फिल्म रिव्यूः (यारा) चार दोस्तों की कहानी, जहां दोस्ती, प्यार और धोखा है

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yaara review

फिल्म में अपराधी से बड़े आदमी तक तब्दील होती जिदंगी हे


फिल्म – यारा

कास्ट – विदयुत जामवाल, अमित साध। विजय वर्मा, केनी बसुमतारी। संजय मिश्रा, मुहम्मद अली, श्रुति हसन

निर्देशक – तिग्मांशु धूलिया

कैटेगरी – क्राइम ड्रामा

ओटीटी प्लेटफॉर्म- ZEE5

अवधि – 2 घंटा 10 मिनट

स्टार – 4

महामारी को ध्यान मे रखते हुए फाइनली ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में रिलीज होने लगी है। पिछले सप्ताह 24 जुलाई को एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म ‘दिल बेचारा’ रिलीज हुई। इसके बाद अब अक्टूबर तक अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई फिल्में रिलीज होने वाली है। इसी क्रम में 30 जुलाई को फिल्म ‘यारा’ रिलीज हुई। जो चार दोस्तों की कहानी है। यह 2011 में आई फ्रेंज फीचर फिल्म ‘ए गैंग स्टोरी’ का रीमेक है।

कहानी

फिल्म चार दोस्तों फागुन, मितवा, रिजवान और बहादुर की कहानी है। इसके अलावा इनके एक चाचा भी है। जो इनको गैंगस्टर बनने में मदद करते हैं। जो चौकड़ी गैंग के नाम से मशहूर होता है। फिल्म की कहानी कुछ फ्लेसबैक और कुछ प्रेजेंट् में चल रही है। फ्लेसबैक में जहां उनकी दोस्ती के हर पल को बताया जा रहा है वहीं प्रजेन्ट में एक दोस्त को बचाने की जद्दोजहद चल रही है। शुरुआत में देश आजाद होने के बाद की स्थिति को बताया गया है, जहां दो बच्चों के सामने ही उनके पिता को मार दिया जाता है। और यही से शुरु होती है अपराध की दुनिया। जहां उन्हें चाचा एक ऐसा शख्स मिलता है जो उन्हें ड्रग्स सप्लाई के काम पर लगा देता है। यह सारा काम नेपाल और भारत के बॉर्डर पर किया जाता है। धीरे-धीरे यही से ये चार दोस्त हथियार सप्लाई, देसी शराब बनाने का काम शुरु करते है और अपना साम्राज्य स्थापित करते है। इसी बीच इनकी प्रेम कहानी भी शुरु होती है। लेकिन अंत में एक दोस्त धोखा दे देता है। किस दोस्त ने धोखा दिया यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी। 

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एक्टिंग

विदयुत जामवाल एक बार फिर एक्शन सीन से आपका दिल जीत सकते हैं। एक्शन के साथ-साथ श्रुति हसन के साथ उनकी कीमिस्ट्री बहुत अच्छी है। अमित साध, केन और विजय वर्मा भी अपने रोल में परफेक्ट है। चाचा के रोल में संजय मिश्रा भले ही कुछ देर के लिए नजर आएंगे लेकिन छवि पूरी फिल्म के लायक बनाकर चले जाएंगे। 

डायरेक्शन

हासिल और पान सिंह तोमर जैसी फिल्मों के डायरेक्ट रहे चुके तिग्मांशु धूलिया ने इस बार भी अपना बेस्ट देने की कोशिश की है। जहां 70 के दशक से लेकर 20 सदीं को पेश किया है। जिसमें शहर, गांव, यूनिर्वसिटी को दिखाया गया है।

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