Glorious Twelfth 2026: जानिए इस दिन का इतिहास और महत्व
Glorious Twelfth 2026, हर साल 12 अगस्त को ब्रिटेन में Glorious Twelfth मनाया जाता है। यह दिन खासतौर पर ग्राउस पक्षियों के शिकार सीजन की शुरुआत के रूप में जाना जाता है। ब्रिटेन की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ा यह आयोजन कई वर्षों से मनाया जा रहा है।
Glorious Twelfth 2026 : ब्रिटेन में शिकार सीजन की शुरुआत का खास अवसर
Glorious Twelfth 2026, हर साल 12 अगस्त को ब्रिटेन में Glorious Twelfth मनाया जाता है। यह दिन खासतौर पर ग्राउस पक्षियों के शिकार सीजन की शुरुआत के रूप में जाना जाता है। ब्रिटेन की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ा यह आयोजन कई वर्षों से मनाया जा रहा है। Glorious Twelfth का नाम सुनने में भले ही उत्सव जैसा लगता हो, लेकिन यह मुख्य रूप से गेम बर्ड हंटिंग यानी पक्षियों के शिकार से जुड़ी परंपरा है। इस दिन इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के कई ग्रामीण इलाकों में लोग बड़ी संख्या में शिकार गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं।
ग्राउस पक्षी क्या होते हैं?
ग्राउस एक प्रकार के जंगली पक्षी होते हैं, जो मुख्य रूप से ब्रिटेन के पहाड़ी और घास वाले इलाकों में पाए जाते हैं। इन्हें खासतौर पर रेड ग्राउस के नाम से जाना जाता है। इन पक्षियों का शिकार ब्रिटेन में लंबे समय से एक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। शिकार के इस सीजन की शुरुआत हर साल 12 अगस्त से होती है, इसलिए इस दिन को विशेष महत्व दिया जाता है।
इतिहास से जुड़ी है परंपरा
Glorious Twelfth की शुरुआत कई सदियों पहले हुई थी। ब्रिटेन के अमीर और शाही परिवारों के बीच शिकार को मनोरंजन और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। धीरे-धीरे यह परंपरा ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा बन गई। समय के साथ यह दिन ब्रिटिश सामाजिक और सांस्कृतिक कैलेंडर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। आज भी कई लोग इसे पारंपरिक आयोजन के रूप में मनाते हैं।
क्यों कहा जाता है ‘Glorious’?
इस दिन को “Glorious” यानी गौरवशाली कहने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। शिकार प्रेमियों के लिए यह दिन खास उत्साह और रोमांच लेकर आता है। ग्रामीण इलाकों में लोग इस अवसर पर खास तैयारियां करते हैं और इसे एक बड़े आयोजन की तरह देखते हैं। कई जगहों पर पारंपरिक भोजन, सामूहिक गतिविधियां और सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
आर्थिक रूप से भी अहम है यह दिन
Glorious Twelfth सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। शिकार पर्यटन के कारण स्थानीय होटलों, रेस्टोरेंट्स और ट्रैवल बिजनेस को फायदा होता है। कई लोग इस सीजन में ब्रिटेन के ग्रामीण इलाकों की यात्रा करते हैं, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलता है। यही वजह है कि कुछ लोग इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।
पर्यावरण और पशु अधिकारों को लेकर विवाद
हालांकि Glorious Twelfth को लेकर विवाद भी कम नहीं हैं। पशु अधिकार संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कई बार इस परंपरा का विरोध किया है। उनका कहना है कि मनोरंजन के लिए पक्षियों का शिकार करना गलत है और इससे वन्यजीवों पर नकारात्मक असर पड़ता है। कई संगठन इस परंपरा को बंद करने की मांग भी उठाते रहे हैं। इसके अलावा पर्यावरणविदों का कहना है कि शिकार गतिविधियों के कारण प्राकृतिक आवास और जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है।
ब्रिटेन में जारी है बहस
ब्रिटेन में हर साल इस दिन को लेकर बहस छिड़ जाती है। एक ओर पारंपरिक संस्कृति को मानने वाले लोग इसे अपनी विरासत का हिस्सा बताते हैं, वहीं दूसरी ओर पशु प्रेमी इसे अमानवीय मानते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग इसे ऐतिहासिक परंपरा बताते हैं, जबकि कई लोग वन्यजीव संरक्षण की बात करते हैं।
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आधुनिक दौर में बदलती सोच
आज के समय में दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण और पशु अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। ऐसे में कई लोग मानते हैं कि पारंपरिक आयोजनों को भी समय के अनुसार बदलने की जरूरत है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस परंपरा को जारी रखना है, तो वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का ध्यान रखना बेहद जरूरी होगा।
पर्यटन और संस्कृति का मिश्रण
Glorious Twelfth को सिर्फ शिकार तक सीमित नहीं माना जाता। कई लोग इसे ब्रिटेन की ग्रामीण संस्कृति और जीवनशैली को समझने का अवसर भी मानते हैं। इस दौरान लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं, स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेते हैं और ग्रामीण आयोजनों में हिस्सा लेते हैं। इससे ब्रिटिश सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है।
परंपरा और संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
Glorious Twelfth 2026 एक बार फिर ब्रिटेन में परंपरा, संस्कृति और वन्यजीव संरक्षण को लेकर चर्चा का केंद्र बनने वाला है। जहां एक ओर यह आयोजन ब्रिटिश इतिहास और ग्रामीण जीवन का हिस्सा माना जाता है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक दौर में पर्यावरण और पशु अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि परंपराओं और प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाए, ताकि सांस्कृतिक विरासत भी सुरक्षित रहे और वन्यजीवों की रक्षा भी हो सके।
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