संकट आ गया। तब देवी की कृपा और दोबारा श्रद्धापूर्वक व्रत करने से उनके पति को नया जीवन मिला। तभी से करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा और नियम के साथ रखने की परंपरा चली आ रही है।
सरगी का महत्व
सरगी करवा चौथ व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसे प्रातः सूर्योदय से पहले ग्रहण किया जाता है। परंपरा के अनुसार सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाई, मेवे, नारियल, फेनिया और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इसे प्रेम, आशीर्वाद और पारिवारिक स्नेह का प्रतीक माना जाता है।
करवा चौथ पर चंद्रमा का महत्व
करवा चौथ में चंद्रमा को विशेष महत्व दिया गया है। चंद्रमा को शीतलता, सौंदर्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। व्रत का समापन चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही किया जाता है। इसके बाद पति-पत्नी एक-दूसरे के सुखद और दीर्घ वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं।
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आधुनिक समय में करवा चौथ
आज करवा चौथ का स्वरूप पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। कई शहरों में सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है। डिजिटल युग में महिलाएं ऑनलाइन पूजा, वीडियो कॉल के माध्यम से चंद्र दर्शन और दूर रहने वाले जीवनसाथी के साथ भी इस पर्व को विशेष तरीके से मनाती हैं। कई पति भी अपनी पत्नी के साथ समान भाव से व्रत रखकर रिश्ते में समानता और प्रेम का संदेश देते हैं।करवा चौथ भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है जो केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों का उत्सव भी है। 26 अक्टूबर 2026 को मनाया जाने वाला करवा चौथ विवाहित दंपतियों के लिए अपने रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाने का एक विशेष अवसर होगा। श्रद्धा, नियम और सकारात्मक भाव से किया गया यह व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है।
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