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ISRO: देश में दहशत फैलाने की साजिश नाकाम, ISRO और Air India को धमकी देने वाला गिरफ्तार

ISRO, देश की प्रमुख सुरक्षा और रणनीतिक संस्थाओं को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है।

ISRO : गाजियाबाद से गिरफ्तार हुआ बम की धमकी देने वाला आरोपी, ISRO और NIA भी थे निशाने पर

ISRO, देश की प्रमुख सुरक्षा और रणनीतिक संस्थाओं को बम से उड़ाने की धमकी देने के मामले में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। ISRO, NIA, DRDO और Air India समेत कई महत्वपूर्ण संस्थानों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी देने के आरोप में एक व्यक्ति को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने यह धमकी किस उद्देश्य से दी थी और क्या उसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क या साजिश का हाथ है।

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ईमेल के जरिए दी गई थी धमकी

जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने विभिन्न सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को ईमेल भेजकर बम विस्फोट की धमकी दी थी। धमकी मिलने के बाद संबंधित संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था तत्काल बढ़ा दी गई। बम निरोधक दस्तों और स्थानीय पुलिस ने कई स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन कहीं भी कोई संदिग्ध विस्फोटक सामग्री नहीं मिली।प्रारंभिक जांच में सामने आया कि धमकी भरे ईमेल का उद्देश्य दहशत फैलाना था। हालांकि, एजेंसियां मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं।

गाजियाबाद से हुई गिरफ्तारी

तकनीकी निगरानी, साइबर ट्रैकिंग और डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से जांच एजेंसियों ने आरोपी की पहचान की। इसके बाद संयुक्त अभियान चलाकर उसे गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।अधिकारियों का कहना है कि इन उपकरणों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमकी भरे ईमेल कहां से और किन माध्यमों से भेजे गए थे तथा क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है।

कई एजेंसियां कर रही हैं संयुक्त जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं। साइबर विशेषज्ञ आरोपी की ऑनलाइन गतिविधियों, ईमेल अकाउंट, आईपी एड्रेस और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि आरोपी ने पहले भी इस तरह की कोई धमकी दी थी या नहीं। यदि किसी अंतरराष्ट्रीय या संगठित नेटवर्क से संबंध के संकेत मिलते हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

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सुरक्षा व्यवस्था की गई थी कड़ी

धमकी मिलने के तुरंत बाद संबंधित संस्थानों और एयरपोर्ट सहित कई संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। सुरक्षा बलों ने परिसर की गहन जांच की और कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। तलाशी अभियान पूरा होने के बाद स्थिति सामान्य घोषित कर दी गई।विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थान किसी भी देश की रणनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

डिजिटल साक्ष्यों पर रहेगा फोकस

जांच एजेंसियों के लिए इस मामले में सबसे अहम कड़ी डिजिटल साक्ष्य हैं। साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि ईमेल भेजने के लिए किस डिवाइस, इंटरनेट कनेक्शन और तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यदि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन या अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया है, तो उसकी भी जांच की जाएगी।इसके अलावा एजेंसियां आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल हिस्ट्री और ऑनलाइन गतिविधियों का भी विश्लेषण कर रही हैं।

फर्जी धमकियों से बढ़ती चुनौती

हाल के वर्षों में ईमेल या सोशल मीडिया के माध्यम से बम की झूठी धमकियों के मामले बढ़े हैं। ऐसी घटनाओं के कारण सुरक्षा एजेंसियों को बड़े पैमाने पर संसाधन लगाने पड़ते हैं और आम लोगों के बीच भी दहशत का माहौल बन जाता है।विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और मजबूत डिजिटल निगरानी तंत्र की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।

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कानूनी कार्रवाई होगी सख्त

कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जांच में आरोपी के खिलाफ आरोप साबित होते हैं, तो उसके विरुद्ध भारतीय दंड संहिता और संबंधित साइबर कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संस्थानों को धमकी देने के मामलों को गंभीर अपराध माना जाता है।फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां उसके संभावित संपर्कों तथा इस घटना के पीछे की मंशा का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं।ISRO, NIA, DRDO और Air India जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी देने के आरोपी की गाजियाबाद से गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। हालांकि, जांच अभी जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह किसी अकेले व्यक्ति की हरकत थी या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा। आने वाले दिनों में जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

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