विश्व पृथ्वी दिवस आज ,अपनी दुनिया के संरक्षण के लिए  कुछ ख़ास कदम 

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पृथ्वी है हमारा एकमात्र घर ,चलो इसे मिलकर बचाएँ


हम आये दिन अपने घर को साफ़ सफाई करते रहते है  और लगातार घर की छोटी मोटी हानि की भी  जिम्मेदारी से मरम्मत करवाते हैं , ज़रा सी भी लापरवाही नहीं करते, क्यों ? क्योंकि हम जानते है की हमे जिंदगी भर अपने घर में रहना है और सुरक्षित रहना है. आरामदाय ज़िन्दगी के लिए जरूरी भी हैं की घर सबसे अच्छा हो ,मगर जब बात आती है पृथ्वी की तो हम अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं समझते ?आखिर रहना तो हमे अपनी प्यारी पृथ्वी पर ही हैं ,आप तो जानते ही होंगे की पृथ्वी एक ऐसा  इकलौता गृह हैं जहाँ जीवन संभव हैं फिर हम इतनी लापरवाही क्यों बरतते हैं ?आपको बता दें कि पूरे विश्व में पृथ्वी संरक्षण के लिए कई सारे कार्यक्रम मौजूद है  पर्यावरण को बचने के लिए कई सारी मुहीम भी चालू की गयी हैं इसलिए आज यानी 22 अप्रैल को लोगो को पृथ्वी बचाने के लिए’विश्व पृथ्वी दिवस ‘के जरिये जागरूकता का सन्देश दिया जाता है जिसमे पुरे विश्व भर के लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते नज़र आते हैं.

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क्यों और कैसे मनाया जाता है पृथ्वी दिवस ?

पृथ्वी बहुत ही सुंदर ग्रह है जिसका एक बड़ा भाग पानी से ढका हुआ है जिसको पानी की अधिकता के कारण ब्लू प्लैनेट के रूप में भी जाना जाता है, ग्लोबल वार्मिंग की वजह से यह सुंदर ग्रह अब खतरे में नज़र आ रहा है जिसको बचाने के लिए पृथ्वी दिवस जैसे जागरूक कार्यक्रम को चलाकर सबको इसे बचाने के लिए जागरूक करने की आवश्यकता है. 22 अप्रैल का दिन  नेल्सन ने इसलिए चुना क्योंकि अप्रैल के समय में हर स्कूल और कॉलेज में छुट्टियों का समय रहता है.इस दिन लोग पेड़ पौधे लगाते है, गंदगी की सफाई के लिए जो भी कार्यक्रम चलाये जाते है उनमे भाग लेते है, और पृथ्वी को पर्यावरण के माध्यम से सुरक्षित रखने वाले विषय वस्तु के सम्मलेन में भाग लेते है. लेकिन इस दिन को सरकारी तौर पर छुट्टी का दिन नहीं घोषित किया गया है. सामन्यतः पृथ्वी दिवस के दिन लोगों के द्वारा पेड़ों को लगाकर आस पास की सफाई करके इसे उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस तरह के आयोजन में लाखों लोग भाग लेते है और अपनी रूचि दिखाते है और आयोजन को सफल बनाने का प्रयास भी करते है.

किन बातो से है पृथ्वी को खतरा

हमारे प्लेनेट पर ग्लोबल वार्मिंग की दिक्कत तेज़ी से बढ़ती चली जा  रही है जिससे पृथ्वी के साथ साथ मानव जाति को भी खतरा हो सकता है ,दूसरा मुख्या कारण  है जनसँख्या में वृद्धि ,पृथ्वी में लगातार जनसख्या में बढ़ोतरी हो रही है जिससे मानव साधन और संसाधाम की भी कमी का सामना करना पड़ सकता है तो जाहिर है की  ग्लेशियरों का पिघलना भी मुख्या कारण  है  जिसके करण पृथ्वी जलमग्न हो सकती है.

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